प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में दिल्ली बम ब्लास्ट को आतंकी घटना करार देते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया. इस जघन्य आतंकी घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे राष्ट्र विरोधी ताकतों द्वारा की गई एक कायराना हरकत करार दिया गया. कैबिनेट ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता दोहराई और इसके दोषियों पर कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया.
जम्मू-कश्मीर के डोडा में पुलिस आत्मसमर्पण, रिहा और मारे गए आतंकवादियों के समर्थकों और सहयोगियों के खिलाफ अभियान चला रही है. यह आतंकवादी समर्थन नेटवर्क को ध्वस्त करने और पुलिसिंग को मजबूत करने के जिलाव्यापी अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. एसएसपी डोडा संदीप मेहता-जेकेपीएस के नेतृत्व में कई स्थानों पर तलाशी ली गई, जहां पुलिस टीमों ने पूर्व में आतंकवादी गतिविधियों और निगरानी में रखे गए व्यक्तियों से जुड़े लोगों के इतिहास की गहन जांच की. केवाईसी मानदंडों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और राष्ट्र-विरोधी तत्वों द्वारा संचार नेटवर्क के दुरुपयोग को रोकने के लिए, इन अभियानों में सिम कार्ड विक्रेताओं का विस्तृत सत्यापन भी शामिल था. कार्रवाई के दौरान कई व्यक्तियों पर उनकी संदिग्ध गतिविधियों और आतंकवादी तत्वों को समर्थन देने में संभावित संलिप्तता के लिए कानून की निवारक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि सक्रिय या पूर्व आतंकवादियों को आश्रय, सहायता या रसद सहायता प्रदान करते पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएग.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अल कायदा गुजरात आतंकी साजिश के मामले में गुरुवार को पांच राज्यों में छापेमारी की। अल कायदा गुजरात आतंकी साजिश में कथित तौर पर अवैध प्रवासी बांग्लादेशियों के शामिल होने का शक है। एनआईए ने पांच राज्यों में 10 जगहों पर छापेमारी की। एनआईए के प्रवक्ता ने बताया कि एनआईए की टीमों ने बुधवार को पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, हरियाणा और गुजरात में विभिन्न संदिग्धों और उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली।
साल 2023 में दर्ज किया गया मामला
अधिकारी ने बताया कि कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए हैं जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। यह मामला 2023 में दर्ज किया गया था, जिसमें चार बांग्लादेशी नागरिकों – मोहम्मद सोजिब मियां, मुन्ना खालिद अंसारी, अजरुल इस्लाम और अब्दुल लतीफ के नाम शामिल हैं। ये आरोपी जाली भारतीय पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके बांग्लादेश से भारत में अवैध रूप से घुसे थे।
अल कायदा से है संदिग्धों का ताल्लुक
एनआईए का कहना है कि, ‘ये लोग प्रतिबंधित अल-कायदा आतंकवादी संगठन से जुड़े पाए गए। ये लोग बांग्लादेश में अल-कायदा के गुर्गों के लिए धन इकट्ठा करने और उसे हस्तांतरित करने में शामिल थे, और मुस्लिम युवाओं को सक्रिय रूप से उकसाने में भी शामिल पाए गए।’ एनआईए ने 10 नवंबर, 2023 को अहमदाबाद की एक विशेष अदालत में आरोप पत्र दायर किया था।
महाराष्ट्र एटीएस ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया
इससे पहले महाराष्ट्र के आतंकरोधी दस्ते (एटीएस) ने पुणे के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को प्रतिबंधित आतंकी संगठनों अल-कायदा और अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया है। इसके बाद एटीएस ने ठाणे के एक शिक्षक से भी पूछताछ की। एटीएस ने 27 अक्तूबर को 37 वर्षीय जुबैर हंगरगेकर को गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा था और कट्टरपंथ फैलाने की गतिविधियों में शामिल था। जांच के दौरान एटीएस को उसके पुराने फोन में पाकिस्तान का एक संपर्क नंबर सेव मिला।
तुर्किए में मीटिंग, दिल्ली दहलाने की साजिश
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद-सहारनपुर मोड्यूल की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है, एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि जैश के फिदायीन मॉड्यूल के आरोपी डॉक्टर मुज़म्मिल और डॉक्टर उमर सेशन नाम के एक एनक्रिप्टेड मैसेंजर ऐप ‘सेशन’ का प्रयोग हैंडलरों से बात करने के लिए करते थे. इस ऐप में किसी भी यूजर को अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत नहीं होती है और चैट का मेटाडेटा भी सेव नहीं होता है.
सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टर मुजम्मिल ने जानकारी दी है कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ने के शुरुआती दिनों में उसकी बात जिस हैंडलर से होती थी उसका छद्म नाम ‘अबू उकसा’ था और वो तुर्की का वर्चुअल नंबर प्रयोग करता था. शुरुआती दिनों में इस हैंडलर ने जो अपना नंबर व्हाट्सएप पर बात करने के लिए दिया था वो +90 का था, लेकिन फिर इस हैंडलर ने दोनों से सेशन ऐप पर बातचीत करने के लिए कहा ताकि उनकी बातचीत कभी लीक ना हो और एजेंसियों को पता ना लगे.
हैंडलर से मिलने की तुर्की ही क्यों चुना गया?
