देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo इस समय भारी संकट से गुजर रही है. DGCA के नए weekly rest और night-duty नियम लागू होते ही इंडिगो का पूरा नेटवर्क लड़खड़ा गया है. 1700 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुई हैं. हजारों यात्रियों को परेशानी हो रही है और देशभर के एयरपोर्ट्स पर अफरातफरी का माहौल है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वही नियम बाकी एयरलाइंस को उतना प्रभावित नहीं कर पाए. ऐसे में सवाल उठता है कि IndiGo ही क्यों फेल हुई, बाकी क्यों नहीं?
दरअसल, नए नियमों के तहत पायलटों और क्रू को साप्ताहिक आराम 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे करना अनिवार्य हो गया. साथ ही, रात में उड़ानें और ‘रेड-आई’ ऑपरेशंस पर अतिरिक्त पाबंदियां लगा दी गईं. इससे नियम तो सभी पर बराबर लागू हुए, लेकिन इंडिगो की उड़ानें धड़ाधड़ रद्द होने लगीं.
कहां हुई इंडिगो से चूक
पहला बड़ा कारण:
इंडिगो का नेटवर्क बहुत बड़ा है और इसका ऑपरेशन ‘हाइपर-यूज़’ मॉडल पर चलता है. देश की लगभग 60% से ज्यादा घरेलू उड़ानों का बोझ अकेले इंडिगो के पास है. इसका मतलब यह हुआ कि कम क्रू में ज्यादा फ्लाइटें और हर मिनट की देरी अगली उड़ान को सीधे प्रभावित करती है. नए नियमों ने इसी टाइट रोस्टर को तोड़ दिया.
दूसरा कारण:
इंडिगो की रात की उड़ानें और ‘कनेक्टिंग’ पैटर्न सबसे ज्यादा हैं. रात की लैंडिंग और नाइट-ड्यूटी पर नियम कड़े होते ही, कंपनी को अतिरिक्त पायलटों की जरूरत पड़ी, जो मौजूद ही नहीं थे. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इंडिगो नए FDTL नियमों के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर पाई, जबकि दूसरी एयरलाइंस पिछले ही महीनों में अपने रोस्टर और क्रू-प्लानिंग को नियमों के हिसाब से समायोजित कर चुकी थीं.
तीसरा कारण:
इंडिगो बरसों से ‘लीन स्टाफिंग’ मॉडल पर काम करती है. कम स्टाफ, ज्यादा काम, और अधिक फ्लाइट ऑपरेशन. यही मॉडल इस बार उलटा पड़ गया. DGCA के नियमों से अचानक अतिरिक्त पायलटों की जरूरत बढ़ी और इंडिगो के पास बैक-अप टीम पर्याप्त नहीं थी.
दूसरी एयरलाइंस को नहीं हुई ज्यादा परेशानी
इसी कारण, IndiGo का पूरा नेटवर्क गड़बड़ा गया. एक फ्लाइट लेट, तो उस विमान और क्रू की तीन-चार अगली फ्लाइटें भी प्रभावित हुईं. जबकि Vistara, Air India, Akasa या AirAsia जैसी एयरलाइंस, जिनका नेटवर्क छोटा और कम उपयोग वाला है, उनके लिए यह बदलाव संभालना आसान रहा.
कुल मिलाकर, नियम सभी के लिए बदले, लेकिन प्रभावित सिर्फ वही हुआ जो सबसे ज्यादा फ्लाइटें उड़ाता था और सबसे कम मार्जिन पर उन्हें चलाता था.
इंडिगो ने अब DGCA से राहत मांगी है और रोस्टर सुधारने की कवायद जारी है. अपने बयान में DGCA ने बताया कि इंडिगो ने 10 फरवरी 2026 तक अपने बेड़े के लिए कुछ फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FTDL) के नए नियमों में अस्थायी परिचालन छूट मांगी है. DGCA ने बताया कि इंडिगो ने यह आश्वासन दिया है कि 10 फरवरी तक उड़ानों के परिचालन में स्थिरता आ जाएगी. फिलहाल इंडिगो करीब 200 उड़ाने रोज रद्द कर रहा है.

1 नवंबर से लागू हुए FDTL के सख्त नियम
बता दें कि 1 नवंबर से FDTL (Flight Duty Time Limitations) का दूसरा चरण लागू हुआ. इसके तहत पायलटों की अनिवार्य साप्ताहिक आराम की अवधि 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दी गई. रात में होने वाली लैंडिंग की सीमा 6 से घटाकर 2 कर दी गई. इन बदलावों का उद्देश्य था पायलटों की थकान कम करना और विमान परिचालन की सुरक्षा बढ़ाना है. इस नई व्यवस्था के लिए इंडिगो तैयार नहीं थी, जबकि अन्य भारतीय एयरलाइंस बगैर किसी ऐसे संकट के अपना काम सुचारू रूप से कर रही हैं. DGCA को इंडिगो ने बताया कि वो 1 नवंबर से लागू हुए इन नियमों के बाद से केबिन क्रू की कमी से जूझ रहा है.
