भोजपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, सारण, सिवान, गोपालगंज और मुज़फ्फरपुर — बिहार के कई ज़िले एक बार फिर भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। नदियों के उफान और लगातार हो रही बारिश ने हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं और उन्हें भोजन, कपड़े और आश्रय की सख़्त ज़रूरत है।
हर साल मॉनसून का मौसम बिहार के लाखों लोगों के लिए चिंता लेकर आता है। इस बार भी वही भयावह तस्वीर दोहराई जा रही है — तटबंध टूट रहे हैं, खेत और घर पानी में बह रहे हैं, और लोग ऊँचाई वाले स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
भोजपुर ज़िले के जवनिया गांव में तो हालात और भी भयावह हैं। यहाँ अब तक 350 से अधिक घर पानी में बह चुके हैं। बच्चे बिना कपड़ों के हैं और मांओं की आँखों में सिर्फ चिंता और लाचारी साफ़ दिखाई देती है। जब बारिश छत पर गिरे तो वह सुकून देती है, लेकिन जब छत ही न हो — तो वही बारिश डर, भूख और असुरक्षा का कारण बन जाती है।

दानपात्र: संकट की घड़ी में राहत का नाम
इस कठिन समय में ‘दानपात्र’ नाम की समाजसेवी संस्था बिहार के इन बाढ़ प्रभावित इलाकों में ज़मीनी स्तर पर राहत कार्यों में जुटी है। भोजपुर के जवनिया गांव से लेकर दरभंगा, समस्तीपुर, गोपालगंज, सिवान, सारण और मुज़फ्फरपुर जैसे जिलों में दानपात्र राहत सामग्री लेकर सीधे ज़रूरतमंदों तक पहुँच रहा है।
दानपात्र के स्वयंसेवकों ने जवनिया गांव में प्रभावित परिवारों से मुलाक़ात की, उनकी ज़रूरतों को समझा और आवश्यक सामग्री पहुँचाई। यह सिर्फ एक डॉक्यूमेंटेशन नहीं था, बल्कि एक इंसानी ज़िम्मेदारी और अपील थी — कि इन हालात में हम सबको मिलकर एकजुट होना होगा।
दानपात्र द्वारा पहुँचाई जा रही राहत सामग्री में सूखा राशन (चावल, आटा, दाल, नमक आदि), पीने का साफ़ पानी, स्वच्छता का सामान, कपड़े, दवाइयाँ, प्राथमिक चिकित्सा सामग्री और तिरपाल जैसी अस्थायी आश्रय सामग्री शामिल हैं।
आप भी इस राहत अभियान का हिस्सा बन सकते हैं
बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत पहुँचाने के लिए दानपात्र समाज से सहयोग की अपील कर रहा है। आप इस मुहिम में हिस्सा लेकर कई ज़िंदगियों में बदलाव ला सकते हैं। आप उपयोगी सामग्री (राशन, कपड़े, बर्तन आदि) दान कर सकते हैं, वालंटियर बनकर समय दे सकते हैं, या फिर आर्थिक सहयोग करके अधिक से अधिक परिवारों तक मदद पहुँचाने में योगदान दे सकते हैं।
दानपात्र क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
‘दानपात्र’ एक समाजसेवी संस्था है, जिसकी स्थापना सात साल पहले यश गुप्ता ने की थी। एक दिन उन्होंने एक 7 वर्षीय असहाय बच्चे को बेहद दयनीय हालत में देखा। उस दृश्य ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और उन्होंने उसी समय यह संकल्प लिया कि वे समाज के हर मजबूर व्यक्ति के लिए सहारा बनेंगे। इसी सोच से ‘दानपात्र’ की नींव रखी गई।

अब तक की उपलब्धियाँ और सामाजिक योगदान
दानपात्र अब तक 35 लाख से अधिक ज़रूरतमंद परिवारों तक मदद पहुँचा चुका है। संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, वस्त्र और रोजगार के क्षेत्रों में निरंतर सक्रिय है। यह सिर्फ राहत तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की दिशा में भी लगातार प्रयासरत है।
संस्था का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और दो बार इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। देश के विभिन्न राज्यों, शहरों और गांवों में चलाए गए राहत अभियानों के ज़रिए हज़ारों लोगों की ज़िंदगी को नई दिशा मिली है।

दानपात्र की भूमिका सिर्फ राहत नहीं, एक सोच है
‘दानपात्र’ सिर्फ एक संस्था नहीं है, बल्कि एक उम्मीद है — जो हर आपदा, हर संघर्ष और हर मौसम में ज़रूरतमंदों के साथ खड़ी रहती है। जब बारिश किसी का घर छीन लेती है, तब ‘दानपात्र’ उनके लिए छत, भोजन और सहारा बनकर सामने आता है। यह संस्था हमें यह विश्वास दिलाती है कि इंसानियत अब भी ज़िंदा है।







