इंडोनेशिया में अगस्त 2025 के दौरान बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनकी मुख्य वजहें आर्थिक संकट, बढ़ती बेरोज़गारी, महंगाई, और संसद सदस्यों को दिए जाने वाले अतिरिक्त भत्तों के प्रति असंतोष हैं। मकासर शहर में शुक्रवार रात प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्रीय संसद भवन में आग लगा दी। इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई और 5 लोग घायल हो गए। मकासर शहर परिषद के सचिव राहमत मप्पाटोबा ने प्रदर्शनकारियों पर भवन में आग लगाने का आरोप लगाया। आग लगने के बाद कुछ लोग इमारत से कूदने की कोशिश में घायल हुए। इंडोनेशिया में शुक्रवार से कई शहरों में बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। दरअसल, शुक्रवार को पुलिस के एक वाहन ने मोटरसाइकिल से जा रहे डिलीवरी ड्राइवर को कुचल दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
इसके बाद लोगों ने सरकारी अधिकारियों और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं के खिलाफ प्रदर्शन तेज कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और सरकारी इमारतों पर पत्थर और पटाखे फेंके, जबकि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। ड्राइवर की मौत के मामले में सात अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है। खबरों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए और मृत ड्राइवर के परिवार से मुलाकात की।
हालिया घटनाक्रम
प्रदर्शन की शुरुआत: 25 अगस्त 2025 से इन प्रदर्शनों की तेज़ शुरुआत हुई, जब संसद सदस्यों को नए आवास भत्ते देने का प्रस्ताव सामने आया। यह भत्ता राजधानी जकार्ता की न्यूनतम मजदूरी का दस गुना था, जिससे जनता में गुस्सा फैल गया।
मुख्य जगहें: प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र जकार्ता, मेडन, सुराबाया, बोरो, सुलावेसी, और कई अन्य बड़े शहर रहे।
प्रदर्शनकारियों की मांगें: कानून में सुधार, सांसदों के भत्तों की वापसी, महंगाई और बेरोजगारी से राहत, पुलिस की जवाबदेही, मजदूर हितों की रक्षा, और सामाजिक-आर्थिक सुधार।
हिंसा और पुलिस कार्रवाई
पुलिस दमन: कई जगहों पर पुलिस ने दंगा निरोधक बल के साथ आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिससे तनाव और हिंसा बढ़ी।
जानमाल का नुकसान: जकार्ता में एक मोटरसाइकिल टैक्सी ड्राइवर की मृत्यु और प्रदर्शनकारियों द्वारा इमारतों को आग लगाने जैसी घटनाएं सामने आईं, जिससे कई लोगों की मौत और दर्जनों घायल हुए।
प्रमुख कारण
आर्थिक असमानता – सांसदों के लिए बनाए गए नए और अत्यधिक भत्ते।
मूल्य वृद्धि – भोजन, शिक्षा, और करों में बढ़ोतरी तथा स्थानीय प्रशासन के बजट कटौती।
सरकारी बयान और व्यवहार – संसद सदस्यों द्वारा जनता के प्रति असंवेदनशील बयान, जिससे गुस्सा और भड़क गया।
पुलिस हिंसा – पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष में पुलिस हिंसा बढ़ी, जिससे और असंतोष फैला।
इंडोनेशिया में प्रदर्शन का मुख्य कारण बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी, और सरकार की नीतियों—विशेष रूप से सांसदों के बड़े भत्तों और पुलिस दमन—के प्रति जन-संतोष है। जनता पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक-संघर्ष राहत संबंधी मांग लेकर सड़कों पर उतरी है।







