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इंडिगो का संकट हवाई यात्रियों के लिए भीषण मुसीबत का सबब बन रहा है, आज भी कई फ्लाईट हुई रद्द …………….

UB India News by UB India News
December 7, 2025
in परिवहन
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गंभीर संकट से गुजर रही देश की बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो, 100 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल……..
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देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo इस समय भारी संकट से गुजर रही है. DGCA के नए weekly rest और night-duty नियम लागू होते ही इंडिगो का पूरा नेटवर्क लड़खड़ा गया है. 1700 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुई हैं. हजारों यात्रियों को परेशानी हो रही है और देशभर के एयरपोर्ट्स पर अफरातफरी का माहौल है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वही नियम बाकी एयरलाइंस को उतना प्रभावित नहीं कर पाए. ऐसे में सवाल उठता है कि IndiGo ही क्यों फेल हुई, बाकी क्यों नहीं?

दरअसल, नए नियमों के तहत पायलटों और क्रू को साप्ताहिक आराम 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे करना अनिवार्य हो गया. साथ ही, रात में उड़ानें और ‘रेड-आई’ ऑपरेशंस पर अतिरिक्त पाबंदियां लगा दी गईं. इससे नियम तो सभी पर बराबर लागू हुए, लेकिन इंडिगो की उड़ानें धड़ाधड़ रद्द होने लगीं.

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कहां हुई इंडिगो से चूक

पहला बड़ा कारण:

इंडिगो का नेटवर्क बहुत बड़ा है और इसका ऑपरेशन ‘हाइपर-यूज़’ मॉडल पर चलता है. देश की लगभग 60% से ज्यादा घरेलू उड़ानों का बोझ अकेले इंडिगो के पास है. इसका मतलब यह हुआ कि कम क्रू में ज्यादा फ्लाइटें और हर मिनट की देरी अगली उड़ान को सीधे प्रभावित करती है. नए नियमों ने इसी टाइट रोस्टर को तोड़ दिया.

दूसरा कारण: 

इंडिगो की रात की उड़ानें और ‘कनेक्टिंग’ पैटर्न सबसे ज्यादा हैं. रात की लैंडिंग और नाइट-ड्यूटी पर नियम कड़े होते ही, कंपनी को अतिरिक्त पायलटों की जरूरत पड़ी, जो मौजूद ही नहीं थे. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इंडिगो नए FDTL नियमों के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर पाई, जबकि दूसरी एयरलाइंस पिछले ही महीनों में अपने रोस्टर और क्रू-प्लानिंग को नियमों के हिसाब से समायोजित कर चुकी थीं.

तीसरा कारण: 

इंडिगो बरसों से ‘लीन स्टाफिंग’ मॉडल पर काम करती है. कम स्टाफ, ज्यादा काम, और अधिक फ्लाइट ऑपरेशन. यही मॉडल इस बार उलटा पड़ गया. DGCA के नियमों से अचानक अतिरिक्त पायलटों की जरूरत बढ़ी और इंडिगो के पास बैक-अप टीम पर्याप्त नहीं थी.

दूसरी एयरलाइंस को नहीं हुई ज्यादा परेशानी

इसी कारण, IndiGo का पूरा नेटवर्क गड़बड़ा गया. एक फ्लाइट लेट, तो उस विमान और क्रू की तीन-चार अगली फ्लाइटें भी प्रभावित हुईं. जबकि Vistara, Air India, Akasa या AirAsia जैसी एयरलाइंस, जिनका नेटवर्क छोटा और कम उपयोग वाला है, उनके लिए यह बदलाव संभालना आसान रहा.

कुल मिलाकर, नियम सभी के लिए बदले, लेकिन प्रभावित सिर्फ वही हुआ जो सबसे ज्यादा फ्लाइटें उड़ाता था और सबसे कम मार्जिन पर उन्हें चलाता था.

