जाले विधानसभा सीट बिहार के दरभंगा जिले में स्थित है और यह मधुबनी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। इस विधानसभा क्षेत्र में अब तक 18 बार चुनाव हो चुके हैं, जिसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों ने जीत दर्ज की है। इस सीट पर कांग्रेस, भाजपा, राजद, जनता पार्टी, भाकपा और जदयू सहित कई दलों ने सफलता पाई है। पिछली दो बार (2015 और 2020) भाजपा के जीवेश कुमार मिश्रा ने इस सीट पर जीत हासिल की है। 2020 के चुनाव में जीवेश कुमार मिश्रा ने कांग्रेस के मशकूर अहमद उस्मानी को भारी मतों के अंतर से हराया था।
जाले विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसमें भूमिहार, मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण, रवीदास और पासवान प्रमुख जातियां हैं। स्थानीय मुद्दों में बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवा की कमी और सड़कों की खराब स्थिति खास तौर पर चुनावी बहस का विषय रहे हैं।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जाले सीट पर भी भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होगा। जीवेश कुमार मिश्रा भाजपा के मुख्य प्रत्याशी रहेंगे जबकि कांग्रेस से मशकूर अहमद उस्मानी उनकी चुनौती पेश करेंगे। इस सीट की राजनीति में पारिवारिक और जातीय समीकरण के साथ विकास के मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं।
संक्षेप में, जाले विधानसभा सीट पर 2025 का चुनाव भाजपा के जीवेश कुमार और कांग्रेस के मशकूर अहमद उस्मानी के बीच प्रमुख मुकाबले के रूप में रह सकता है, जहां पिछली जीत के आधार पर भाजपा मजबूत स्थिति में है लेकिन कांग्रेस भी सशक्त वापसी करना चाहेगी.
जाले सीट का चुनावी इतिहास
1977: जनता पार्टी जीत—ताज नारायण यादव
1980, 1985: कांग्रेस का दबदबा—रामा कांत झा, परमानंद ठाकुर
1990: कांग्रेस—मोहन चौधरी
1995: जनतादल—राम लखन यादव
2000: जेडीयू—रमणंद सिंह
2005: आरजेडी—हरे कृष्ण यादव
2010: भाजपा—विजय कुमार मिश्रा
2015: भाजपा—जीवेश कुमार मिश्र
2020: भाजपा—जीवेश कुमार मिश्र
2020 में कुल 87,376 वोट के साथ भाजपा ने बढ़त कायम रखी थी, कांग्रेस को 65,580 वोट मिले थे।
हालिया मतदान आंकड़े एवं समीकरण जाले सीट पर लगभग तीन लाख मतदाता हैं।
2020 का मतदान प्रतिशत करीब 51.66% रहा।
पिछले दो चुनावों में लगातार भाजपा की जीत, लेकिन कांग्रेस की चुनौती बरकरार है।
वर्तमान स्थिति और 2025 की संभावनाएँ
निम्नलिखित कारक 2025 के चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं:
इंकम्बेंसी (Incumbency) लाभ – जाले सीट पर BJP के जीवेश कुमार वर्तमान विधायक हैं और पिछली दो या तीन बार इस सीट से जीत भी दर्ज कर चुके हैं। यह कार्य-प्रणाली, प्रत्याशी की लोकप्रियता और पार्टी का संगठन इस सीट पर मजबूत माना जाता है।
वोट प्रतिशत और अंतर
2020 में BJP ने अच्छा वोट शेयर लिया (~51.66%) और जीत का अंतर (~21,796 वोट) पर्याप्त बड़ा था। यह मानने के लिए संकेत है कि यदि नकारात्मक कारक न हों, तो BJP को फिर से जीतने की अच्छी संभावना है।
विपक्ष की स्थिति
कांग्रेस / महागठबंधन को इस सीट पर चुनौती दिखती है। मकसूर अहमद उस्मानी ने 2020 में दूसरे स्थान पर रहे; यदि महागठबंधन अपने वोट बैंक (मुस्लिम, अन्य अल्पसंख्यक, OBC) को मजबूत कर पाए, तो मुकाबला कड़ा होगा।
मतदाता-turnout और स्थानीय मुद्दे
मतदान प्रतिशत, स्थानीय विकास का काम, बुनियादी सुविधाएँ, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाएँ, युवाओं की बेरोजगारी आदि मुद्दे मतदाताओं को प्रेरित कर सकते हैं। इनमें विरोधी दलों को माहौल बदलने का मौका मिल सकता है।
निष्कर्ष / अनुमान: किसकी होगी जीत?
मेरे विश्लेषण के आधार पर:
प्रबल संभावना है कि BJP / जीवेश कुमार की जीत होगी — उनके पास वर्तमान विधायक होने का लाभ है, पिछले चुनावों में मजबूत मत अंतर और पार्टी संगठन की स्थिति अच्छी है।
लेकिन यह सुनिश्चित नहीं कि जीत का अंतर पिछली बार जैसा बड़ा होगा; विपक्ष यदि अच्छा प्रत्याशी चुन ले, गठबंधन मजबूत हो और स्थानीय मुद्दे जोर पकड़ें, तो मुकाबला कठिन हो सकता है।
निष्कर्ष: 2025 के संभावित विजेता
जाले सीट पर 2025 में जीत की दौड़ में भाजपा के जीवेश कुमार मिश्र सबसे प्रबल दावेदार हैं। सीट पर उनकी पकड़ मजबूत है, और पिछला प्रदर्शन भी बेहतर रहा है। कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन का आधार भी गहरा है, जिससे कड़ा मुकाबला संभव है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल और ट्रैक रिकॉर्ड के मुताबिक भाजपा के जीतने की संभावना ज्यादा दिखती है।






