तेजस्वी यादव ने फरवरी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बयान दिया था। 15 अगस्त बीत चुका है, लेकिन 6 बैठकों के बाद भी RJD लीड महागठबंधन में सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन में सीटों का बंटवारा सितंबर आखिर तक होगा। पूरा अगस्त कांग्रेस नेता राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा में चला जाएगा। इस वजह से लेट होगा।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के बीच सीटों शेयरिंग पर लगभग सहमति बन गई है। कांग्रेस के खाते में 50 से 55 सीट तक आ सकता है। दोनों पार्टियों ने अपने कुछ प्रत्याशियों को फील्ड में जाने का इशारा भी कर दिया है।
जबकि, लेफ्ट की पार्टियां सीट बंटवारे में लेटलतीफी से परेशान हैं। बताया जा रहा है कि लेफ्ट और मुकेश सहनी की पार्टी सीटों का तालमेल जल्दी करने के मूड में है। ताकि वह अपनी तैयारी शुरू कर सके।
महागठबंधन की पार्टियांः RJD, कांग्रेस, भाकपा-माले, CPI, CPIM और VIP।
पशुपति कुमार पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोजपा और हेमंत सोरेन की पार्टी JMM के भी शामिल होने की संभावना है।
मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए और देखिए, महागठबंधन में सीट बंटवारे में देरी के पीछे क्या है रणनीति? कौन-कौन सी पार्टी चाहती है जल्दी बंटवारा?
2 पॉइंट में सीट बंटवारे में देरी क्यों
अब तक महागठबंधन की पार्टियां 6 बैठकें कर चुकी हैं। इसमें को-ऑर्डिनेशन कमेटी से लेकर प्रचार और घोषणा पत्र तैयार करने तक की कमेटियां का गठन किया जा चुका है। सीट बंटवारे में देरी के 2 कारण…।
1. गठबंधन की पार्टियों पर दबाव बनाना
इस वक्त गठबंधन में 6 पार्टियां हैं और कांग्रेस से लेकर लेफ्ट और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) तक सीटों की डिमांड अधिक कर रही हैं।
मुकेश सहनी 60 तो लेफ्ट की खासकर माले पिछले प्रदर्शन को आधार बनाकर अधिक सीटों पर दावेदारी कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, RJD हो या कांग्रेस दोनों बाकी पार्टियों को अधिक सीट देने के पक्ष में नहीं है। सीटों के तालमेल में देरी के पीछे यह अहम कारण माना जा रहा है। अगर सीटों का बंटवारा देर से होगा तो पार्टियां जल्दी समझौता करने को तैयार हो जाएंगी।
‘हर बार चुनाव के पहले सभी पार्टियां सीटों की दावेदारी करती हैं। अभी सभी पार्टियां अपने-अपने तरीके से दावा कर रही हैं। सीट बंटवारे में देरी होने से छोटी पार्टियां जल्दी नेगोसिएट कर लेती हैं। लास्ट आवर में टिकट बांटने से छोटी पार्टियां जल्दी से समझौते के मूड में होती हैं, इसलिए दबाव नहीं बना पाती।’
2. NDA की रणनीति का वेट एंड वॉच
सत्ताधारी NDA में भी अभी सीटों का तालमेल नहीं हो पाया है। NDA की औपचारिक रूप से एक भी बैठक तक नहीं हुई है। महागठबंधन की नजर इस पर भी है।
RJD-कांग्रेस चाहती है कि हम अपनी सीटों का ऐलान NDA की सीटों के ऐलान के बाद करें, ताकि अंतिम समय तक रणनीति बनाई जा सके।
सीनियर जर्नलिस्ट प्रवीण बागी कहते हैं, ‘विधानसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों गठबंधन की समझ मोटामोटी बन गई है कि कितनी सीटों पर लड़ना है। उसमें थोड़ी सी खींचतान है कि किस पार्टी को कौन सी सीट मिलेगी। महागठबंधन में समस्या मुकेश सहनी को लेकर हो रही है। वे खुद को डिप्टी CM अभी से ही घोषित कर रहे हैं, जिसको लेकर अन्य पार्टियों में नाराजगी है। महागठबंधन एक बार NDA के सीटों की गणित को समझना चाहता है।’
