सुनामी की लहर पर लाती हुई बिहार की जनता ने एनडीए को 200 पार सीटों का सेहरा बांधा तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने न केवल जनमत का सम्मान किया बल्कि उचित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की। इस प्रतिनिधित्व में इस बात का ख्याल रखा गया कि जिसकी जितनी भागीदारी उनकी उतनी हिस्सेदारी। देखिए मंत्रिपरिषद बनाने में किस कदर हिस्सेदारी को सही आधार देने की कोशिश की। मंत्रिमंडल इस बात का गवाही भी दे रहा है।
तीन महिलाएं बनीं मंत्री
पहले ही टर्म में तीन महिलाओं को मंत्री देने के पीछे स्पष्ट संदेश है। जिस आधी आबादी के बल पर , पिछले 20 वर्षों से नीतीश सरकार चला रहे हैं उसे भरपूर प्रतिनिधित्व देना जरूरी भी था। यही वजह भी है कि जदयू से लेशी सिंह, भाजपा से रमा निषाद और श्रेयशी सिंह को मंत्री पद दे कर सम्मान प्रकट किया गया। यह संख्या चार होती, अगर अंतिम समय में स्नेहलता अपना इरादा बदल कर अपने पुत्र को मंत्री न बनातीं।
राजपूत जाति से चार मंत्री
एनडीए सरकार में राजपूत जाति से चार मंत्री बनाए गए हैं। उसकी वजह यह है कि एनडीए में जीते 33 विधायक इसी जाति से हैं। यही कारण है कि संजय टाइगर, श्रेयसी सिंह, लेशी सिंह और लोजपा से संजय सिंह को मंत्री बनाया।
दलित समाज से चार मंत्री
वहीं दलित समाज से चार मंत्री बनाए गए तो इसकी वजह दलित के 34 विधायकों का जीत कर आना रहा। इस कारण एनडीए सरकार में जदयू से अशोक चौधरी, भाजपा से लखींद्र पासवान, हम से संतोष सुमन और लोजपा आर से संजय कुमार को मंत्री बनाया गया। वैसे भी दलित की आबादी 18.6 प्रतिशत है। इस लिहाज से भी यह संख्या उनके आबादी के हिसाब से सही है।
बीजेपी में पहली बार मंत्री बने चेहरों के बारे में भी जानिए
भाजपा ही नहीं बिहार की तमाम पार्टियां दो पीढ़ियों के बीच की राजनीति कर रही हैं। बीजेपी में अनुभवी नेताओं का एक ऐसा ग्रुप है जो आगे की सक्रिय राजनीति नहीं कर सकते। बीजेपी में युवातुर्क नेता का एक वर्ग है जिनमें संगठन चलाने के गुर तो हैं पर सत्ता का नहीं। इसलिए अनुभवी मंत्री के साथ युवा मंत्री की फौज बीजेपी तैयार कर रही है। यह उम्र के ट्रांजिशन फेज को पाटने के लिए जरूरी हैं। यही वजह भी है बीजेपी ने श्रेयसी सिंह, संजय टाइगर, प्रमोद चंद्रवंशी, रमा निषाद और लखींद्र पासवान को मंत्री बनाया है।
एनडीए ने बहुत कुछ साधा
एनडीए ने तीन महिला की मंत्री बना कर आधी आबादी को साधा।राजपूत से चार, भूमिहार से दो, कायस्थ और ब्राह्मण से एक एक मंत्री देकर सवर्णों को भी ये जताने की कोशिश की कि जीत में सबका बराबर योगदान है। वहीं रमा निषाद और मदन सहनी को मंत्रिमंडल में शामिल कर VIP के मुकेश सहनी को भी एक मैसेज देने की कोशिश की गई। यानी NDA ने ये जता दिया कि वो VIP की पॉलिटिक्स पंक्चर करने की तैयारी में है।
तारीख- 20 नवंबर, जगह- पटना का गांधी मैदान
रिकार्ड 10वीं बार नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी थी। मंच पर PM मोदी से लेकर 12 राज्यों के मुख्यमंत्री थे। नीतीश कुमार के बाद 5-5 की संख्या में मंत्री शपथ ले रहे थे। इस बीच जींस और शर्ट पहने एक युवक मंच पर चढ़ा और पद व गोपनीयता की शपथ लेने लगा। इस अनजान चेहरे पर कैमरे से लेकर लोगों तक की नजरें ठहर गई।
चूंकि यह युवक ना विधायक है और ना विधान परिषद। इसका नाम दीपक प्रकाश है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे। शपथ के बाद पत्रकारों ने जब सवाल पूछा तो उन्होंने कहा- ‘मुझे मंत्री क्यों बनाया गया ये पापा से पूछिए।’
अब इस तस्वीर से 35 दिन पहले चलिए… तारीख 15 अक्टूबर
