पटना में पुलिस ने डाक बंगला चौराहे पर संयुक्त किसान मोर्चा के किसानों को राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने से रोक दिया. पुलिस और किसानों के बीच झड़प हुई है. पटना में किसान मोर्चा का प्रदर्शन:बैरिकेडिंग पर चढ़ कर रहे प्रदर्शन,पटना में अपनी मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा प्रदर्शन कर रहा है। बक्सर सांसद और किसान नेता सुधाकर सिंह ने नेतृत्व में ये प्रदर्शन हो रहा है। बोले- सरकार जबरन जमीन अधिग्रहण कर रही .
पटना में किसानों का ज़ोरदार प्रदर्शन हुआ, जिसमें बक्सर सांसद सुधाकर सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों किसान राजधानी की सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनकी मुख्य मांग थी कि थर्मल पावर प्लांट, सड़कों आदि के लिए ली गई ज़मीन का उचित मुआवजा मिले, जो अभी तक 2014 की दरों पर दिया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि सरकार जबरन जमीन ले रही है और हक़ नहीं दे रही।
पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष
किसानों द्वारा मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च के दौरान डाकबंगला चौराहे पर पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग की गई। नाराज किसानों ने बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश की, जिसके चलते पुलिस और किसानों में तीखी नोकझोंक और झड़प हुई। हालात संभालने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन भी बुलाया और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की।
विवादित बयान और प्रतिक्रिया
जुलाई 2025 में बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी (ADG) कुंदन कृष्णन के किसान संबंधी बयान पर भी काफी विवाद हुआ। उन्होंने कहा था कि मई-जून में जब किसान खाली रहते हैं, तो अपराध बढ़ जाते हैं। इस बयान का किसानों और राजनीतिक दलों ने विरोध किया, और बाद में अधिकारी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी।
पटना में किसानों और पुलिस के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिसकी जड़ें जमीन अधिग्रहण, मुआवजा की दर, और किसानों के प्रति सरकारी एवं प्रशासनिक दिमागियत में छिपी हैं। पुलिस और किसानों के बीच झड़प के साथ-साथ प्रशासनिक बयानबाज़ी ने आंदोलन को और तीखा बना दिया है।
टना में किसानों की मुख्य मांगें हैं—उनकी अधिग्रहित जमीन का मौजूदा बाजार दर पर उचित मुआवजा, जबरन भूमि अधिग्रहण का विरोध, और सरकार द्वारा किसानों के साथ हो रहे अन्याय की रोकथाम।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजा
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किसानों का कहना है कि भारतमाला परियोजना, थर्मल पावर प्लांट आदि के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की जा रही है।
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भूमि अधिग्रहण के बदले उन्हें 2014 की दर पर मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि उनकी मांग है कि यह 2025 की बाजार दर के अनुसार मिले।
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किसानों को सही हक न देने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।
अन्य मांगें
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खेती के लिए सिंचाई, खाद, और बीज की बेहतर आपूर्ति।
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फसल की बिक्री पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी।
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कर्ज माफी और किसानों के लिए आसान लोन, साथ ही बिजली बिल व मंडी व्यवस्था की बहाली।
आंदोलन का स्वरूप
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किसान नेताओं का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और सिर्फ बक्सर या पटना नहीं, बल्कि पूरे बिहार के किसान इससे जुड़े हैं।
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सरकार से संवाद और उचित नीति की मांग किसानों द्वारा लगातार उठाई जा रही है।
इन प्रमुख मांगों के केंद्र में उचित मुआवजा, बाजार दर पर भुगतान, और कृषि क्षेत्र में किसानों के हितों की रक्षा है।