माले-सहनी जल्दी चाहते हैं सीटों का बंटवारा
माले के राज्य सचिव कुणाल कहते हैं, ‘इंडिया गठबंधन की को-ऑर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन तेजस्वी यादव को सूची सौंप दी है। इस पर दो राउंड बात भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक ठोस बात निकल कर सामने नहीं आई है।’
उन्होंने कहा, ‘हमलोग चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी सीटों का बंटवारा हो। हमारी पार्टी के लिए यह और भी जरूरी है। हमें पैसा भी जुटाना पड़ता है। हम लोगों को कई तरह की तैयारियां करनी पड़ती हैं।’
VIP के प्रदेश प्रवक्ता देव ज्योति कहते हैं, ‘टिकट बंटवारे में जितनी जल्द क्लियरिटी आती है प्रत्याशियों को मजबूती मिलती है। जिनको टिकट देना है उनको कह दिया गया है कि क्षेत्र में तैयारी करें। लेकिन को-ऑर्डिनेशन कमेटी की मुहर के बाद ही उसे ऑथेंटिक माना जाएगा।’
माले के सिटिंग विधायकों को टिकट मिलना तय
महागठबंधन के अंदर कांग्रेस के सिटिंग विधायकों को टिकट मिलना पक्का है। RJD में उन विधायकों का टिकट कट सकता है जिन्होंने लोकसभा चुनाव में अपने इलाके का वोट ठीक से ट्रांसफर नहीं करवाया है। ऐसे विधायकों की संख्या 20 के आसपास है। इस लिहाज से ज्यादातर सिटिंग विधायक चुनाव प्रचार में एक्टिव हैं।
माले के सिटिंग विधायकों को भी टिकट मिलना पक्का है। VIP ने जिन सीटों पर जीत हासिल की वे सीटें उनको मिल सकती है। महागठबंधन की को-ऑर्डिनेशन कमेटी सभी साथी पार्टियों की ताकत नाप रही है। साथ ही उन उम्मीदवारों पर भी मंथन जारी है, जिनको उम्मीदवार बनाया जा सके।
डिप्टी CM के दांव से तो पेंच नहीं
महागठबंधन में डिप्टी CM पद पर घमासान होने लगा है। VIP प्रमुख मुकेश सहनी डिप्टी CM बनने पर आमादा हैं। लगातार कह रहे- महागठबंधन सरकार में मैं ही डिप्टी CM बनूंगा। मेरी पार्टी को विधानसभा चुनाव में 60 सीटों पर टिकट चाहिए।
वहीं, महागठबंधन के बाकी घटक दल (राजद, कांग्रेस, भाकपा माले, भाकपा, माकपा) ने इसे खारिज किया।
RJD के सीनियर लीडर अब्दुल बारी सिद्दीकी ने दावेदारी पर कहा-‘कौन, किसकी दावेदारी कर रहा, हम नहीं जानते। गठबंधन में तो ऐसी बात नहीं हुई है।’
कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खां बोले- ‘महागठबंधन में अभी तक केवल बिहार का संयोजक तय है। ये तेजस्वी हैं। डिप्टी CM के बारे में न तो कोई फैसला हुआ है और न ही किसी से वादा किया गया है।’
भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा, ‘चुनाव जीतने के बाद CM और डिप्टी CM का पद तय होगा।’
माकपा के राज्य सचिव ललन चौधरी ने बताया, ‘महागठबंधन के बीच सीट और पद को लेकर निर्णय नहीं हुआ है।’
कांग्रेस ने टिकटों के दावेदारों से बात शुरू की
अजय माकन के नेतृत्व में कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक लगातार जारी है। कमेटी टिकट के दावेदारों से आवेदन ले रही है और उनसे पूछ रही है कि चुनाव कैसे जीतेंगे।
जानकारी के मुताबिक, ऑनलाइन-ऑफलाइन उम्मीदवारी का दावा करने वालों की संख्या 2755 तक पहुंच चुकी है।
सूचना है कि कांग्रेस RJD की जीती सीटों पर भी उम्मीदवारों के आवेदन ले रही है। कमेटी वैसी सीटों पर भी आवेदन ली है, जहां राजद पिछले विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से हारी है और इस बार RJD के खाते में जाना तय है।







