भारत में इस समय कई राज्यों में बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, खास तौर पर पूर्वी भारत जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, और असम में वर्षा के बाद बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। पंजाब में बाढ़ की चपेट में आए लोगों को अभी राहत मिलती नजर नहीं आ रही। इसका कारण राज्य के तीनों बांधों का जलस्तर खतरे के निशान के पास या उससे ऊपर पहुंच जाना है।
2025 में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली, और कुछ हद तक बिहार और उत्तर प्रदेश में देखा गया है।
सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य
● पंजाब: यहां 1900 से ज्यादा गांव पूरी तरह डूब चुके हैं, लगभग 3.8 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, 1.5 लाख हेक्टेयर फसलें बर्बाद हुईं हैं और जनजीवन बहुत मुश्किल में है।
● हिमाचल प्रदेश: कुल्लू, मंडी, किन्नौर, शिमला इलाकों में भारी वर्षा से भूस्खलन और बाढ़ ने सबसे ज्यादा नुकसान किया है, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों करोड़ की संपत्ति की हानि हुई है।
● जम्मू-कश्मीर: झेलम और चिनाब में उफान, सड़कों-पुलों के टूटने और हज़ारों घरों व धान की फसलें नष्ट होने से भारी तबाही हुई है।
● उत्तराखंड: कई जिलों में भूस्खलन और बाढ़ से जनहानि और संपत्ति का नुकसान हुआ।
● हरियाणा: सिरसा, फतेहाबाद, कैथल, कुरुक्षेत्र में बाढ़ और नदियां उफान पर हैं।
● दिल्ली: यमुना नदी खतरे के निशान पर है, कई रिहायशी इलाकों में जलभराव है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
● बिहार, उत्तर प्रदेश: पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर है।
बाढ़ प्रभाव का विस्तार
● हजारों गांवों व शहरों में सड़कों, पुलों, फ़सलों और घरों को गंभीर नुकसान पहुंता है।
● सेना, एनडीआरएफ, राज्य सरकारें राहत-बचाव कार्यों में सक्रिय हैं।
● 2025 की बाढ़ पिछले कई दशकों में सबसे बड़ी आपदा मानी जा रही है, खासकर उत्तर भारत में।
दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर कम हो रहा है, लेकिन खतरे के निशान से ऊपर है। जिससे राजधानी में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। शनिवार को यमुना नदी का जलस्तर 206.47 मीटर पर आ गया। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर मयूर विहार, यमुना बाजार, कश्मीरी गेट, और निगमबोध घाट जैसे क्षेत्रों में दिख रहा है।
पंजाब में बाढ़ किसानों पर कहर बरपा रही है। शुक्रवार को मैदानी व पहाड़ी इलाकों में बारिश से राहत दिखी लेकिन बांधों से छोड़े जा रहा पानी पंजाब के जिलों में तबाही मचा रहा है। अभी तक बाढ़ की वजह से 1.72 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है। बड़ा संकट पानी उतरने के बाद सामने आएगा क्योंकि खेतों में बहुत ज्यादा गाद जम चुकी है। इसे निकालना बड़ी चुनौती से कम नहीं है।



गुरदासपुर के गांव चौंतरा के एक युवक की शादी थी, लेकिन बारात से ठीक एक दिन पहले गांव में रावी दरिया का पानी भरना शुरू हो गया। गांव के आसपास पांच फीट तक पानी जमा हो गया। ऐसे में परिवार को चिंता हो गई कि बेटे की शादी कैसे होगी और बारात कैसे पहुंचेगी। गांव आलेचक्क के रिटायर सूबेदार गुरप्रीत सिंह के सहयोग से राहत कार्य चला रहे सेना की 270 इंजीनियर रेजीमेंट के जवानों को मामले की सूचना मिली तो वे तुरंत नाव से गांव चौंतरा पहुंचे और दूल्हे व उसके 11 रिश्तेदारों को गांव से निकालकर पैलेस पहुंचाया।
हरियाणा में तटबंध टूटने से गांव जलमग्न, बहादुरगढ़ में सेना बुलाई
अब तक 43 की मौत
राज्य में आई बाढ़ के कारण अब तक 43 लोगों की मौत हो चुकी है। 16,85 गांव बाढ़ की चपेट में हैं और 3.84 लाख लोग प्रभावित हैं। यही नहीं 1.71 लाख हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है। सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं। इस बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाढ़ प्रभावित सभी गांवों में एक अधिकारी तैनात करने का फैसला किया है। इस अधिकारी के पास बाढ़ संबंधी हर शिकायत को दर्ज करवाया जा सकेगा।
