केवटी विधानसभा सीट बिहार के दरभंगा जिले में स्थित है और यह मधुबनी संसदीय सीट का हिस्सा है। 1977 में इस सीट पर जनता पार्टी के दुर्गा दास ने पहली जीत दर्ज की थी। 1980 और 1985 में कांग्रेस का दबदबा रहा। 1990 से 2000 तक राजद नेता गुलाम सरवर ने इस सीट पर लगातार जीत हासिल की। 2005 और 2010 में भाजपा के अशोक कुमार यादव ने जीत हासिल की। 2015 में राजद के फराज फातमी ने इस सीट पर जीत दर्ज की।
2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. मुरारी मोहन झा ने राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी को करीब 5,126 वोटों से हराकर सीट पर कब्जा जमाया। कुल वोटों में मुरारी मोहन झा को 76,372 वोट मिले, जबकि अब्दुल बारी सिद्दीकी को 71,246 वोट मिले। केवटी सीट पर भाजपा और राजद के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलती रही है, और इस सीट का राजनीतिक परिदृश्य अब भी मुख्य रूप से भाजपा और राजद के बीच केंद्रित है।
2025 बिहार विधानसभा चुनाव में भी यह सीट भाजपा और राजद के बीच प्रमुख मुकाबले के रूप में देखी जा रही है। भाजपा के मुरारी मोहन झा वर्तमान विधायक हैं, जबकि राजद की ओर से अब्दुल बारी सिद्दीकी उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं। इस सीट की राजनीतिक लड़ाई काफी प्रतिस्पर्धात्मक रहने की संभावना है।
संक्षेप में, केवटी विधानसभा सीट पर 2025 के चुनाव में भाजपा और राजद के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है, जहां पिछली बार भाजपा ने जीत दर्ज की थी लेकिन राजद भी मजबूत वापसी के इरादे से मैदान में है.
पिछले चुनावी परिणाम
यहाँ पिछले कुछ विधानसभा चुनावों (2005, 2010, 2015, 2020) के नतीजों की झलक है:
| वर्ष | विजेता उम्मीदवार | पार्टी | प्रमुख प्रतिद्वंद्वी / मत अंतर / विशेष बातें |
|---|---|---|---|
| 2020 | मुरारी मोहन झा (Murari Mohan Jha) | BJP | उन्होंने RJD के अब्दुल बारी सिद्दीकी को लगभग 5,126 वोटों से हराया। |
| 2015 | फराज फातमी | RJD | फराज फातमी ने बीजेपी के अशोक कुमार यादव को लगभग 7,830 वोटों से पराजित किया। |
| 2010 | अशोक कुमार यादव | BJP | बहुत नज़दीकी मुकाबला हुआ — अशोक कुमार यादव ने फराज फातमी को सिर्फ 29 वोटों के अंतर से हराया था। |
| 2005 | अशोक कुमार यादव | BJP | उन्होंने महबूब अहमद खान (RJD) को करीब 6,652 वोटों से हराया था। |
राजनीतिक ट्रेंड्स और चुनौतियाँ
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सीट पर मतदाताओं में पार्टी प्रवृत्तियाँ बदलती रही हैं: कभी BJP मजबूत रही है, तो कभी RJD ने कमeback किया है।
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2010 का चुनाव विशेष रूप से नज़दीकी था (केवल 29 वोटों का अंतर), जो दिखाता है कि चुनाव की स्थिति पतली हो सकती है यदि उम्मीदवार/पार्टी अच्छी रणनीति बनाए।
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2020 में BJP को थोड़ी बढ़त मिली थी, लेकिन अंतर ज़्यादा बड़ा नहीं था।
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स्थानीय मुद्दे जैसे सड़क, बुनियादी सुविधाएँ, विकास कार्य, विधायक की उपलब्धियाँ आदि मतदाताओं की प्राथमिकताएँ होंगे। संगठनात्मक शक्ति, जातीय-धार्मिक समीकरण और गठबंधनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
2025 के चुनाव की संभावित दिशा
इन तथ्यों को देखते हुए, केवटी सीट पर 2025 में निम्नलिखित अनुमान संभव हैं:
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प्रमुख मुकाबला: भाजपा (BJP) और महागठबंधन / RJD के बीच होगा।
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यदि मौजूदा भाजपा विधायक या पार्टी उम्मीदवार अच्छा काम कर चुके हों और स्थानीय हितों को प्राथमिकता दी हो, तो BJP को फायदा हो सकता है।
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दूसरी ओर, यदि RJD / गठबंधन मजबूत प्रचार करें, जातीय/धार्मिक समीकरणों का फायदा उठाएँ, और यदि बीजेपी में कोई असंतोष हो, तो RJD के लिए वापसी संभव है।
अनुमान
यदि मुझे भविष्यवाणी करनी हो, तो:
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थोड़ा प्रबल उम्मीदवार: BJP — इस सीट पर हालिया चुनावों में बीजेपी ने बढ़त बनाई है और 2020 में जीत भी दर्ज की है।
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चुनौती की संभावना: RJD — यदि उनका उम्मीदवार मजबूत हो, और वोट विभाजन ना हो, तो RJD-गठबंधन के लिए वापसी संभव है।
निष्कर्ष: 2025 के संभावित विजेता
केवटी सीट पर 2025 में फाइनल संघर्ष भाजपा और आरजेडी के बीच होगा। पिछले दो चुनाव में भाजपा आगे रही है, लेकिन आरजेडी का जनाधार भी गहरा है। वर्तमान तस्वीर के अनुसार, वोटों के समीकरण, जातीय और स्थानीय मुद्दों के आधार पर भाजपा के फिर से जीतने की संभावना अधिक दिख रही है, लेकिन बहुत तगड़ा मुकाबला रहने वाला है।