बिहार भाजपा के X हैंडल से एक प्रेस नोट जारी हुआ। इसमें लिखा था- ‘उपेंद्र कुशवाहा जी के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से विस्तार से चर्चा हुई है। RLM विधानसभा चुनाव में 6 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा। इसके अलावा विधान परिषद में 1 सीट भाजपा अपने हिस्से से देगी।’
भाजपा के इस पोस्ट को उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी को दूर करने के प्रयास के तौर पर देखा गया। दरअसल, कुशवाहा सीट कम मिलने से नाराज बताए जा रहे थे।
…तो क्या उपेंद्र कुशवाहा ने भाजपा पर दबाव बनाने के लिए बेटे को मंत्री बनाया। भाजपा ने उनकी बात क्यों मानी। कुशवाहा के बेटे के मंत्री बनने की इनसाइट स्टोरी जानिए, स्पेशल रिपोर्ट में…।
बेटे को मंत्री बनाकर कुशवाहा ने चला MLC सीट वाला दांव
कंप्यूटर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट दीपक प्रकाश फिलहाल किसी सदन (विधानसभा/विधान परिषद) के सदस्य नहीं हैं। अब मंत्री बने हैं तो उन्हें 6 महीने के अंदर किसी सदन का सदस्य बनना होगा, वरना मंत्री पद छोड़ना होगा।
सीनियर जर्नलिस्ट कुमार प्रबोध कहते हैं, ‘सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय विधायक बन गए हैं। पहले वह विधान परिषद के सदस्य थे। अब भाजपा कोटे से उनकी सीट खाली होगी। NDA की 243 में से 202 सीटों पर जीत से कुशवाहा को डर होगा कि कहीं भाजपा MLC पद से मुकर ना जाए। इसलिए उन्होंने बेटे को मंत्री बनाकर दांव चल दिया है।’

नीतीश को कुशवाहा के बेटे पर एतराज नहीं
‘उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे को विधानसभा चुनाव लड़ाना चाहते थे। वह तैयारी भी कर रहे थे। लेकिन सीट शेयरिंग में उन्हें सीट नहीं मिली। इस पर कुशवाहा नाराज हो गए। तब भाजपा ने आगे एडजस्ट करने का आश्वासन दिया था।’
सीट बंटवारे से नाराज थे कुशवाहा…
- सीट बंटवारे के ऐलान के बाद 13 और 14 अक्टूबर को उपेंद्र कुशवाहा के नाराज होने की खबरें आईं। उन्होंने बयान भी दिया- NDA में कुछ भी ठीक नहीं है। 14 अक्टूबर की रात भाजपा नेता नित्यानंद राय उनको मनाने घर गए।
- 15 अक्टूबर की सुबह नित्यानंद राय कुशवाहा को पटना से लेकर दिल्ली गए। वहां कुशवाहा और अमित शाह में बात हुई। उसके बाद वह लौट आए और बोले- सब बातें हो गई हैं। हमलोग एकजुट हैं। मतलब कि कुशवाहा भी मान गए।
कुशवाहा की बात भाजपा ने इसलिए मानी…
उपेंद्र कुशवाहा कोइरी समाज से आते हैं। बिहार में कोइरी समाज की आबादी 4.2% है। इनका मगध, शाहाबाद, सीवान, भागलपुर-बांका, पूर्णिया, बेतिया-मोतिहारी एरिया की 40 से 45 सीटों पर प्रभाव है।
- 2025 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM 6 सीटों पर चुनाव लड़ी, जिसमें से 4 सीटें जीती है। उनके NDA में आने से भाजपा-JDU को काफी फायदा हुआ है।
- 2020 में जिस मगध की 47 सीटों में से सिर्फ 18 सीटें NDA जीता था। 2025 में उसका आंकड़ा 40 सीट तक पहुंच गया है। मतलब 2020 से 22 ज्यादा।
- वहीं, 2020 में शाहाबाद में सिर्फ 2 सीट जीतने वाला NDA 2025 में 19 सीट पर पहुंच गया है। मतलब 17 ज्यादा।
- कुशवाहा का असर सीवान और समस्तीपुर जिले की सीटों पर भी दिख रहा है। सीवान में 8 में से 7 सीटें और समस्तीपुर की 10 में से 7 सीटों पर NDA जीता है। जो 2020 से 7 सीटें ज्यादा है।
नीतीश कैबिनेट में सिर्फ कुशवाहा का ही बेटा नहीं, ऐसे 9 हैं
नीतीश कुमार की 26 सदस्यीय मंत्रिमंडल में सिर्फ कुशवाहा के बेटा ही मंत्री नहीं बने हैं। इनके साथ-साथ 9 ऐसे मंत्री हैं, जिनका संबंध राजनीतिक घराने से है। जीतन राम मांझी को ही ले लीजिए। अपने मोदी सरकार में मंत्री हैं। बेटा नीतीश सरकार में मंत्री बना है। बहू और समधन भी विधायक बनीं हैं।