बता दें कि इंडिगो की 2200 से अधिक उड़ानों में से बड़ी संख्या में रात में परिचालन करती हैं. उसने मौजूदा संकट का एक बड़ा कारण ड्यूटी की तय नई समय सीमाओं के लागू होने से पहले अपने पायलटों के ड्यूटी शेड्यूल को नहीं बना पाना भी बताया.
संसद में गूंजा इंडिगो का मुद्दा
शुक्रवार को संसद की शीतकालीन सत्र में भी इंडिगो के संकट का मसला उठा. विपक्षी दल कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर इसका आरोप मढ़ा और कहा कि इंडिगो संकट वर्तमान सरकार के ‘एकाधिकार मॉडल’ का नतीजा है. राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने कहा कि इसका कारण नए नियमों के तहत अधिक पायलटों की भर्ती की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि एयरलाइन के पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है, जबकि पायलटों को दो दिन का अनिवार्य आराम चाहिए और अटेंडेंट्स को कई उड़ानों में लगातार नहीं लगाया जा सकता. रेखा शर्मा ने कहा कि ये नए नियम जनता के हित और सुरक्षा के लिए हैं.
DGCA, केंद्र सरकार की फटकार और किराया नहीं बढ़ाने का निर्देश
बड़े स्तर की अव्यवस्था देखते हुए DGCA ने रात की उड़ानों पर लगी सीमा में एक बार की अस्थायी छूट दी. साथ ही उसने सख्त रुख भी अपनाया. उसने इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. DGCA ने इंडिगो से विस्तृत सुधार योजना मांगी है. इस बीच सिविल एविएशन मिनिस्ट्री का बयान आया है, जिसमें लोगों की परेशानी दूर करने के लिए हर मुमकिन कदम उठाने का भरोसा दिलाया गया है. नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि इंडिगो को पहले से काफी समय मिला था, फिर भी तैयारी कमजोर रही. मंत्रालय ने एयरलाइन को आदेश दिया कि ऑपरेशन जल्द से जल्द सामान्य किए जाएं, साथ ही इंडिगो को किराया नहीं बढ़ाने को लेकर भी सख्त हिदायत दी गई है.
- नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन्स (FDTL) पॉलिसी को अस्थायी तौर पर ताक में रख दिया गया है, जिससे इंडिगो फ्लाइट ऑपरेशंस को सामान्य किया जा सके
- सभी एयरलाइन्स खासकर इंडिगो को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे हर पैसेंजर को सही समय पर सही अपडेट दें, जिससे किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति न बन पाए.
- रद्द फ्लाइट्स का पूरा ऑटोमेटिक रिफंड अनिवार्य कर दिया गया है. अब पैसेंजर्स को अपने एयर फेयर रिफंड के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा.
- लंबे समय से एयरपोर्ट पर फंसे पैसेंजर्स खासकर सीनियर सिटिजन और दिव्यांग पैसेंजर्स को तुरं होटल, फूड और स्पेशल असिस्टेंस उपलब्ध कराया जाए.
- एक हाईलेवल कमेटी भी गठित की गई है, जो यह पता लगाएगी कि सिस्टम ब्रेकडाउन के असली वजह क्या थी.
विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा है कि इंडिगो एयरलाइन का परिचालन संकट जल्द ही हल होने वाला है और एयरलाइन के खिलाफ कार्रवाई केवल समय की बात है। एक न्यूज चैनल के साथ बातचीत में विमानन मंत्री ने कहा कि इंडिगो की एक हजार से अधिक उड़ानें रद्द होने के बावजूद अन्य एयरलाइनों को कोई समस्या नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियम नवंबर में लागू होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि समस्या इंडिगो की ओर से थी।
आईजीआई एयरपोर्ट से इंडिगो की सारी उड़ाने रद्द होने का खामियाजा यात्रियों के लिए मुसीबतों का सबब बना। समय से गंतव्य पर नहीं पहुंचने से परेशान यात्रियों को देखकर अन्य एयरलाइंस ने तीन गुना तक अपनी फ्लाइट का किराया बढ़ा दिया और इस दिक्कत को टैक्सी वालों ने भी नहीं समझा और जमकर किराया वसूला। सबसे ज्यादा मार दिल्ली-मुंबई जैसे व्यस्त रूट पर पड़ी।