इंडिगो ने अब DGCA से राहत मांगी है और रोस्टर सुधारने की कवायद जारी है. अपने बयान में DGCA ने बताया कि इंडिगो ने 10 फरवरी 2026 तक अपने बेड़े के लिए कुछ फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FTDL) के नए नियमों में अस्थायी परिचालन छूट मांगी है. DGCA ने बताया कि इंडिगो ने यह आश्वासन दिया है कि 10 फरवरी तक उड़ानों के परिचालन में स्थिरता आ जाएगी. फिलहाल इंडिगो करीब 200 उड़ाने रोज रद्द कर रहा है.

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1 नवंबर से लागू हुए FDTL के सख्त नियम

बता दें कि 1 नवंबर से FDTL (Flight Duty Time Limitations) का दूसरा चरण लागू हुआ. इसके तहत पायलटों की अनिवार्य साप्ताहिक आराम की अवधि 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दी गई. रात में होने वाली लैंडिंग की सीमा 6 से घटाकर 2 कर दी गई. इन बदलावों का उद्देश्य था पायलटों की थकान कम करना और विमान परिचालन की सुरक्षा बढ़ाना है. इस नई व्यवस्था के लिए इंडिगो तैयार नहीं थी, जबकि अन्य भारतीय एयरलाइंस बगैर किसी ऐसे संकट के अपना काम सुचारू रूप से कर रही हैं. DGCA को इंडिगो ने बताया कि वो 1 नवंबर से लागू हुए इन नियमों के बाद से केबिन क्रू की कमी से जूझ रहा है.

बता दें कि इंडिगो की 2200 से अधिक उड़ानों में से बड़ी संख्या में रात में परिचालन करती हैं. उसने मौजूदा संकट का एक बड़ा कारण ड्यूटी की तय नई समय सीमाओं के लागू होने से पहले अपने पायलटों के ड्यूटी शेड्यूल को नहीं बना पाना भी बताया.

संसद में गूंजा इंडिगो का मुद्दा

शुक्रवार को संसद की शीतकालीन सत्र में भी इंडिगो के संकट का मसला उठा. विपक्षी दल कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर इसका आरोप मढ़ा और कहा कि इंडिगो संकट वर्तमान सरकार के ‘एकाधिकार मॉडल’ का नतीजा है. राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने कहा कि इसका कारण नए नियमों के तहत अधिक पायलटों की भर्ती की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि एयरलाइन के पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है, जबकि पायलटों को दो दिन का अनिवार्य आराम चाहिए और अटेंडेंट्स को कई उड़ानों में लगातार नहीं लगाया जा सकता. रेखा शर्मा ने कहा कि ये नए नियम जनता के हित और सुरक्षा के लिए हैं.

DGCA, केंद्र सरकार की फटकार और किराया नहीं बढ़ाने का निर्देश

बड़े स्तर की अव्यवस्था देखते हुए DGCA ने रात की उड़ानों पर लगी सीमा में एक बार की अस्थायी छूट दी. साथ ही उसने सख्त रुख भी अपनाया. उसने इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की.  DGCA ने इंडिगो से विस्तृत सुधार योजना मांगी है. इस बीच सिविल एविएशन मिनिस्ट्री का बयान आया है, जिसमें लोगों की परेशानी दूर करने के लिए हर मुमकिन कदम उठाने का भरोसा दिलाया गया है. नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि इंडिगो को पहले से काफी समय मिला था, फिर भी तैयारी कमजोर रही. मंत्रालय ने एयरलाइन को आदेश दिया कि ऑपरेशन जल्द से जल्द सामान्य किए जाएं, साथ ही इंडिगो को किराया नहीं बढ़ाने को लेकर भी सख्त हिदायत दी गई है.

