नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। यह क्षेत्र अपने राजनीतिक इतिहास, सामाजिक संरचना और आगामी चुनाव के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ मैं 2025 के विधानसभा चुनाव को लेकर विस्तृत जानकारी दे रहा हूँ:
- नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र का परिचय:
- स्थान: बिहार, पश्चिम चंपारण जिला।
- अंतर्गत: यह क्षेत्र नरकटियागंज प्रखंड के अंतर्गत आता है।
- क्षेत्र का स्वरूप: मिश्रित सामाजिक और आर्थिक संरचना, जिसमें कृषि, वाणिज्यिक गतिविधियाँ और सामाजिक विविधता शामिल हैं।
- राजनीतिक पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ:
- नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र का इतिहास विविध दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का रहा है।
- यहाँ अक्सर प्रमुख राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल जैसे जनता दल (यू), भाजपा, राजद, कांग्रेस, और वामपंथी पार्टियों का प्रभाव रहता है।
- चुनावों में सामाजिक और आर्थिक मुद्दे अहम भूमिका निभाते हैं।
- आगामी विधानसभा चुनाव 2025:
चुनावी माहौल और प्रमुख मुद्दे:
- आर्थिक विकास: बेरोजगारी, स्वरोजगार, और औद्योगिक विकास।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार।
- बुनियादी सुविधाएँ: सड़क, बिजली, पानी, और स्वच्छता।
- सामाजिक मुद्दे: जाति, धर्म, सामाजिक न्याय और पिछड़ों का उत्थान।
- कृषि और किसान: फसल लागत, फसल बीमा, सिंचाई सुविधाएँ।
- सामाजिक स्थिरता: सामाजिक सद्भाव और सुरक्षा।
प्रमुख प्रत्याशी और राजनीतिक दल:
- इस समय के प्रत्याशियों की अभी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन प्रमुख दल अपने उम्मीदवार नामांकन की तैयारी कर रहे हैं।
- दलों के एजेंडे में विकास, सामाजिक न्याय, और जनता से जुड़े मुद्दे प्रमुख होंगे।
- चुनाव प्रक्रिया और रणनीतियाँ:
- मतदाता वर्ग: लगभग 2-3 लाख मतदाता, जिसमें महिलाओं का प्रतिशत उच्च है।
- डिजिटल वोटिंग: सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार का बढ़ता प्रभाव।
- स्थानीय मुद्दों पर फोकस: सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और सामाजिक मुद्दे।
- सामाजिक गठबंधन: जाति और समुदाय आधारित गठबंधन महत्वपूर्ण होंगे।
- वर्तमान और आगामी चुनौतियाँ:
- कोविड-19 के बाद का पुनर्विकास।
- आधुनिक बुनियादी सुविधाओं का अभाव।
- शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार की आवश्यकता।
- आर्थिक विकास के अवसर।
- सामाजिक समरसता और सुरक्षा।
- विकास योजनाएँ और सरकार की प्राथमिकताएँ:
- सड़क और संचार: नई सड़कें और बेहतर संपर्क व्यवस्था।
- स्वास्थ्य: अस्पतालों का आधुनिकीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार।
- शिक्षा: विद्यालयों और कॉलेजों का निर्माण और छात्रवृत्ति योजनाएँ।
- कृषि: सिंचाई, बीज और फसल बीमा योजनाएँ।
- सामाजिक योजना: पिछड़े वर्गों और महिलाओं का उत्थान।
भौगोलिक एवं जनसांख्यिकीय जानकारी
- नरकटियागंज शहर पटना से लगभग 280 किमी उत्तर-पश्चिम और प्रमुख व्यापारिक-प्रशासनिक केंद्र है, रेल एवं सड़क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। इसमें नरकटियागंज जंक्शन एक महत्वपूर्ण स्टेशन है।
- 2011 की जनगणना अनुसार, नगर की आबादी लगभग 49,500 थी; 2025 में अनुमानित आबादी 69,000 है। SC 10.15%, ST ~0.67%। हिन्दू आबादी 78.5%, मुस्लिम 20.8%, बाकी अन्य धर्म। (लिंग दर: महिलाओं की अनुपात जिला औसत से कम).
