मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार (19 सितंबर) को बिहार राज्य महिला आयोग के 24वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबंधित किया. उन्होंने कहा कि राज्य ने महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है. महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनकी स्थिति में सुधार के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है.
मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “बिहार ने महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण में एक मिसाल कायम की है. आत्मविश्वास और आत्मसम्मान में बढ़ोतरी इसका जीता-जागता उदाहरण है।”
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महिलाओं की ताकत पर पूरा भरोसा है और वे महिलाओं को एक सशक्त वोटबैंक मानते हैं। उन्होंने पिछले कई सालों में अनेक योजनाएँ शुरू की हैं, जैसे 35% सरकारी नौकरी में आरक्षण, महिला सशक्तिकरण के लिए जीविका समूह, लड़कियों के लिए साइकिल योजना, छात्रवृत्ति, थानों व पंचायतों में आरक्षण, और हाल ही में महिला रोजगार योजना।
महिला वोटबैंक पर विश्वास
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नीतीश कुमार की रणनीति में महिलाओं की अहम भूमिका है — उन्हें ‘एक जाति’ की तरह संगठित मानकर योजनाएँ दी जाती हैं, जिससे सभी जाति की महिलाएँ उनका समर्थन करती हैं।
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सर्वे और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहता है, और बहुसंख्यक महिलाएँ नीतीश कुमार को सपोर्ट करती रही हैं।
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जदयू ने भी चुनावी अभियान में सक्रिय रूप से महिला मोर्चे को राज्यों भर में महिला-हित योजनाओं का प्रचार करने के लिए उतारा है।
महिला सशक्तिकरण के लिए योजनाएँ और कदम
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35% आरक्षण सरकारी नौकरियों और शिक्षा में।
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जीविका (महिला स्वयं सहायता समूह नेटवर्क) के माध्यम से आर्थिक मज़बूती।
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साइकिल योजना, वर्दी एवं छात्रवृत्ति, शराबबंदी और हालिया महिला रोजगार योजना जैसी योजनाएँ सीएम नीतीश कुमार ने शुरू की हैं।
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महिला सुरक्षा के लिए महिला सिर्फ़ बस सेवा, महिला आयोग का डिजिटल पोर्टल, पुलिस भर्ती में आरक्षण।
हाल के बयान और चुनावी रणनीति
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हाल ही में नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में महिलाओं की आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान और हौसला बढ़ा है… और महिलाएँ बिहार की सामाजिक-आर्थिक तरक्की का उदाहरण बन चुकी हैं।
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महिलाओं में उनका प्रभाव इतना है कि कई बार इन्हें “नीतीश कुमार का लॉयल वोटर” कहा जाता है, और 2025 चुनाव को देखते हुए उन्होंने महिला संवाद, योजनाएँ और अभियान और तेज़ कर दिए हैं।
इस तरह, नीतीश कुमार को महिलाओं की ताकत और समर्थन पर गहरा भरोसा है — और बिहार में महिला वोट उनकी बड़ी राजनीतिक शक्ति बन गई है।
बिहार में महिलाओं के लिए कौन-कौन से योजना लागू हैं
बिहार में महिलाओं के लिए कई प्रमुख सरकारी योजनाएँ चल रही हैं, जिनका मकसद शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण, रोज़गार, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में उन्हें मजबूत बनाना है।
प्रमुख सरकारी योजनाएँ
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मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना:
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2025 में शुरू, इसमें हर परिवार की एक महिला को शुरुआती 10,000 रुपये आर्थिक सहायता स्वरूप दिए जाते हैं ताकि वे खुद का व्यवसाय या स्वरोजगार शुरू कर सकें।
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व्यवसाय की प्रगति के बाद 2 लाख रुपये तक और सहायता मिल सकती है।
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आवेदन के लिए जीविका समूह से जुड़ना अनिवार्य है।
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जीविका (Self Help Group/SHG) योजना:
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ग्रामीण महिलाओं के लिए सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मंच, बैंक लिंकेज और छोटे व्यवसाय की सुविधा।
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मुख्यमंत्री बालिका साइकिल और पोशाक योजना:
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लड़कियों की शिक्षा बढ़ाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन, साइकिल और यूनिफॉर्म की सुविधा मिलती है।
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मुख्यमंत्री बालिका स्नातक प्रोत्साहन योजना:
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स्नातक डिग्री पूरी करने वाली लड़कियों को दस-बीस हजार रुपये तक प्रोत्साहन।
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वर्किंग वीमेन हॉस्टल/पालनघर योजना:
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कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और छोटे बच्चों के लिए पालनघर की सुविधा।
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35% आरक्षण सरकारी नौकरियों में:
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महिलाओं को पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत समेत अधिकांश बड़े क्षेत्रों की सरकारी नौकरी में आरक्षण।
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महिला विधवा/वृद्धा पेंशन योजना:
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विधवा, परित्यक्ता व वरिष्ठ महिलाओं हेतु पेंशन की सुविधा।
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महिला उद्यमिता योजनाएँ:
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‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना’ में महिला उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक आर्थिक सहायता व्यवसाय शुरू करने के लिए मिलती है।
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नारी शक्ति योजना & WCDC द्वारा केंद्रित कार्यक्रम:
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अल्पकालिक आश्रय गृह, काउंसलिंग सेंटर, बाल विवाह व दहेज निषेध जागरूकता, मेंस्ट्रुअल हाइजीन जैसे अभियान।
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अन्य लाभकारी योजनाएँ
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साइबर सुरक्षा, हेल्पलाइन, वन-स्टॉप सेंटर, महिला बस सेवा समेत कई और योजनाएं राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के सहयोग से लागू हैं।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
मुख्य लाभ और विशेषताएँ
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आर्थिक सहायता: योजना के अंतर्गत प्रत्येक परिवार की एक महिला को स्वरोजगार/छोटा व्यवसाय शुरू करने हेतु ₹10,000 की प्रथम किस्त मिलती है, जो सीधा बैंक खाते में DBT के माध्यम से दी जाती है।
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विस्तार योग्य सहायता: कारोबार के सफल संचालन और मूल्यांकन के बाद, ₹2,00,000 तक की अतिरिक्त सहायता भी दी जा सकती है।
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समूह आधारित लाभ: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाएँ, जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर इस योजना का लाभ ले सकती हैं।
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व्यापार की स्वतंत्रता: महिलाएँ अपनी पसंद के अनुसार किसी भी छोटे व्यवसाय, ट्रेड या सेवा के लिए सहायता राशि ले सकती हैं — जैसे दुकान, सिलाई, डेयरी, कृषि आधारित उद्यम आदि।
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डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर: लाभ सीधे महिला के आधार लिंक्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
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स्थानीय आर्थिक सशक्तिकरण: यह योजना ना केवल महिलाओं की आजीविका बढ़ाती है, बल्कि ग्रामीण/स्थानीय बाज़ारों (हाट बाजार) को भी प्रोत्साहित करती है।
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माइग्रेशन रोकने में योगदान: इससे महिलाओं और उनके परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोज़गार मिलता है, जिससे बाहर जाने (माइग्रेशन) की जरूरत घटती है।
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बड़े लक्ष्य: 2025 में लक्ष्य है कि कम से कम 50 लाख महिलाओं को पहली किस्त से लाभान्वित किया जाए।
यह योजना बिहार की महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने का एक प्रभावशाली प्रयास है, जिससे उनके सामाजिक दर्जे और परिवार की आर्थिक स्थिति दोनों में सुधार संभव होता है। इन योजनाओं का व्यापक लाभ बिहार की लाखों महिलाओं को मिल रहा है, जिससे उनकी शिक्षा, आजीविका और आत्मनिर्भरता में बड़ा बदलाव आ रहा है।







