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पटना के चौक-चौराहों पर लगे पोस्टर – बिहार में गुंडा राज, कारोबारियों पर कहर

UB India News by UB India News
July 15, 2025
in पटना, बिहार
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पटना के चौक-चौराहों पर लगे पोस्टर – बिहार में गुंडा राज, कारोबारियों पर कहर
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बिहार में हर रोज अपराध के नए मामले सामने आ रहे हैं। इस बीच पटना के चौक चौराहों पर गुंडा राज के पोस्टर लगाए गए हैं, जिसमें कारोबारियों पर कहर का जिक्र है। इसमें गोपाल खेमका हत्या कांड से लेकर अन्य व्यापारियों और कारोबारियों के साथ हुई हत्या की जानकारी दी गई है।

इस पोस्टर में पीएम मोदी, सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की फोटो पोस्टर के बीचों बीच लगाई गई है और उसके चारों तरफ बिहार में हाल में हुए 8 हत्याकांडों का तारीख के साथ जिक्र किया गया है।

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गोपाल खेमका हत्याकांड का जिक्र

सबसे पहले मशहूर उद्योगपति गोपाल खेमका का नाम इस पोस्टर में लिखा हुआ है। इसके नीचे जानकारी दी गई कि पटना में 4 जुलाई को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। फिर मक्का कारोबारी दीपक शाह के बारे में बताया गया है जिनकी हत्या 10 जुलाई को मुजफ्फरपुर में की गई। उसके नीचे तृष्णा मार्ट के मालिक विक्रम झा के बारे में बताया गया है जिनकी रामकृष्णा नगर में 13 जुलाई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

नर्स से लेकर वकील की हत्या को भी पोस्टर में बताया गया

वहीं, मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा की नर्स की हत्या की बात भी पोस्टर में लिखी गई है, जिसका 11 जुलाई को मर्डर हुआ था। वह PMCH की नर्स थी। इसके अलावा शिक्षक संतोष राय के हत्या की बात भी लिखी है, जिसे 13 जुलाई को छपरा में गोली मारा गया था। बालू कारोबारी रमाकांत यादव जिसे घर के बाहर गोली मारी गई, कारोबारी पुट्टू खान जिसे सर पर गोली मारी गई और वकील जितेंद्र मेहता, जिसकी 13 जुलाई को गोली मारकर हत्या कर दी गई, उसका भी जिक्र है।

पटना की दीवारों पर छिड़ा पोस्टर वार

पटना की दीवारें इन दिनों कुछ कह रही हैं. कभी रंग-बिरंगे नारों में लिपटी उम्मीदें तो कभी तीखे आरोपों की परछाइयां. जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजधानी की हर गली एक राजनीतिक अखाड़ा बनती जा रही है. पोस्टरों और दीवार लेखन के जरिए सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी महागठबंधन के बीच शब्दों की जंग तेज हो चुकी है. चुनावी समर की पहली गूंज अब दीवारों पर साफ सुनाई देने लगी है.

पोस्टर राजनीतिक अखाड़ा: पटना की गलियों, चौक-चौराहों और बाजारों में इन दिनों एक खास राजनीतिक माहौल बनता दिख रहा है। हाल के हफ्तों में शहर की दीवारों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साझा पोस्टर लगातार नजर आने लगे हैं. जदयू द्वारा लगाए जा रहे इन पोस्टरों के माध्यम से एनडीए गठबंधन अपने ‘विकास मॉडल’ को जनता के सामने मजबूती से पेश करने की कोशिश कर रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश की पोस्टर: इन पोस्टरों में नीतीश कुमार की छवि एक अनुभवी और विकासशील नेता के रूप में उभरती है, जिन्होंने सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बीते वर्षों में कई योजनाएं शुरू की. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी इन पोस्टरों को राष्ट्रीय स्तर की ताकत देती है, जहां केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और पीएम आवास योजना को राज्य के विकास के साथ जोड़ा जा रहा है.

पोस्टर से एकजुटता का संदेश: एनडीए की यह रणनीति साफ संकेत देती है कि वह बिहार में ‘डबल इंजन सरकार’ की छवि को आगे बढ़ाना चाहता है. पोस्टरों के जरिए गठबंधन यह संदेश देना चाहता है कि राज्य और केंद्र की एकजुट ताकत से ही बिहार की प्रगति संभव है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दीवारों पर चिपके ये राजनीतिक संदेश जनता के दिलों तक कितनी गहराई से पहुंचते हैं.

पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार की पोस्टर
पोस्टर का जवाब पोस्टर से: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साझा पोस्टरों के जवाब में अब तेजस्वी यादव के पोस्टर भी पटना की दीवारों पर नजर आने लगे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन पोस्टरों में न तो उनके पिता लालू प्रसाद यादव की तस्वीर है और न ही महागठबंधन के किसी अन्य सहयोगी दल कांग्रेस या वाम दलों के नेताओं की मौजूदगी.

तेजस्वी यादव ही चुनावी चेहरा: आरजेडी द्वारा लगाए गए इन पोस्टरों में तेजस्वी यादव को ही चुनावी चेहरा के रूप में प्रस्तुत किया गया है. उनके अकेले मौजूद होने से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार कौन होंगे, यह अब किसी औपचारिक घोषणा की मोहताज नहीं रही.

तेजस्वी सशक्त चेहरा: हालांकि महागठबंधन में कई दल शामिल हैं, लेकिन पोस्टर वार में फिलहाल तेजस्वी ही फ्रंटफुट पर दिख रहे हैं. इससे आरजेडी की रणनीति स्पष्ट है. युवा नेतृत्व, बदलाव की उम्मीद और एक सशक्त चेहरे के रूप में तेजस्वी यादव की छवि को जनता के सामने पेश करना। चुनावी रणभूमि में अब पोस्टर सिर्फ प्रचार का जरिया नहीं, बल्कि नेतृत्व की दावेदारी और ताकत दिखाने का माध्यम बन चुके हैं.

पटना के दिवारों पर तेजस्वी यादव की तस्वीर
राजद के पोस्टर में तेजस्वी की झलक: राजद के तरफ से लगाए गए पोस्ट में तेजस्वी यादव की तस्वीर के साथ बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को उठाया गया है. एक पोस्टर पर लिखा है बिहार मांगे रोजगार, तेजस्वी देगा अधिकार. दूसरे पर है 10 लाख सरकारी नौकरी सिर्फ तेजस्वी की गारंटी. तेजस्वी के पुराने वादों को फिर से दोहराया गया है, लेकिन इस बार गठबंधन की एकता को दिखाने के बजाय व्यक्तिगत नेतृत्व को आगे बढ़ाया गया है.

एनडीए को भरोसा नीतीश-मोदी पर: वरिष्ठ पत्रकार कौशलेंद्र प्रियदर्शी का मानना है कि एनडीए की ओर से लगाए गए पोस्टरों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साझा तस्वीर लगाई गई है. विकास और विश्वास की डबल इंजन सरकार जैसा नारा दीवारों पर छाया हुआ है. एनडीए को उम्मीद है कि नीतीश की प्रशासनिक पकड़ और मोदी की लोकप्रियता उन्हें वोट दिलाने में मदद करेगी.

पटना में पोस्टर वार
“यह एनडीए की जानी-पहचानी रणनीति है. मोदी को राष्ट्रीय चेहरा और नीतीश को क्षेत्रीय भरोसेमंद चेहरा बनाकर पेश करना. पिछले चुनावों 2019, 2020 एवं 2024 में भी यही मॉडल उन्हें सफलता दिला चुका है. इसके जवाब में तेजस्वी व्यक्तिगत करिश्मा और सामाजिक न्याय के मुद्दों को केंद्र में लाकर 2025 के चुनाव की तैयारी में लगे हुए हैं.” -कौशलेंद्र प्रियदर्शी, वरिष्ठ पत्रकार

तेजस्वी के पोस्ट पर राजद की सफाई: राजद के द्वारा केवल तेजस्वी यादव के नाम के पोस्टर लगाए जाने पर राजद प्रवक्ता एजाज अहमद का कहना है कि राष्ट्रीय जनता दल का यह पोस्ट है इंडिया महागठबंधन के पोस्टर में सभी नेताओं को जगह दी जाती है. इंडिया गठबंधन की एकता का परिचय 9 जुलाई को बिहार बंद के दौरान दिखाई दिया जिसमें गठबंधन के सभी बड़े नेता एक मंच पर दिखाई दिए. पोस्टर के जरिए इंडिया गठबंधन के बीच मनमुटाव की बात को बिहार की जनता मानने के लिए तैयार नहीं है.

