कांग्रेस इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इनक्लूसिव अलायंस (INDIA Bloc) यानी इंडिया गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। गठबंधन की राजनीति में दलों को बहुत समझौते करने होते हैं। हर पार्टी का अपना एजेंडा, अपने सिद्धांत होते हैं और इनके बीच तारतम्य बनाए रखना आसान नहीं होता। किसी एक पार्टी का प्रभाव समूचे गठबंधन को फायदा पहुंचा सकता है, तो किसी एक पार्टी की बदनामी सभी सहयोगी दलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है। भले ही कांग्रेस एक बड़े गठबंधन का नेतृत्व कर रही है लेकिन वह अपने सिद्धांतों, मान्यताओं को खुद तक सीमित रखने के लिए विवश है। वह बीजेपी की तरह सहयोगी दलों को आंखें नहीं दिखा सकती।
बिहार में अब तक के संकेत यही हैं कि इंडिया गठबंधन के प्रमुख सहयोगी कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ( RJD ) मिलकर चुनाव लड़ेंगे। हालांकि कांग्रेस को आरजेडी के ही कारण भारी दुविधा का सामना करना पड़ रहा है। बिहार में चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के खिलाफ कांग्रेस और आरजेडी, दोनों ने ही केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोला।
चुनाव आयोग को घेरने वाले तेजस्वी यादव खुद आरोप से घिरे
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर राज्य के 65 लाख मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाने पर आपत्ति दर्ज कराई। यहां तक कि उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका ही नाम वोटर लिस्ट में नहीं है। जब चुनाव आयोग ने उन्हें जवाब दिया कि उनका नाम दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों की लिस्ट में है, तो उनके पास कोई सटीक जवाब नहीं था। इसके बाद दो-दो वोटर कार्ड बनवाने के आरोप में उनके खिलाफ केस भी दर्ज हो गया है। उनको निर्वाचन विभाग से नोटिस भी मिला है।
इस घटनाक्रम से आरजेडी को तो नुकसान हुआ ही है, कांग्रेस को भी इसका खामियाजा झेलना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी बिहार में 10 अगस्त को तेजस्वी यादव के साथ ‘वोट अधिकार यात्रा’ निकालने वाले थे, लेकिन वोट के अधिकार का दुरुपयोग करने का इल्जाम कांग्रेस के ही सहयोगी दल आरजेडी पर लग गया। अब सवाल है कि राहुल गांधी आम लोगों के सामने वोट के अधिकार की बात कैसे करें? मजबूरन उनको यह यात्रा स्थगित करनी पड़ी है।
क्या अब राहुल के साथ तेजस्वी करेंगे वोट के अधिकार की बात?
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की बिहार में यात्रा अब 17 अगस्त को सासाराम से शुरू होगी। सासाराम रोहतास जिले में है। हालांकि इस यात्रा का नाम पूर्ववत ‘वोट अधिकार यात्रा’ ही रहेगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। फिलहाल तो बिहार के विधानसभा चुनावों के लिए माहौल बनाना ही इसका उद्देश्य समझ में आ रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस यात्रा में पहले दिन ही शामिल होंगे। कई चरणों में होने वाली इस यात्रा में इंडिया गठबंधन के नेता भी शामिल होंगे। राहुल गांधी यदि मतदाताओं के अधिकारों के मुद्दे को लेकर यह यात्रा करेंगे तो क्या तेजस्वी यादव भी उसमें शामिल होंगे? यह एक सवाल है, जिसका उत्तर कांग्रेस को ढूंढना होगा।