इंडिगो संकट के चलते बीते चार दिनों से जारी फ्लाइट कैंसलेशन्‍स ने पैसेंजर्स को बेहाल कर दिया है. हालात इस कदर बिगड़ गए कि गृहमंत्री अम‍ित शाह को हस्‍तक्षेप करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय से बात करनी पड़ी. इसके बाद, फ्लाइट कैंसलेशन, घंटों लंबे डिले, रूट डिसरप्शन और एयरपोर्ट्स पर मची अफरा-तफरी को पटरी में लाने के लिए खुद केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू को खुद मोर्चा संभालना पड़ा. इसके बाद, इंडिगो के ऑफिशियल्‍स को एक बार फिर ताब किया गया. मीटिंग में उड्डयन मंत्री इंडिगो के रुख से असंतुष्‍ट नजर आए. मीटिंग में हालात को सामान्‍य करने के लिए आवश्‍यक दिशानिर्देश दिए गए.
इस बीच उड्डयन मंत्री ने यह भी साफ कर दिया कि हमें कोई मजबूर नहीं कर सकता है. हालात सामान्‍य होने के बाद इंडिगो पर कार्रवाई भी होगी और मोटा जुर्माना भी लगेगा. इसके बाद, इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स सामने आए और माफी मांगते हुए उन्‍होंने माना कि 5 दिसंबर को एयरलाइन की 1000 से अधिक फ्लाइट कैंसल हुईं. इंडिगो सीईओ ने माना कि उसकी ऑपरेशनल चेन में एक साथ आई कई तकनीकी और स्टाफिंग चुनौतियों के कारण फ्लाइट ऑपरेशंस में प्रॉब्‍लम आईं. एयरलाइन ने कहा कि कुछ दिन का समय लग सकता है.
संकट खत्‍म करने के लिए डीजीसीए के ताबड़तोड़ एक्शन
  1. नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन्‍स (FDTL) पॉलिसी को अस्थायी तौर पर ताक में रख दिया गया है, जिससे इंडिगो फ्लाइट ऑपरेशंस को सामान्‍य किया जा सके
  2. सभी एयरलाइन्‍स खासकर इंडिगो को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे हर पैसेंजर को सही समय पर सही अपडेट दें, जिससे किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति न बन पाए.
  3. रद्द फ्लाइट्स का पूरा ऑटोमेटिक रिफंड अनिवार्य कर दिया गया है. अब पैसेंजर्स को अपने एयर फेयर रिफंड के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा.
  4. लंबे समय से एयरपोर्ट पर फंसे पैसेंजर्स खासकर सीनियर सिटिजन और दिव्यांग पैसेंजर्स को तुरं होटल, फूड और स्‍पेशल असिस्‍टेंस उपलब्‍ध कराया जाए.
  5. एक हाईलेवल कमेटी भी गठित की गई है, जो यह पता लगाएगी कि सिस्टम ब्रेकडाउन के असली वजह क्‍या थी.
बीते 48 घंटे से जारी कवायद के बीच पैसेंजर्स की स्थिति जस की तस बनी हुई है. देश के कई एयरपोर्ट्स पर पैसेंजर्स की भारी भीड़ अलग-अलग तरह की परेशानियों से जूझ रही हैं.

विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा है कि इंडिगो एयरलाइन का परिचालन संकट जल्द ही हल होने वाला है और एयरलाइन के खिलाफ कार्रवाई केवल समय की बात है। एक न्यूज चैनल के साथ बातचीत में विमानन मंत्री ने कहा कि इंडिगो की एक हजार से अधिक उड़ानें रद्द होने के बावजूद अन्य एयरलाइनों को कोई समस्या नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियम नवंबर में लागू होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि समस्या इंडिगो की ओर से थी।

नायडू ने बताया कि मेट्रो शहरों के हवाई अड्डों पर भीड़ कम हो गई है और दिल्ली, मुंबई, चेन्नई सहित अधिकांश हवाई अड्डों पर पिछले दिनों फंसे यात्रियों की कतारें अब खत्म हो गई हैं। इंडिगो कल से सीमित क्षमता के साथ उड़ानें फिर से शुरू करेगा और धीरे-धीरे क्षमता बढ़ाई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिया कि यात्रियों को कल से परेशानी नहीं होगी, जबकि एयरलाइन की पूरी क्षमता पर लौटने में कुछ और दिन लग सकते हैं। नायडू ने यह भी स्पष्ट किया कि विमानन मंत्रालय और डीजीसीए ने इस तरह की स्थिति की पूर्व चेतावनी नहीं देने में कोई लापरवाही नहीं की।

