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पांच दिन में सुनवाई होती है, मेरी याचिका दो साल अटकी रही………….

UB India News by UB India News
August 27, 2025
in राष्ट्रीय
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पांच दिन में सुनवाई होती है, मेरी याचिका दो साल अटकी रही………….
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विपक्ष द्वारा 130वें संविधान संशोधन विधेयक के विरोध के बीच अमित शाह ने कहा है कि जब सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सीबीआई ने उन्हें समन जारी किया था तो उन्होंने समन मिलने के अगले ही दिन इस्तीफा दे दिया था। साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक वे इस मामले से बरी नहीं हो गए, तब तक उन्होंने कोई संवैधानिक पद नहीं लिया।

‘मैंने समन मिलते ही इस्तीफा दिया’
दरअसल विपक्ष ने अमित शाह पर आरोप लगाए हैं और सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में जेल जाने के लिए शाह की नैतिकता पर सवाल उठाए। न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में अमित शाह ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ‘जैसे ही मुझे सीबीआई से समन मिला, मैंने अगले ही दिन इस्तीफा दिया और मुझे बाद में गिरफ्तार किया गया। यह मामला चलता रहा और फैसले में भी कहा गया कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला था और मैं पूरी तरह से बेगुनाह था। फैसला बाद में आया, लेकिन मुझे जमानत पहले मिल गई। इसके बावजूद मैंने शपथ नहीं ली। इतना ही नहीं जब तक मुझे पूरी तरह से बरी नहीं कर दिया गया, मैंने कोई संवैधानिक पद भी नहीं लिया। विपक्ष मुझे कौन सा नैतिकता का पाठ पढ़ाना चाहता है?’

‘मेरी जमानत याचिका दो साल अटकी रही’
यह पूछे जाने पर कि क्या जस्टिस आफताब आलम उनके घर आए थे हस्ताक्षर लेने? इस पर अमित शाह ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि ‘नहीं ऐसा नहीं हुआ था। जस्टिस आफताब आलम कभी मेरे घर नहीं आए। उन्होंने मेरी जमानत याचिका पर रविवार के दिन विशेष सुनवाई की और कहा कि गृह मंत्री होने के नाते मैं गवाहों को प्रभावित कर सकता हूं, तब मेरे वकील ने कहा कि जब तक जमानत याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक मेरे मुवक्किल गुजरात से बाहर रहेंगे। मैं दो साल राज्य से बाहर रहा क्योंकि देश के इतिहास में किसी की भी जमानत याचिका पर दो साल तक सुनवाई नहीं हुई, लेकिन जस्टिस आफताब आलम की कृपा से मेरी जमानत याचिका पर दो साल सुनवाई चली। जबकि आमतौर पर जमानत याचिका पर 11 दिन में फैसला हो जाता है।’ विपक्ष भी 130वें संविधान संशोधन में जमानत के लिए 30 दिन के समय पर सवाल उठा रहा है। इस शाह ने कहा कि मेरे मामले के अलावा सुप्रीम कोर्ट में कोई भी जमानत याचिका का केस पांच दिन से ज्यादा नहीं चलता।

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‘संविधान निर्माताओं ने इसकी कल्पना भी नहीं की होगी’
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने भी कल्पना नहीं की होगी कि हमारे देश में सीएम जेल से सरकार चलाएंगे। उन्होंने कहा ‘अदालत भी इस कानून की गंभीरता को समझती है। जब किसी सीएम या मंत्री को 30 दिन में पद से हटाया जाएगा तो उससे पहले अदालत तय कर सकती है कि उस व्यक्ति को जमानत मिलेगी या नहीं। जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे और मामला उच्च न्यायालय चला गया था तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए था। उच्च न्यायालय ने भी कहा था कि केजरीवाल के नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मेरी पार्टी का मानना है कि देश के प्रधानमंत्री और किसी भी सीएम को जेल में रहते हुए सरकार नहीं चलानी चाहिए। जब संविधान बनाया गया था तो संविधान निर्माताओं ने कल्पना भी नहीं की होगी कि एक मुख्यमंत्री जेल जाएगा और जेल से ही सरकार चलाएगा।’

