इंडियन डेयरी एसोसिएशन, बिहार स्टेट चैप्टर के ऑफिस परिसर में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर पद्म विभूषण, मिल्क मैन ऑफ इंडिया डॉ वर्गीज कुरियन की याद में वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस कार्य क्रम की अध्यक्षता आईडीए बिहार चैप्टर के अध्यक्ष श्री धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने की। उन्होंने विस्तार से डॉ कुरियन की जीवनी और उनकी उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारतीय दुग्ध उद्योग के जनक डॉ. वर्गीस कुरियन को सम्मान देने के लिए समर्पित है, जिन्हें श्वेत क्रांति के पिता (Father of the White Revolution) कहा जाता है। भारत को दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और सफेद क्रांति लाने में उनका योगदान अभूतपूर्व रहा है। डॉ. कुरियन को विश्व के व्यापक कृषि कार्यक्रम ऑपरेशन फ्लड का नेतृत्व करने के कारण भारत में श्वेत क्रांति का जनक माना जाता है। डॉ. वर्गीस कुरियन ने 14 दिसंबर 1946 को अमूल की शुरुआत की थी। इसकी शुरुआत दो सहकारी डेयरी समितियों और केवल 247 लीटर दूध से हुई थी। इसके अलावा, यह पोल्सन डेयरी में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ने में किसानों की मदद करने की एक पहल थी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय दुग्ध दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि किसानों को सशक्त बनाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और सहकारी मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प है। डॉ. कुरियन की विरासत हमें लगातार प्रेरित करती रहेगी। डॉ. कुरियन ने किसानों को संगठित कर अमूल मॉडल के माध्यम से सहकारी आंदोलन की ऐसी नींव रखी, जिसने भारत को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाया, जो डॉ. कुरियन के दूरदर्शी नेतृत्व और ‘ऑपरेशन फ्लड’ की ऐतिहासिक सफलता का परिणाम है।

अपने संबोधन में उन्होंने बिहार के दुग्ध क्षेत्र की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने, उन्नत नस्ल सुधार, और डिजिटल डेयरी प्रबंधन जैसी पहल को राज्य के के लिए बहुत ज़रूरी बताया । इस अवसर पर संजय गांधी गव्य प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर सूर्यमणि, डॉ संजीव, डॉ रविरंजन, महेश्वर प्रसाद, ईशान शुभम, मुकेश कुमार, रमन कुमार, धर्मेंद्र कुमार। आईडीए बिहार चैप्टर के उपाध्याय श्री प्रमोद कुमार सिन्हा सभी उपस्थित थे।