आईजीआई एयरपोर्ट से इंडिगो की सारी उड़ाने रद्द होने का खामियाजा यात्रियों के लिए मुसीबतों का सबब बना। समय से गंतव्य पर नहीं पहुंचने से परेशान यात्रियों को देखकर अन्य एयरलाइंस ने तीन गुना तक अपनी फ्लाइट का किराया बढ़ा दिया और इस दिक्कत को टैक्सी वालों ने भी नहीं समझा और जमकर किराया वसूला। सबसे ज्यादा मार दिल्ली-मुंबई जैसे व्यस्त रूट पर पड़ी।

सामान्य दिनों में दिल्ली से मुंबई का एकतरफा किराया 4,500 से 6,000 रुपये के बीच रहता है, लेकिन इंडिगो की उड़ानें रद्द होने के बाद यह किराया रातोंरात 25,000 से 30,000 रुपये तक पहुंच गया। यदि किसी यात्री को 6 दिसंबर को दिल्ली से मुम्बई जाना है तो उसे 30 हजार रुपये किराया देना होगा। एक यात्री ने बताया कि मेरी इंडिगो की फ्लाइट रद्द हो गई। दूसरी एयरलाइन में सीट बुक कराई तो किराया तीन गुना से ज्यादा था।

एयरलाइंस की इस मनमानी पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सभी एयरलाइंस को निर्देश दिए हैं कि संकट की इस घड़ी में किराए को नियंत्रित रखा जाए। अगर कोई एयरलाइन किराया बढ़ाती है तो तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

एयरपोर्ट के बाहर भी यात्रियों पर किराए की मार
हवाई किराए की मार के अलावा एयरपोर्ट के बाहर भी यात्रियों की शामत आई। टर्मिनल-3 से बाहर निकलने या नजदीकी जगहों पर जाने के लिए टैक्सी और कैब चालकों ने मनमाने दाम वसूलने शुरू कर दिए। यात्रियों ने शिकायत की कि टी-3 से टी-2 टर्मिनल तक जाने के लिए भी 800-1000 रुपये मांगे जा रहे थे, जबकि सामान्य दिनों में 200 से 300 रुपये किराया होता है। द्वारका, गुरुग्राम या सेंट्रल दिल्ली जाने का किराया जहां सामान्य दिनों में 400 से 700 रुपये होता है, वह रात में 1500 से 2000 रुपये तक वसूल किया गया। दिल्ली पुलिस और एयरपोर्ट अथॉरिटी को भी इस बाबत कई शिकायतें मिली हैं।

वर्ल्ड क्लास एयरपोर्ट पर टैक्सी, बस, रेलवे स्टेशन जैसे हालात
देश के सबसे आधुनिक और ‘वर्ल्ड क्लास’ कहे जाने वाले इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर जो हालात बने, उसे देखकर कोई भी यात्री हैरान रह गया। अचानक मीडिएटर टर्मिनल के सभी बाहर निकलने वाले गेट बंद कर दिए गए। बाहर टैक्सी, ऑटो या बस स्टैंड तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं बचा। इससे एयरपोर्ट के अंदर हजारों यात्री इधर-उधर भटकते रहे। एयरपोर्ट अधिकारियों ने शुरू में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। बाद में बताया गया कि सुरक्षा कारणों से मीडिएटर टर्मिनल के बाहर जाने वाले सभी गेट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए थे। एक यात्री ने कहा कि लग रहा था मानो हम किसी लोकल बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन पर आ गए हैं। यात्रियों की भीड़ से जुड़े फोटो व वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए।

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