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ कहां हैं?
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ कहां हैं? यह सवाल लगातार विपक्ष पूछ रहा है. जगदीप धनखड़ ने को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. विपक्ष लगातार कह रहा है कि जगदीप धनखड़ को हाउस अरेस्ट किया गया है. अब इस पर खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जवाब आया है. जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर जारी अटकलों पर अमित शाह ने विपक्ष के हाउस अरेस्ट के दावे को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है.
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा, ‘जगदीप धनखड़ साहब का इस्तीफा पत्र स्वयं स्पष्ट है. उन्होंने अपने इस्तीफे के लिए स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों और सरकारी सदस्यों के प्रति अपने अच्छे कार्यकाल के लिए हार्दिक आभार भी व्यक्त किया है.’
जब कुछ विपक्षी नेताओं की ओर से जगदीप धनखड़ के हाउस अरेस्ट किए जाने के दावे के बारे में पूछा गया तो अमित शाह ने कहा कि सत्य और असत्य की व्याख्या केवल विपक्ष के बयानों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि आपके सत्य और असत्य की व्याख्या विपक्ष के कहने पर आधारित है. हमें इन सब पर हंगामा नहीं करना चाहिए.’
उन्होंने कहा, ‘जगदीप धनखड़ जी एक संवैधानिक पद पर आसीन थे और अपने कार्यकाल में उन्होंने संविधान के अनुरूप अच्छा काम किया. उन्होंने अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या के कारण इस्तीफा दिया है. किसी को भी इसे ज्यादा खींचकर कुछ खोजने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.’
अमित शाह का यह जवाब ऐसे वक्त में आया है जब विपक्षी नेताओं ने अचानक जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर सवाल उठाए. विपक्ष ने दावा किया किया जगदीप धनखड़ को सरकार की ओर से चुप करा दिया गया है. खुद राहुल गांधी ने भी उनके इस्तीफे की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाया.

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने भी सवाल उठाया कि क्या जगदीप धनखड़ की सार्वजनिक दृष्टि से अनुपस्थिति को देखते हुए एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की जानी चाहिए. हालांकि, भाजपा ने कहा है कि जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया और उनके साथ किसी भी मतभेद के सुझावों को खारिज कर दिया. जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन इस्तीफा दिया था.

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दरअसल विपक्ष ने अमित शाह पर आरोप लगाए हैं और सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में जेल जाने के लिए शाह की नैतिकता पर सवाल उठाए। न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में अमित शाह ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ‘जैसे ही मुझे सीबीआई से समन मिला, मैंने अगले ही दिन इस्तीफा दिया और मुझे बाद में गिरफ्तार किया गया। यह मामला चलता रहा और फैसले में भी कहा गया कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला था और मैं पूरी तरह से बेगुनाह था। फैसला बाद में आया, लेकिन मुझे जमानत पहले मिल गई। इसके बावजूद मैंने शपथ नहीं ली। इतना ही नहीं जब तक मुझे पूरी तरह से बरी नहीं कर दिया गया, मैंने कोई संवैधानिक पद भी नहीं लिया। विपक्ष मुझे कौन सा नैतिकता का पाठ पढ़ाना चाहता है?’

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यह पूछे जाने पर कि क्या जस्टिस आफताब आलम उनके घर आए थे हस्ताक्षर लेने? इस पर अमित शाह ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि ‘नहीं ऐसा नहीं हुआ था। जस्टिस आफताब आलम कभी मेरे घर नहीं आए। उन्होंने मेरी जमानत याचिका पर रविवार के दिन विशेष सुनवाई की और कहा कि गृह मंत्री होने के नाते मैं गवाहों को प्रभावित कर सकता हूं, तब मेरे वकील ने कहा कि जब तक जमानत याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक मेरे मुवक्किल गुजरात से बाहर रहेंगे। मैं दो साल राज्य से बाहर रहा क्योंकि देश के इतिहास में किसी की भी जमानत याचिका पर दो साल तक सुनवाई नहीं हुई, लेकिन जस्टिस आफताब आलम की कृपा से मेरी जमानत याचिका पर दो साल सुनवाई चली। जबकि आमतौर पर जमानत याचिका पर 11 दिन में फैसला हो जाता है।’ विपक्ष भी 130वें संविधान संशोधन में जमानत के लिए 30 दिन के समय पर सवाल उठा रहा है। इस शाह ने कहा कि मेरे मामले के अलावा सुप्रीम कोर्ट में कोई भी जमानत याचिका का केस पांच दिन से ज्यादा नहीं चलता।

