प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 जुलाई को होने वाली मोतिहारी यात्रा को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने इस ऐतिहासिक जनसभा की तैयारियों में जोर-शोर से जुट गए हैं. प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल लगातार कैंप कर रहे हैं, जबकि NDA के घटक दलों के नेता भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सक्रिय हैं. इस बीच बिहार सरकार के मंत्री नितिन नवीन के एक दावे ने महागठबंधन की टेंशन बढ़ा दी है. दरअसल, उनका दावा है कि पीएम के दौरे के बाद राज्य की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है. उनका कहना है कि महागठबंधन के कुछ सहयोगी दलों के NDA की ओर रुख करने की संभावना है जिससे विपक्षी गठबंधन परेशान है.
बता दें कि मोतिहारी में आयोजित होने वाली पीएम मोदी की इस जनसभा को 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले NDA की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है. बीजेपी नेता जायसवाल ने कार्यकर्ताओं को उत्साहित करते हुए कहा कि यह सभा बिहार में विकास और एकजुटता का संदेश देगी. इस दौरान पीएम मोदी 7196 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे, जिसमें रेल, सड़क और आईटी परियोजनाएं शामिल हैं. इसके साथ ही, तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का उद्घाटन भी होगा. वहीं, NDA ने दावा किया है कि पीएम के दौरे से महागठबंधन में फूट पड़ सकती है, क्योंकि कुछ घटक दलों में असंतोष बढ़ रहा है. मंत्री नितिन नवीन ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में कुछ बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं जो NDA की स्थिति को और मजबूत करेंगे.
महागठबंधन में हिस्सेदारी का सवाल करेगी खेल!
वहीं, महागठबंधन के नेता इस दावे को खारिज कर रहे हैं और इसे चुनावी स्टंट बता रहे हैं. RJD और कांग्रेस के प्रवक्ताओं का कहना है कि NDA अपने जनाधार को बढ़ाने के लिए ऐसी कयासबाजी कर रही है. हालांकि, राजनीति के जानकारों का मानना है कि बिहार में जातीय समीकरण और विकास के मुद्दों पर NDA की बढ़त को देखते हुए कुछ छोटे दलों में NDA की ओर झुकाव संभव है. खासकर वे क्षेत्रीय दल जो महागठबंधन में अपनी हिस्सेदारी को लेकर नाखुश हैं, दबाव में आ सकती है.
पीएम मोदी के दौरे का फोकस विकास परियोजनाओं और ‘डबल इंजन सरकार’ के मॉडल के फायदे को बताना होगा. पीएम मोदी की इस सभा में करीब 3 लाख लोगों के जुटने की संभावना जताई गई है. दूसरी ओर महागठबंधन इसे चुनौती के रूप में ले रहा है और अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटा है. क्या यह दौरा वाकई बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव लाएगा या यह महज एक चुनावी हथकंडा साबित होगा, इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ होगा.