तेजस्वी यादव की तस्वीर से पटा पटना
“उस पोस्ट में नरेंद्र मोदी सामने हैं और नीतीश कुमार ने नेपथ्य में खड़े हैं वह साफ दिखाई दे रहा है. एनडीए के लोग जो पांच पांडवों की बात कर रहे थे उसमें से चिराग पासवान, जीतन राम मांझी एवं उपेंद्र कुशवाहा कहां है. यह दिखाई नहीं दे रहे. इन तीनों लोगों के पोस्टर मैं चेहरा नहीं होने का साफ मतलब है कि एनडीए के लोग इन तीनों को पिछलगू बनाकर रखना चाहते हैं.” -एजाज अहमद, प्रवक्ता, आरजेडी

जदयू का जवाब: जदयू के विधान पार्षद और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि राजद के द्वारा लगाए गए बैनर पोस्टर में राहुल गांधी क्यों गायब हैं. राहुल गांधी की तस्वीर लगाने में आरजेडी को क्यों शर्म लग रही है. आंगनबाड़ी सेविका का बेटा जो जेएनयू में पढ़ा है कन्हैया कुमार की तस्वीर क्यों नहीं पोस्टर में लगाई गई है.

तेजस्वी यादव
पोस्टर से कोई फायदा नहीं: नीरज कुमार ने राजद के द्वारा लगाए जा रहे हैं पोस्ट पर तंज करते हुए कहा है कि कांग्रेस ने राजेश राम को बिहार प्रदेश का अध्यक्ष बनाया है तो क्या राजेश राम दलित है तो उनके पोस्टर आरजेडी नहीं लगाएगी दलित का अपमान करेंगे. दीपांकर भट्टाचार्य जो राजनीति के इतने अनुभव है उनका चेहरा पोस्टर में नहीं दिखाई दे रहा. जहां तक एकता की बात है तो 9 तारीख को राहुल गांधी के गाड़ी पर सीपीएम के नेता को चढ़ाने तक नहीं दिया गया. यह वामपंथी घटक का अपमान है.

“पोस्टर लगाने से राजत को कोई फायदा नहीं होने वाला है. 2005 से लालू प्रसाद यादव लगातार पोस्टर लगाते रहे हैं, लेकिन राजनीति में उनको जनता ने कई बार राजनीतिक झटका देने का काम किया है. जब पिताजी परेशान रहे तो बेटा तो नवमी भी पास नहीं.” -नीरज कुमार, विधान पार्षद जदयू

तेजस्वी यादव
कांग्रेस की सफाई: राजद के द्वारा लगाए जा रहे पोस्टर से इंडिया गठबंधन के किसी भी नेताओं के चेहरे को नहीं शामिल किए जाने पर कांग्रेस के प्रवक्ता राजेश राठौर का कहना है कि इंडिया गठबंधन के पोस्ट पर गठबंधन के सभी नेताओं की तस्वीर है. जहां तक तेजस्वी यादव का सवाल है तो तेजस्वी यादव इंडिया गठबंधन के बिहार के कोऑर्डिनेटर हैं और 2020 में उन्हीं की नेतृत्व में विधानसभा का चुनाव लड़ा गया था.

“राजद के द्वारा लगाए गए पोस्टर के बारे में उनका जानकारी नहीं है, लेकिन इंडिया गठबंधन के पोस्ट पर बिना राहुल गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीर के बिना संभव नहीं है. बिहार में बिना तेजस्वी यादव की तस्वीर के संभव नहीं है.” -राजेश राठौर, प्रवक्ता कांग्रेस

तेजस्वी यादव
पोस्टर से माहौल बनाने की कोशिश: चुनाव प्रचार में पोस्टरों की भूमिका केवल सजावट तक सीमित नहीं होती. दीवारों पर लगे पोस्टर लोगों के बीच राजनीतिक धारणा बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं. गांवों-कस्बों में तो अब भी दीवार लेखन और पोस्टर पहली सूचना की तरह काम करते हैं.
“बिहार की राजनीति में पोस्टर का इतिहास भी काफी पुराना है. 2015 के चुनाव में ‘बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है’ जैसे पोस्टरों ने बड़ा असर डाला था. उसी तर्ज पर अब फिर से पोस्टरों से जनभावना को मोड़ा जा रहा है.” -रवि उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार

पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार
2025 की लड़ाई: इस बार का चुनाव पोस्टर में भी साफ कर रहा है कि यह लड़ाई किस दिशा में जाएगी. एक तरफ नीतीश-मोदी की डबल इंजन सरकार का चेहरा है, दूसरी ओर इंडिया गठबंधन है, लेकिन चेहरा तेजस्वी यादव ही दिख रहे हैं.

“पोस्टर भले दीवार पर लगे हैं, लेकिन अभी से तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट करने की कवायद शुरू हो गई है. हालांकि गठबंधन की एकजुटता और जमीनी संगठन की मजबूती जैसी बातें पोस्टर नहीं बताते लेकिन चुनाव की हवा किस दिशा में बह रही है. इसकी शुरुआती तस्वीर इन दीवारों पर साफ झलकने लगी है.

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