- विधानसभा क्षेत्र की कुल आबादी लगभग 4,06,968, जिसमें ग्रामीण 87.84%, शहरी 12.16% शामिल हैं। मुस्लिम मतदाता 30%, SC 15%, ST 1.5% हैं।
चुनावी इतिहास & विधायकों की सूची
| वर्ष | विधायक | पार्टी | विजयी मार्जिन |
| 2010 | Satish Chandra Dubey | BJP | 20,228 वोट (राकल्प INC) |
| 2014 (उपचुनाव) | Rashmi Varma | BJP | 15,742 वोट (राकल्प INC) |
| 2015 | Vinay Varma | Congress | 16,061 वोट (राकल्प BJP) |
| 2020 | Rashmi Varma | BJP | 21,134 वोट (राकल्प INC) |
- सतीश चंद्र दुबे ने 2010 में पहली जीत दर्ज की। 2014 की उपचुनाव में BJP ने फिर जीत दर्ज की लेकिन 2015 में कांग्रेस ने वापसी की। 2020 में भाजपा की रश्मि वर्मा ने सीट वापस जीती।
र्तमान विधायक: रश्मि वर्मा (BJP)
- रश्मि वर्मा ने 2014 में भाजपा की ओर से उपचुनाव जीता था। 2015 में टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा लेकिन तीसरे स्थान पर रहीं। 2020 में उन्हें BJP ने फिर टिकट दिया और उन्होंने कांग्रेस के विनय वर्मा को लगभग 21,134 वोटों से पराजित कर जीत हासिल की।
- रश्मि वर्मा ने पहले नरकटियागंज नगर परिषद की भी मेयर के रूप में कार्य किया है। उन्हें धमकी भी मिली थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करवाया।
मुख्य राजनीतिक दल और गठबंधन
राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय प्रमुख पक्ष:
- NDA (BJP, JD(U), LJP‑राम विलास): वर्तमान सरकार और Chief Minister: Nitish Kumar को आगे बढ़ाने की रणनीति ।
- महागठबंधन / INDIA ब्लॉक (RJD, Congress, Left, VIP आदि): Tejashwi Yadav महागठबंधन से मुख्यमंत्रित्व उम्मीदवारी घोषित कर चुके हैं; गठबंधन में सीट बंटवारे पर असमंजस बना हुआ है ।
नए खिलाड़ियों की भूमिका:
- जन सुराज पार्टी (Prashant Kishor): अक्टूबर 2024 में बनी, अब सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी ।
- Aap Sabki Awaz (AASA): नवंबर 2024 में बनी पार्टी, मई 2025 में जन सुराज पार्टी में विलय हो गया ।
- तेज प्रताप यादव: निर्दलीय उम्मीदवारीय घोषणा की है, ‘टीम तेज प्रताप’ नाम से चुनावी अभियान शुरू किया है ।
🔧 प्रमुख मुद्दे एवं चुनावी घटनाएँ
VOTER सूची विवाद (SIR):
- विपक्ष दलों ने इसे दलित, मुसलमान और गरीब समुदायों की मतदाता सूची से निकासी का प्रयास बताया है ।
- कांग्रेस और INDIA ब्लॉक ने राज्यव्यापी यात्रा (यात्रा) शुरू की है ताकि इस मुद्दे को जन-जन तक पहुँचाया जा सके ।
- सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर व्यापक वाद-विवाद पाए जाते हैं तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगा ।
संगठनात्मक एवं रणनीतिक गतिविधियाँ:
- Tejashwi Yadav ने चुनाव बहिष्कार (boycott) विकल्प भी ऊपर रखा है, उन्होंने SIR को ‘धोखाधड़ी’ करार दिया है ।
- RJD में लालू यादव की नई टीम का गठन हुआ है जिसमें कांति सिंह को महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष व फातमी को जिम्मेदारी दी गई है; तेजस्वी को महागठबंधन का CM उम्मीदवार बनाया गया है ।
- VIP की वजह से सीट बंटवारे में असहमति, VIP प्रमुख मुकेश सहनी को झटका, तेजस्वी के सामने गठबंधन बहस बड़ी चुनौती बन गई है ।
अन्य घटनाएँ:
- ‘Dog Babu’ नाम से बनावटी रेसिडेंस सर्टिफिकेट का मामला सामने आया—प्रशासन इसका संभावित राजनीतिक साजिश मान रहा है ।
- जून 2025 में मुलायम/वरिष्ठ मतदाताओं, गर्भवती महिलाओं व प्रवासी श्रमिकों के लिए मोबाइल ई‑वोटिंग का प्रयोग बिहार ने सफलतापूर्वक लागू किया है, जिसमें लगभग 70% मतदान हुआ ।
📊 पूर्व सर्वे और जनमत रुझान
- ABP News‑C Voter सर्वेक्षण (8 जून 2025) के अनुसार महागठबंधन (MGB) को लगभग 44.2 % वोट, NDA को लगभग 42.8 % वोट मिला है—ये मत प्रतिशत 2020 की तुलना में बेहतर तरीके से विभाजित हैं ।
- 2024 लोकसभा चुनावों में NDA को ~47 %, MGB को ~39 % वोट मिले थे, इसलिए मौजूदा स्थिति से संकेत मिलता है कि महागठबंधन को झटके की संभावना है ।
निष्कर्ष और आगामी रूझान
- चुनाव अक्टूबर–नवंबर 2025 में होने संभावना है, EC की घोषणा सितंबर-अक्तूबर में हो सकती है ।
- NDA और महागठबंधन के बीच मुकाबला गहरा होने की संभावना है, लेकिन जन सुराज पार्टी जैसे नए विकल्प भी प्रभाव डाल सकते हैं।
- मतदाता सूची विवाद (SIR) सबसे संवेदनशील मुद्दा है— न्यायपालिका की नजर, विपक्ष की यात्रा (yatra) और सोशल मीडिया इसे सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ सबसे प्रमुख हथियार बना सकते हैं।







