राज्यपाल का अभिभाषण और सरकार की प्राथमिकताएं
NeVA की मदद से विधायक पूछेंगे सवाल, ऑनलाइन मिलेगा जवाब
सवाल पूछने से लेकर जवाब देने तक, सब काम ऑनलाइन होंगे। इसके लिए ‘नेशनल ई-विधान’ (NeVA) ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। विधायक अपने मोबाइल फोन या टैबलेट पर NeVA ऐप इंस्टॉल करेंगे। यह एंड्रॉइड और आईओएस दोनों तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए उपलब्ध है।
विधायक अपने सवाल NeVA ऐप के जरिए पूछेंगे। उन्हें जवाब ऑनलाइन मिलेंगे। मंत्री विधानसभा के अंदर टैबलेट का इस्तेमाल कर विधायक के सवाल का जवाब देंगे। सदस्य अपने भाषण ऐप के जरिए अपलोड कर सकते हैं और विधानसभा में टैबलेट देखकर दे सकते हैं। टैबलेट मूवेबल है।
क्या है नेशनल ई-विधान?
नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत एक मिशन-मोड प्रोजेक्ट है। इसका उद्देश्य विधानसभा में डिजिटल फॉर्मेट में कामकाज कराना है।
गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, नगालैंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, केरल, आंध्र प्रदेश और गोवा में इस प्रोजेक्ट के तहत काम हो रहा है।
विधायक कैसे पूछेंगे सवाल, कैसे मिलेगा जवाब?
NeVA का इस्तेमाल विधायक सवाल पूछने में कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें टैबलेट या मोबाइल फोन में NeVA ऐप इंस्टॉल करना होगा। इसके बाद यूजरनेम और पासवर्ड डालकर लॉगइन करना होगा।
लॉगइन करने के बाद विधायक अपने सवाल या नोटिस ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। सवाल जिस मंत्रालय से जुड़ा होगा उसके पास जाएगा। संबंधित मंत्रालय द्वारा जो जवाब दिया जाएगा वह विधायक को मिल जाएगा।
सदन में लगाए गए सेंसर वाले माइक
विधानसभा में ई-विधान प्रोजेक्ट के तहत नए सेंसर वाले माइक लगाए गए हैं। इससे कार्यवाही अधिक सुचारू और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। ये माइक विधायक के बैठने के स्थान के अनुसार चालू या बंद हो जाते हैं।
विधायक के माइक का कंट्रोल स्पीकर के हाथ में होता है। विधायक के माइक को ऑन करना है या ऑफ, इसके लिए कंट्रोलर काम करते हैं। जब विधायक के बोलने की बारी आती है तो कंट्रोलर उनकी माइक ऑन करते हैं। विधायक की बात पूरी होते ही माइक ऑफ कर दी जाती है। कोशिश रहती है कि सदन में एक बार में एक सदस्य का माइक ऑन रहे ताकि शोर न हो।
लगाए गए 6 बड़े टीवी, नए हेड सेट
सदन में 6 बड़े टीवी लगाए गए हैं। वोटिंग के दौरान इनमें रिजल्ट दिखेगा। मतदान के समय सदस्यों की गिनती दिखाई जाएगी। सदन में हाई-स्पीड वाई-फाई की सुविधा दी गई है।
विधायक सदन में कही गई बातों को सुनने के लिए हेड सेट इस्तेमाल करते हैं। हंगामे के दौरान इसका महत्व बढ़ जाता है। विधायकों को सुनने के लिए मिले हेड सेट बदले गए हैं। नए हाईटेक हेडसेट लगाए गए हैं।
हर सीट पर हेड सेट के साथ डिजिटल डिस्प्ले लगाया गया है। वॉल्यूम कम और ज्यादा करने के लिए सॉफ्ट बटन दिया गया है। डिस्प्ले पर वॉल्यूम डिजिटली दिखाई देता है।
323 टैबलेट और माइक लगाने की है जगह
विधानसभा में नई व्यवस्था भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखकर बनाई गई है। मौजूदा समय में बिहार में 243 विधायक चुनकर सदन पहुंचते हैं। सदन में 323 टैबलेट और माइक लगाने की जगह दी गई है।
इसकी वजह अगले लोकसभा चुनाव से पहले देश में परिसीमन होना है। इसके बाद बिहार में विधानसभा की सीटें 243 से बढ़कर लगभग 323 हो सकती हैं।
एनआईसी को मिली जिम्मेदारी
विधानसभा सचिवालय ने सदन के काम-काज को हाईटेक करने की जिम्मेदारी एनआईसी को सौंपी है। एनआईसी ने सिस्टम तैयार कर लिया है। इसे फाइनल टच दिया जा रहा है। शपथ ग्रहण से पहले यह काम करने लगेगा।
सदन में लगे 248 टैबलेट, 16-17 विधायकों को बगल में झांकना होगा
वैसे तो सदन में 248 टैबलेट लगाए गए हैं। सभी विधायक और मंत्री को टैबलेट देना है। स्पीकर, सचिव और टेबल रिपोर्टर के लिए भी टैबलेट लगाए गए हैं, लेकिन विधान परिषद कोटे से बने मंत्रियों के चलते विधायकों के टैबलेट कम पड़ गए हैं। मुख्यमंत्री समेत 6 मंत्री विधान परिषद के सदस्य हैं।
दूसरी ओर टैबलेट लगाने में एक और समस्या सामने आई है। कोने के सबसे आगे की लाइन में टैबलेट लगाने की जगह नहीं है। इसके चलते यहां बैठने वाले विधायकों को तत्काल टैबलेट की सुविधा नहीं मिलेगी। इन्हें बगल के सदस्य के टैबलेट का इस्तेमाल करना होगा। कुल मिलाकर 16-17 विधायकों को बगल के साथी के टैबलेट का सहारा लेना होगा।
विधानसभा सत्र का मुख्य एजेंडा
- इस सत्र में सरकार द्वारा द्वितीय अनुपूरक बजट (Second Supplementary Budget) पेश किए जाने की योजना है.
- 4 दिसंबर को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी और सरकार जवाब देगी.
- 5 दिसंबर को सत्र के आखिरी दिन अनुपूरक व्यय विवरणी पर बहस होगी, जिसके बाद विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) पेश किया जाएगा.
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बिहार विधानसभा सत्र में क्या है खास?
- यह पहला मौका है जब 18वीं विधानसभा डिजिटल-पेपरलेस मोड में चलेगी. टैबलेट बेस्ड सिस्टम, इंटरनेट-डिस्प्ले स्क्रीन-ऐसी आधुनिक व्यवस्थाएं पारदर्शिता के साथ परफेक्शन और बिहार के लिए यह एक अहम परिवर्तन है.
- धारा 163 जैसे कड़े प्रतिबंध-प्रदर्शन, धरना, लोकतांत्रिक गतिविधियों और विरोध-प्रदर्शन की आजादी पर सवाल खड़े कर सकता है. विशेष रूप से विपक्ष या नागरिक समाज के लिए ये नियम चुनौती बन सकते हैं.
- नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार यानी एनडीए के पास असाधारण बहुमत (202/243) है. इस स्थिति में सरकार को विधायी मंजूरी पाने में कोई मुश्किल नहीं होगी.
- विपक्ष के लिए सीमित सीटों (35) पर रणनीति तय करना और महागठबंधन को संगठित रखना भी बड़ी चुनौती है जो सत्र को सुचारू या विवाद-मुक्त बनाए रखने के लिए महत्त्वपूर्ण है.







