जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले शासनाध्यक्षों ने शनिवार को अमेरिका द्वारा रोकने के प्रयासों के बावजूद सर्वसम्मति से एक घोषणापत्र को स्वीकार कर लिया। दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं सहयोग मामलों के मंत्री रोनाल्ड लामोला ने सरकारी चैनल ”एसएबीसी” के साथ बातचीत में इस घोषणापत्र को बहुपक्षवाद की पुष्टि करार दिया।
यह हमारे लिए एक महान पल है- दक्षिण अफ्रीका
उन्होंने कहा, यह हमारे लिए एक महान पल है, क्योंकि हमारा मानना है कि इससे अफ्रीका महाद्वीप में क्रांति आएगी। अमेरिका मेजबान देश के साथ राजनयिक मतभेद के चलते दो दिवसीय सम्मेलन का बहिष्कार कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बायकॉट के बावजूद 20वीं G20 समिट के पहले दिन शनिवार को सदस्य देशों ने साउथ अफ्रीका के बनाए घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया।
साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने बताया कि सभी देशों का अंतिम बयान पर सहमत होना बेहद जरूरी था, भले ही अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ।
ट्रम्प ने आखिरी सेशन में मेजबानी लेने के लिए एक अमेरिकी अधिकारी को भेजने की बात कही थी। रॉयटर्स के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने अमेरिकी अधिकारी को मेजबानी सौंपने के प्रस्ताव को नकार दिया।
अफ्रीकी राष्ट्रपति रामफोसा आज G20 की अगली अध्यक्षता ‘खाली कुर्सी’ को सौंपेंगे। दरअसल, G20 समिट की 2026 की मेजबानी अमेरिका को मिलनी है। हालांकि ट्रम्प के बायकॉट के चलते अमेरिका का कोई भी प्रतिनिधि समिट में शामिल नहीं हुआ।

मोदी बोले- पुराने डेवलपमेंट मॉडल को बदलना जरूरी
पीएम मोदी ने G20 समिट के पहले दो सत्रों को संबोधित किया। पहले सेशन में उन्होंने वैश्विक चुनौतियों पर भारत का नजरिया दुनिया के सामने रखा।
मोदी ने पुराने डेवलपमेंट मॉडल के मानकों पर दोबारा सोचने की अपील की। उन्होंने कहा- पुराने डेवलपमेंट मॉडल ने रिसोर्स छीने, इसे बदलना जरूरी है।
वहीं समिट के दूसरे सत्र में पीएम ने भारत के श्री अन्न (मोटा अनाज), जलवायु परिवर्तन, G20 सैटेलाइट डेटा पार्टनरशिप और डिजास्टर रिस्क रिडक्शन पर बात की।
पीएम मोदी ने कहा-
G20 ने भले ही दुनिया की अर्थव्यवस्था को दिशा दी हो, लेकिन आज की ग्लोबल विकास मॉडल के पैरामीटर्स ने बड़ी आबादी को रिसोर्स से वंचित किया है और प्रकृति के दोहन को बढ़ावा दिया है। अफ्रीकी देशों पर इसका असर सबसे ज्यादा दिखता है।
शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने और अपनी अनुपस्थिति में घोषणापत्र को अपनाने के प्रयासों में बाधा डालने के अमेरिका के कदम के बारे में लामोला ने कहा कि जी-20 अमेरिका के साथ या उसके बिना भी बरकरार रहेगा।
जी-20 को केवल आमंत्रित व्यक्ति की अनुपस्थिति के आधार पर ठप नहीं किया जा सकता। बहुपक्षीय मंच को सक्रिय रहना चाहिए। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से इसने अच्छा काम किया है, इसलिए दक्षिण अफ्रीका सभी बैठकों में यही संदेश दे रहा था कि हमें घोषणापत्र के साथ आगे बढ़ना होगा। एपी के अनुसार, जी-20 के सदस्य देशों ने परंपरा से हटकर शनिवार को शिखर सम्मेलन की शुरुआत में ही घोषणापत्र को स्वीकार कर लिया।
राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के प्रवक्ता ने कही ये बात
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के प्रवक्ता विंसेंट मैग्वेन्या ने कहा कि आमतौर पर घोषणापत्र को सबसे आखिर में अपनाया जाता है। लेकिनज् ऐसा लगा कि हमें घोषणापत्र को सबसे पहले स्वीकार करने की तरफ बढ़ना चाहिए। जोहानिसबर्ग में सम्मेलन की शुरुआत में ही नेताओं ने घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।
सभी देशों को जमीन पर कब्जे के लिए बल प्रयोग से बचना चाहिए
जी-20 ने शनिवार को एक सख्त संदेश में कहा कि सभी देशों को किसी अन्य देश की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध जमीन पर कब्जे की धमकी या बल प्रयोग से बचना चाहिए। घोषणापत्र में वैसे तो किसी देश का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से रूस, इजरायल और म्यांमार के संदर्भ में दिया गया बयान माना जा रहा है।
शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले राष्ट्राध्यक्षों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाए गए एक घोषणापत्र में यह भी कहा गया कि विभिन्न देशों को मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना चाहिए। इसमें नस्ल, लिंग, भाषा या धर्म के भेदभाव के बिना सभी के लिए मानवाधिकार और मौलिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना शामिल है। 39 पृष्ठों के इस दस्तावेज में ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और आपदा से निपटने का भी प्रमुखता से उल्लेख किया गया है।
मोदी ने G20 समिट में तीन पहल पेश कीं
1.वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार : इसका मकसद दुनिया के लोक ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा और सामुदायिक प्रथाओं को एक साथ लाना है।
2. अफ्रीका स्किल इनिशिएटिव: अफ्रीकी युवाओं के लिए कौशल विकास, ट्रेनिंग और रोजगार के नए अवसर बढ़ाने की योजना।
3. ड्रग–टेरर नेक्सस के खिलाफ इनिशिएटिव: प्रधानमंत्री ने इसे अहम बताते हुए कहा कि ड्रग तस्करी, अवैध पैसों का नेटवर्क और आतंकवाद की फंडिंग आपस में जुड़े हैं।
यह पहल इन्हें रोकने के लिए सदस्य देशों के वित्तीय, सुरक्षा और शासन तंत्र को एकजुट करेगी।मोदी के मुताबिक, इस फ्रेमवर्क से
दिल्ली घोषणा-पत्र की सराहना की गई
इस G-20 समिट के दौरान दिल्ली में 2023 के 18वें जी-20 घोषणा-पत्र की सभी सदस्य देशों ने सराहना की। इसके तहत महिला सशक्तिकरण, जलवायु परिवर्तन फंड और डिजिटल लिटरेसी को बढ़ावा देने के बिंदुओं की समीक्षा कर नए फैसले किए गए।
UN सुरक्षा परिषद (UNSC) का विस्तार कर भारत को भी जगह दिए जाने का प्रस्ताव पारित हुआ।
G7 देशों ने ही G20 बनाया
G20 को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के ग्रुप G7 के विस्तार के रूप में देखा जाता है। G7 में फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा हैं।
1997-98 में एशिया के कई देश (थाईलैंड, इंडोनेशिया, कोरिया आदि) आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे। उस समय सिर्फ G7 (7 अमीर देश) फैसले लेते थे, लेकिन संकट एशिया में था।
G7 ने महसूस किया कि अब सिर्फ 7 देश मिलकर दुनिया नहीं चला सकते, बल्कि भारत, चीन, ब्राजील जैसे विकासशील देशों को भी शामिल करना पड़ेगा। इन देशों ने 1999 में G20 बनाया।
शुरू में यह सिर्फ वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों का फोरम था। फिर 2008 में फैसला लिया गया कि सिर्फ वित्त मंत्री नहीं, देशों के राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री भी इसमें शामिल होंगे।
नवंबर 2008 में वॉशिंगटन में पहली लीडर्स समिट हुई। इसके बाद हर साल यह समिट की जाती है।
साउथ अफ्रीका में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार राष्ट्रीय आपदा घोषित
दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं पर बढ़ती हिंसा के खिलाफ शुक्रवार को देश के कई शहरों में बड़ी संख्या में महिलाएं इकट्ठा हुईं। ये प्रदर्शन G20 सम्मेलन से ठीक पहले हुए। लगातार दबाव और विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार ने महिलाओं पर अत्याचार को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया।
जोहान्सबर्ग, प्रिटोरिया, केप टाउन और डरबन समेत 15 जगहों पर महिलाएं काले कपड़े पहनकर सड़क पर उतरीं। काले पहनने का मतलब था कि वे महिलाओं के खिलाफ हिंसा के लिए शोक भी मना रही हैं और इसके खिलाफ विरोध भी कर रही हैं।
इन महिलाओं ने 15 मिनट तक चुपचाप जमीन पर लेटकर विरोध जताया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि दक्षिण अफ्रीका में हर दिन करीब 15 महिलाओं की हत्या हो जाती है।
यह पूरा आंदोलन G20 वीमेन शटडाउन नाम से चलाया गया था, जिसे वूमेन फॉर चेंज नाम की संस्था ने आयोजित किया। उन्होंने महिलाओं और LGBTQ+ समुदाय से कहा कि वे एक दिन न कोई काम करें और न ही कहीं पैसा खर्च करें, ताकि समाज और अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका का महत्व दिख सके।
साउथ अफ्रीका में और भी विरोध प्रदर्शन
महिलाओं के खिलाफ हिंसा को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के अलावा, जलवायु और अमीरी-गरीबी की असमानता पर काम करने वाले एक्टिविस्ट्स ने G20 के खिलाफ एक अलग समिट शुरू की है।
व्हाइट अल्पसंख्यक कम्युनिटी की यूनियन और एंटी-इमिग्रेशन ग्रुप भी बेरोजगारी और भेदभाव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।