देश की सुरक्षा एजेंसियों को शक ना हो इसलिए डॉक्टर मुज़म्मिल ने पूछताछ में कबूला है कि साल 2022 हैंडलर से मिलने की लोकेशन भी तुर्की चुनी गई थी. जब वो और डॉक्टर उमर तुर्की गए थे, तब जैश के जिन हैंडलरों से मिले थे उनमें अबू उकासा छद्म नाम का ये हैंडलर भी था. सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को भनक ना लगे इसलिए मिलने के लिए तुर्की की लोकेशन चुनी गई थी. जैश का हैंडलर भी तुर्की का ही वर्चुअल नंबर प्रयोग करता था ऐसे में इन दोनों डॉक्टरों के पकड़े जाने पर पाकिस्तान या जैश का कोई लिंक सामने ना आए इसलिए ये पूरा तुर्की वाला प्लान किया गया था.
दो टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ा था ये मॉड्यूल
जांच में ये भी सामने आया है कि डॉक्टरों वाला ये हाइब्रिड आतंकियों का मॉड्यूल दो टेलीग्राम ग्रुप ‘उमर बिन ख़िताब’ और फ़र्ज़ान दारुल उललूम में जुड़ा हुआ था जिस पर खुफिया एजेंसियों को शक है कि ये ग्रुप जैश ए मोहम्मद के थे क्योंकि इन ग्रुपों में जैश ए मोहम्मद और मौलाना मसूद अजहर के पुराने बयान, चिट्ठियां, जिहाद के लिए उकसावे वाली आतंक समर्थक पोस्ट किए जाते थे.
बाबरी का बदला लेना चाहते थे आतंकवादी
दिल्ली के लाल किले के पास विस्फोट की जांच कर रहे जांचकर्ताओं ने एक चौंकाने वाली योजना का खुलासा किया है. कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े डॉक्टरों से जुड़े संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल ने 6 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में छह स्थानों पर विस्फोटों की योजना बनाई थी. यह तारीख महत्वपूर्ण है: यह वह दिन था जब 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था. विस्फोट के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकवादियों ने कहा है कि यह तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि वे “बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेना” चाहते थे.
साथ ही जैश मॉड्यूल ने दिल्ली को सीरियल ब्लास्ट से निशाना बनाने की मल्टी फेज साजिश का भी खुलासा किया है. पूछताछ के दौरान, जैश डॉक्टर मॉड्यूल के सदस्यों ने भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सीरियल ब्लास्ट करने के उद्देश्य से एक आतंकी साजिश को अंजाम देने की एक सुनियोजित, चरणबद्ध योजना का खुलासा किया है. नीचे पढ़िए कैसे दहलाना था…
- चरण 1: जैश-अंसार आतंकी मॉड्यूल का गठन
- चरण 2: हरियाणा के नूह और गुरुग्राम से इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) और गोला-बारूद के लिए कच्चे माल की खरीद
- चरण 3: घातक रासायनिक IED का निर्माण और संभावित लक्षित स्थानों की टोह लेना
- चरण 4: टोह लेने के बाद मॉड्यूल के सदस्यों के बीच इकट्ठे बमों का वितरण
- चरण 5 (अंतिम): दिसंबर में दिल्ली में छह से सात स्थानों पर समन्वित बम विस्फोटों को अंजाम देना
जांचकर्ताओं का कहना है कि मूल योजना अगस्त 2025 में हमले करने की थी, लेकिन अभियान में देरी के कारण साज़िश को एक नई तारीख़—6 दिसंबर—को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के साथ चुना गया. अधिकारियों ने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद वर्षों से अयोध्या का हवाला देते हुए धमकियां देता रहा है और बाबरी विध्वंस का बदला लेने का आह्वान करता रहा है. मसूद अज़हर वर्षों से अपने आतंकी उपदेशों और साप्ताहिक स्तंभों में अयोध्या को निशाना बनाने की कसम खाता रहा है.
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी दृढ़ संकल्प का परिचय एक त्वरित और निर्णायक जवाबी कार्रवाई के माध्यम से दिया है. लाल किले के पास हुए विस्फोट में शामिल जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मॉड्यूल को सफलतापूर्वक ध्वस्त करके, अधिकारियों ने देश को अस्थिर करने की कोशिश करने वालों के विरुद्ध एक स्पष्ट और अटल संदेश दिया है.
यह उपलब्धि भारत की ख़ुफ़िया एजेंसियों, सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन कर्मियों के अथक समर्पण को दर्शाती है, जो नागरिकों के जीवन की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के लिए चौबीसों घंटे काम करते रहते हैं.
जांच में हो सकता है अहम
इधर, डॉ. उमर उन नबी का DNA उसकी मां के DNA से मैच हो गया। जांच टीमों को कार से उमर के दांत, हड्डियां, खून लगे कपड़े के टुकड़े और पैर का हिस्सा मिला था, जो स्टेयरिंग व्हील और एक्सीलेटर के बीच फंसा था।
इससे साफ हो गया है कि ब्लास्ट के वक्त कार में डॉ. उमर ही मौजूद था। 10 नवंबर को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए ब्लास्ट में 13 लोग मारे गए हैं। एक घायल व्यक्ति की मौत गुरुवार सुबह हो गई।