घग्गर भी मचाने लगी कोहराम
पटियाला, संगरूर और मानसा इलाके से गुजरने वाले घग्गर नदी ने भी लोगों को आफत में डाल दिया है। पटियाला का घनौर इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया है। यहां बाढ़ में फंसे 16 लोगों को गुरुवार को बचाया गया।
..कुल्लू में दूसरे दिन भी भूस्खलन; एक व्यक्ति की मौत, छह लापता
हिमाचल में गुरुवार को वर्षा के कारण कई जगह भूस्खलन हुआ। कुल्लू के अखाड़ा बाजार में दूसरे दिन भी भूस्खलन जारी रहा। दो घर इसकी चपेट में आ गए। इससे मलबे में दबने से एक व्यक्ति की मौत हो गई।
तीन लोगों को मलबे से निकाल कर क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू ले जाया गया। छह लोग लापता हैं। इनमें पांच लोग जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। मणिमहेश यात्रा के दौरान भरमौर में फंसे 15 हजार श्रद्धालु अब तक सुरक्षित निकाले गए हैं। गुरुवार सुबह हेलीकाप्टर से 29 श्रद्धालुओं को एयरलिफ्ट किया गया। आज दिल्ली, यूपी, हरियाणा, बिहार, झारखंड समेत अन्य कई राज्यों में मूसलाधार बारिश के आसार हैं।
..जम्मू-कश्मीर में वर्षा थमी लेकिन नहीं टला खतरा
जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को वर्षा थम गई और नदी-नालों का जलस्तर कम हो गया, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिला में गुरुवार सुबह रतले जल विद्युत परियोजना स्थल में भूस्खलन हुआ। मलबे में दबकर पांच लोग घायल हो गए। उधर, कश्मीर में उफनाई झेलम नदी का पानी बड़गाम के जूनीपोरा में तटबंध में दरार आने से आसपास कई बस्तियों में दाखिल हो गया।
….दिल्ली में खतरे के निशान से ऊपर यमुना, बाढ़ का खतरा
दिल्ली में यमुना नदी खतरे के निशान से दो मीटर से अधिक ऊपर बह रही है। गुरुवार सुबह यमुना का जलस्तर 207.48 मीटर तक पहुंच गया जबकि खतरे का स्तर 205.33 मीटर है। इससे जुलाई, 2023 की तरह बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। उस समय यमुना का पानी 208.66 मीटर तक पहुंच गया था, जिससे लगभग एक सप्ताह तक जनजीवन अस्तव्यस्त रहा था।
9 सितंबर, 1978 को भी पानी 207.49 मीटर तक पहुंचा था, जिससे दिल्ली के कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इस बार छह जिले बाढ़ की चपेट में हैं। रिंग रोड, सिविल लाइंस सहित कई अन्य क्षेत्रों में यमुना का पानी आवासीय क्षेत्र में पहुंच गया है। यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन के बाहर सड़क पर पानी भरने से यात्री नहीं पहुंच पा रहे हैं।
लोगों को किया गया स्थानांतरित
कश्मीरी गेट आइएसबीटी में बुधवार रात से ही पानी भरा हुआ है। मयूर विहार फेज, यमुना विहार जैसे निचले क्षेत्रों में बने राहत शिविर में पानी भर गया। इस कारण वहां शरण लिए लोगों को दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित किया गया।
गीता कालोनी, उस्मानपुर, बदरपुर खादर, यमुना बाजार, मोनेस्ट्री बाजार, मजून का टीला, चंदगी राम अखाड़ा सहित अन्य स्थानों पर पानी भरने से 15 हजार से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं। लोहा पुल बंद होने के कारण दैनिक यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। 100 से अधिक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ है। 50 से अधिक ट्रेनें निरस्त कर दी गईं।
..हरियाणा में बाढ़ की स्थिति गंभीर
हरियाणा में हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। हथनीकुंड बैराज के फ्लड गेट लगातार चौथे दिन खुले हुए हैं, जिससे जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे यमुनानगर, करनाल, पानीपत और सोनीपत के यमुना किनारे स्थित क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है।
अंबाला में टांगरी-मारकंडा और उसकी सहायक नदी बेगना भी उफान पर हैं। इस कारण बाढ़ का पानी अंबाला-रुड़की नेशनल हाईवे-344 के ऊपर से बह रहा है। हाईवे की एक साइड को बंद करना पड़ा है, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।














