चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी है और पिछले दो दशक से ग्लोबल ग्रोथ का इंजन बना हुआ है। लेकिन हाल के वर्षों में चीन की इकॉनमी कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद इकॉनमी पटरी पर नहीं आ रही है। अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दी है। इसकी वजह यह है कि चीन के लिए अमेरिका सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। अमेरिका ने चीन पर फिलहाल 30 फीसदी टैरिफ लगा रखा है। अगस्त में चीन से अमेरिका को एक्सपोर्ट में 33 फीसदी गिरावट आई।
इस बीच चीन में फिक्स्ड इनवेस्टमेंट साल के पहले 8 महीनों में मात्र 0.5% बढ़ा जो इतिहास में सबसे कम ( महामारी के दौर को छोड़कर) है। इसी तरह प्रॉपर्टी इनवेस्टमेंट में भी 12.9% गिरावट आई है जो 25 साल में सबसे ज्यादा है। चीन का रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से संकट से जूझ रहा है। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद यह संकट गहराता जा रहा है। चीन की इकॉनमी में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है और इस कारण पूरी इकॉनमी के डूबने का खतरा है।
इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन
इसके साथ ही अगस्त में चीन में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में 5.2 फीसदी तेजी आई जो अगस्त 2024 के बाद सबसे कम है। इसी तरह रिटेल सेल में अगस्त में लगातार तीसरे महीने गिरावट आई है। अगस्त में यह 3.4 फीसदी रही जो इस साल सबसे कम है। इसी तरह क्रेडिट ग्रोथ में भी 2025 में पहली बार गिरावट देखी गई। इससे साफ है कि दुनिया की दूसरी सबसे तेज इकॉनमी में गिरावट आ रही है।
2025 में चीन की आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं।
आंतरिक और बाह्य मांग
उपभोक्ता मांग में कमजोरी और घरेलू खर्च में सुस्ती अब भी बड़ी चिंता है, जिससे वृद्धि पर दबाव बना हुआ है। सरकारी नीतियों और प्रोत्साहन पैकेज से मांग में थोड़ी राहत मिली है, लेकिन यह प्री-कोविड स्तर से कम है।
रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती
चीन के रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी आई है; मकानों की कीमतें घटी हैं और कई डेवलपर वित्तीय संकट में हैं। यह स्थिति घरेलू निवेश और उपभोग दोनों को प्रभावित करती है।
निर्यात और वैश्विक व्यापार
अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति की अनिश्चितता और पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका के साथ व्यापार टकराव निर्यात पर असर डाल रहे हैं।व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन अमेरिका और यूरोप से कमज़ोर मांग चुनौतियां बढ़ा रही है।
सरकारी नीतियां और प्रोत्साहन
निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च और उपभोक्ता सब्सिडी के जरिए सरकार अर्थव्यवस्था को सहारा देने की कोशिश कर रही है। अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए मौद्रिक नीति और राजकोषीय विस्तार का रास्ता अपनाया गया है।
दीर्घकालिक चुनौतियां
जनसंख्या में बुजुर्गों की संख्या बढ़ना, उत्पादकता में गिरावट और स्थानीय सरकारों पर बढ़ता कर्ज आर्थिक संभाल के लिए दीर्घकालिक चुनौती बने हुए हैं। तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाना, डिजिटल क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक नीतियां भी आर्थिक रणनीति के केंद्र में हैं।
प्रमुख चुनौतियां
कमज़ोर घरेलू मांग और प्रॉपर्टी सेक्टर में गिरावट चिंता का कारण बनी हुई है।
सरकारी नीतियों और प्रोत्साहन पैकेजों के बावजूद, खपत अभी भी कोविड से पहले के स्तर से कम है।
वैश्विक व्यापार नीति की अनिश्चितता, अमेरिका के साथ ट्रेड टकराव और दुनिया भर में मंदी जैसे कारक चीन की आर्थिक स्थिरता पर दबाव डाल रहे हैं।
अगस्त 2025 में उद्योग और खुदरा बिक्री कमजोर रही है, और लगातार पांचवें महीने व्यापारिक गतिविधियों में गिरावट देखी गई।
निकट भविष्य की उम्मीदें
ग्रोथ 2024 के 5% से घटकर 2025 में 4.5% और 2026 में 4% के आसपास रहने की उम्मीद है।
सरकार ने बुनियादी ढांचे पर खर्च और उपभोक्ता सब्सिडी जैसे उपायों की घोषणा की है ताकि आर्थिक गति को बनाए रखा जा सके।
चीन की दीर्घकालिक चुनौतियों में बुजुर्ग आबादी, उच्च कर्ज, और उत्पादकता में गिरावट भी शामिल है।
कुल मिलाकर, चीन की इकॉनमी अभी भी ग्रोथ ज़ोन में है, परंतु वास्तविक चुनौतियां उसके आगे की रफ्तार और स्थिरता पर सवाल खड़े कर रही हैं। अंत में, चीन की आर्थिक वृद्धि अब औसत 4-5% के आसपास है, पर इसमें जोखिम और चुनौतियां स्थायी बनी हुई हैं।







