अमेरिका और भारत के बीच बीते कई वर्षों से कूटनीतिक रिश्ते जबरदस्त स्तर पर रहे। दोनों ही देशों ने 2002 के बाद से न सिर्फ व्यापार में बढ़ोतरी दर्ज की, बल्कि रक्षा समझौतों से लेकर आर्थिक समझौतों पर भी मुहर लगाई। हालांकि, यह पूरी स्थिति इस साल जुलाई के बाद कुछ हद तक बदली नजर आई है। पहले ट्रंप की तरफ से भारतीय उत्पादों के खिलाफ 25 फीसदी टैरिफ और फिर रूस से तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त जुर्माना लगाए जाने के बाद रिश्ते निचले स्तर पर हैं। इस बीच खुद राष्ट्रपति ट्रंप, उनके व्यापार सलाहकार पीटर नवारो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक की तरफ से दिए बयानों ने संबंधों को और बिगाड़ने का काम किया है।
इस बीच यह जानना अहम है कि आखिर बीते दिनों में ऐसा क्या हुआ कि भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया? खुद ट्रंप इस तल्खी के लिए कैसे और किस हद तक जिम्मेदार रहे? उनके मंत्री और सलाहकारों के बीते दिनों में ऐसा क्या किया कि स्थितियां बेहतर होने की जगह और बिगड़ गईं? भारत की इस पर क्या प्रतिक्रिया रही है और क्यों ट्रंप ने एक बार फिर मोदी से दोस्ती की बात दोहराई है?
3. फिर मृत अर्थव्यवस्था वाले बयान पर
ट्रंप ने पिछले महीने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसमें से 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने के लिए लगाया गया। 27 अगस्त से यह आयात शुल्क प्रभावी भी हो गया। हालांकि, जब ट्रंप के एलान के बाद भी अमेरिका के टैरिफ लगाने के निर्णय पर भारत ने समझौते की कोशिश नहीं की तो यह बात ट्रंप के अहं पर चोट कर गई। इसके बाद ही उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्ता को ‘मृत’ करार दे दिया था। जर्मन अखबार और जापानी मीडिया ग्रुप निक्केई एशिया ने भी कहा था कि मोदी को ट्रंप की इस तरह की टिप्पणियां पसंद नहीं आईं।
ट्रंप ने पिछले महीने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसमें से 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने के लिए लगाया गया। 27 अगस्त से यह आयात शुल्क प्रभावी भी हो गया। हालांकि, जब ट्रंप के एलान के बाद भी अमेरिका के टैरिफ लगाने के निर्णय पर भारत ने समझौते की कोशिश नहीं की तो यह बात ट्रंप के अहं पर चोट कर गई। इसके बाद ही उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्ता को ‘मृत’ करार दे दिया था। जर्मन अखबार और जापानी मीडिया ग्रुप निक्केई एशिया ने भी कहा था कि मोदी को ट्रंप की इस तरह की टिप्पणियां पसंद नहीं आईं।
अमेरिका और भारत के बीच बीते कई वर्षों से कूटनीतिक रिश्ते जबरदस्त स्तर पर रहे। दोनों ही देशों ने 2002 के बाद से न सिर्फ व्यापार में बढ़ोतरी दर्ज की, बल्कि रक्षा समझौतों से लेकर आर्थिक समझौतों पर भी मुहर लगाई। हालांकि, यह पूरी स्थिति इस साल जुलाई के बाद कुछ हद तक बदली नजर आई है। पहले ट्रंप की तरफ से भारतीय उत्पादों के खिलाफ 25 फीसदी टैरिफ और फिर रूस से तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त जुर्माना लगाए जाने के बाद रिश्ते निचले स्तर पर हैं। इस बीच खुद राष्ट्रपति ट्रंप, उनके व्यापार सलाहकार पीटर नवारो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक की तरफ से दिए बयानों ने संबंधों को और बिगाड़ने का काम किया है।
इस बीच यह जानना अहम है कि आखिर बीते दिनों में ऐसा क्या हुआ कि भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया? खुद ट्रंप इस तल्खी के लिए कैसे और किस हद तक जिम्मेदार रहे? उनके मंत्री और सलाहकारों के बीते दिनों में ऐसा क्या किया कि स्थितियां बेहतर होने की जगह और बिगड़ गईं? भारत की इस पर क्या प्रतिक्रिया रही है और क्यों ट्रंप ने एक बार फिर मोदी से दोस्ती की बात दोहराई है?
3. फिर मृत अर्थव्यवस्था वाले बयान पर
ट्रंप ने पिछले महीने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसमें से 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने के लिए लगाया गया। 27 अगस्त से यह आयात शुल्क प्रभावी भी हो गया। हालांकि, जब ट्रंप के एलान के बाद भी अमेरिका के टैरिफ लगाने के निर्णय पर भारत ने समझौते की कोशिश नहीं की तो यह बात ट्रंप के अहं पर चोट कर गई। इसके बाद ही उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्ता को ‘मृत’ करार दे दिया था। जर्मन अखबार और जापानी मीडिया ग्रुप निक्केई एशिया ने भी कहा था कि मोदी को ट्रंप की इस तरह की टिप्पणियां पसंद नहीं आईं।
ट्रंप ने पिछले महीने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसमें से 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने के लिए लगाया गया। 27 अगस्त से यह आयात शुल्क प्रभावी भी हो गया। हालांकि, जब ट्रंप के एलान के बाद भी अमेरिका के टैरिफ लगाने के निर्णय पर भारत ने समझौते की कोशिश नहीं की तो यह बात ट्रंप के अहं पर चोट कर गई। इसके बाद ही उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्ता को ‘मृत’ करार दे दिया था। जर्मन अखबार और जापानी मीडिया ग्रुप निक्केई एशिया ने भी कहा था कि मोदी को ट्रंप की इस तरह की टिप्पणियां पसंद नहीं आईं।







