भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत टल सकती है। यह 25 से 29 अगस्त को होने वाली थी। PTI के मुताबिक अब यह बैठक बाद में होने की संभावना है। अब तक इस समझौते के लिए पांच दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है, छठे दौर के लिए अमेरिकी टीम को भारत आना था। इससे पहले अमेरिका ने 6 अगस्त को भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाने की घोषणा थी। अमेरिका कृषि और डेयरी क्षेत्रों में अधिक बाजार पहुंच की मांग कर रहा है, लेकिन भारत इससे इनकार कर चुका है।
भारत ने साफ कहा है कि वह किसानों और पशुपालकों के हितों से समझौता नहीं करेगा। दोनों देश सितंबर-अक्टूबर 2025 तक BTA के पहले चरण को पूरा करने की योजना बना रहे हैं।
डेयरी प्रोडक्ट्स को लेकर भारत-अमेरिका के बीच विवाद
अमेरिका चाहता है कि उसके डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, पनीर, घी को भारत में आयात की अनुमति मिले। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इस सेक्टर में करोड़ों छोटे किसान लगे हुए हैं।
भारत सरकार को डर है कि अगर अमेरिकी डेयरी उत्पाद भारत में आएंगे, तो वे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा धार्मिक भावना भी जुड़ी हुई हैं।
अमेरिका में गायों को बेहतर पोषण के लिए जानवरों की हड्डियों से बने एंजाइम (जैसे रैनेट) को उनके खाने में मिलाया जाता है। भारत ऐसी गायों के दूध को ‘नॉन वेज मिल्क’ यानी मांसाहारी दूध मानता है।
भारत बोला- हितों से कोई समझौता करेंगे
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्वदेशी’ उत्पादों को बढ़ावा देने और किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों की रक्षा करने का संकल्प दोहराया था।
उन्होंने कहा, ‘भारत अपने किसानों और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।’
2030 तक व्यापार को 500 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य
भारत और अमेरिका का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जुलाई 2025 में भारत का अमेरिका को निर्यात 21.64% बढ़कर 33.53 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 12.33% बढ़कर 17.41 अरब डॉलर रहा।
अमेरिका इस दौरान भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा, जिसके साथ 12.56 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से भारत का अमेरिका को निर्यात लगातार बढ़ रहा है।
व्यापार समझौते पर होनी थी छठे दौर की बातचीत
यह अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर छठे दौर की बातचीत होती और इसका समय भी महत्वपूर्ण था. यह बातचीत 27 अगस्त के आसपास होनी थी, जब अतिरिक्त 25% टैरिफ लागू होने वाला था. यह सितंबर-अक्टूबर की समय-सीमा से पहले हो रही थी, जिसे समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तय किया जा रहा था. हालांकि, सूत्रों ने कहा कि वार्ता के पुनर्निर्धारित होने की संभावना है.
इस समझौते का प्रमुख मुद्दा कृषि और डेयरी क्षेत्रों में अमेरिकी पहुंच को लेकर है, जिस पर अमेरिका काफी जोर दे रहा है. हालांकि भारत ने कहा है कि वह इसे स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि इससे छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका प्रभावित होती है. साथ ही दूध के आयात में धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं पर भी विचार किया जा रहा है.
टैरिफ की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने भाषण में स्वदेशी उत्पादों पर जोर दिया था. साथ ही किसानों और मछुआरों के समर्थन का एक मजबूत संदेश भी दिया था.
लाल किले से अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “मोदी भारत के किसानों, मछुआरों और पशुपालकों से जुड़ी किसी भी हानिकारक नीति के खिलाफ दीवार की तरह खड़ा है. भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के लिए किसी भी तरह का समझौता कभी स्वीकार नहीं करेगा.”
यूक्रेन विवाद को लेकर ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शनिवार तड़के अलास्का में महत्वपूर्ण बैठक हुई (भारतीय समयानुसार) और ऐसी उम्मीदें थीं कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार से भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ में ढील मिल सकती है.
भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने किया था बड़ा दावा
बैठक से पहले और बाद में अपनी टिप्पणियों में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की जरूरत नहीं पड़ सकती है.
डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि अलास्का में ट्रंप ने दावा किया है कि रूस ने भारत के रूप में अपना बड़ा तेल ग्राहक खो दिया, भारत लगभग 40% तेल रूस से ले रहा था. चीन भी रूस से खूब तेल खरीद रहा है. अगर मैंने सेकेंड्री टैरिफ लगाया तो यह बहुत ही विनाशकारी होगा. ट्रंप ने ये भी कहा कि अगर उनको ऐसा करने की जरूरत पड़ी तो वह जरूर करेंगे. लेकिन ये भी हो सकता है कि उनको ऐसा करने की जरूरत ही न पड़े.