‘संविधान निर्माताओं ने इसकी कल्पना भी नहीं की होगी’
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने भी कल्पना नहीं की होगी कि हमारे देश में सीएम जेल से सरकार चलाएंगे। उन्होंने कहा ‘अदालत भी इस कानून की गंभीरता को समझती है। जब किसी सीएम या मंत्री को 30 दिन में पद से हटाया जाएगा तो उससे पहले अदालत तय कर सकती है कि उस व्यक्ति को जमानत मिलेगी या नहीं। जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे और मामला उच्च न्यायालय चला गया था तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए था। उच्च न्यायालय ने भी कहा था कि केजरीवाल के नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मेरी पार्टी का मानना है कि देश के प्रधानमंत्री और किसी भी सीएम को जेल में रहते हुए सरकार नहीं चलानी चाहिए। जब संविधान बनाया गया था तो संविधान निर्माताओं ने कल्पना भी नहीं की होगी कि एक मुख्यमंत्री जेल जाएगा और जेल से ही सरकार चलाएगा।’

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ कहां हैं?
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ कहां हैं? यह सवाल लगातार विपक्ष पूछ रहा है. जगदीप धनखड़ ने को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. विपक्ष लगातार कह रहा है कि जगदीप धनखड़ को हाउस अरेस्ट किया गया है. अब इस पर खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जवाब आया है. जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर जारी अटकलों पर अमित शाह ने विपक्ष के हाउस अरेस्ट के दावे को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है.
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा, ‘जगदीप धनखड़ साहब का इस्तीफा पत्र स्वयं स्पष्ट है. उन्होंने अपने इस्तीफे के लिए स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों और सरकारी सदस्यों के प्रति अपने अच्छे कार्यकाल के लिए हार्दिक आभार भी व्यक्त किया है.’
जब कुछ विपक्षी नेताओं की ओर से जगदीप धनखड़ के हाउस अरेस्ट किए जाने के दावे के बारे में पूछा गया तो अमित शाह ने कहा कि सत्य और असत्य की व्याख्या केवल विपक्ष के बयानों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि आपके सत्य और असत्य की व्याख्या विपक्ष के कहने पर आधारित है. हमें इन सब पर हंगामा नहीं करना चाहिए.’
उन्होंने कहा, ‘जगदीप धनखड़ जी एक संवैधानिक पद पर आसीन थे और अपने कार्यकाल में उन्होंने संविधान के अनुरूप अच्छा काम किया. उन्होंने अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या के कारण इस्तीफा दिया है. किसी को भी इसे ज्यादा खींचकर कुछ खोजने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.’
अमित शाह का यह जवाब ऐसे वक्त में आया है जब विपक्षी नेताओं ने अचानक जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर सवाल उठाए. विपक्ष ने दावा किया किया जगदीप धनखड़ को सरकार की ओर से चुप करा दिया गया है. खुद राहुल गांधी ने भी उनके इस्तीफे की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाया.

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने भी सवाल उठाया कि क्या जगदीप धनखड़ की सार्वजनिक दृष्टि से अनुपस्थिति को देखते हुए एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की जानी चाहिए. हालांकि, भाजपा ने कहा है कि जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया और उनके साथ किसी भी मतभेद के सुझावों को खारिज कर दिया. जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन इस्तीफा दिया था.
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