बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर सियासी तूफान मचा हुआ है. इस बीच तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव ने नीतीश सरकार पर ‘अपराधों की बाढ़’ और ‘जंगलराज 2.0’ का आरोप लगाकर हमला तेज कर दिया है. दरअसल, बिहार में लगातार हत्याओं की बढ़ती घटनाएं और नीतीश की कथित अस्वस्थता ने उनके सुशासन की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया है. क्या यह स्थिति तेजस्वी के हमलों को लालू के जंगलराज की चर्चा से आगे ले जाएगी और नीतीश की राजनीति के लिए भारी पड़ेगी? बता दें कि नीतीश कुमार की जनता के बीच उपस्थिति और स्वास्थ्य संबंधी अटकलें उनकी विश्वसनीयता को कमजोर कर रही हैं. प्रशांत किशोर ने भी नीतीश की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाए हैं.
दूसरी ओर तेजस्वी यादव लगातार एक अलग नैरेटिव सेट करने की कोशिश में हैं. वह लगातार नीतीश सरकार के इस शासन काल को ‘जंगलराज’ कह रहे हैं और लगातार आंकड़ों से हमला बोल रहे हैं. बीते 1 जून से 13 जुलाई 2025 तक 35 से अधिक हत्याओं ने नीतीश कुमार की सुशासन छवि को धक्का पहुंचाया है. तेजस्वी यादव ने हाल में ही NCRB डेटा का हवाला देते हुए दावा किया है नीतीश के 20 साल के शासन में 60,000 हत्याएं और 25,000 बलात्कार हुए. यह आंकड़ा लालू-राबड़ी के शासन (1990-2005) के दौरान दर्ज 1,15,216 अपराधों से तुलना में अधिक है, क्योंकि नीतीश के कार्यकाल में 2019 तक अपराध 2,69,096 तक पहुंच गए. राजनीतिक के जानकारों की नजर में तेजस्वी का ‘जंगलराज 2.0’ का नैरेटिव इस तुलना को पलटने की कोशिश है जो लालू यादव के जंगलराज की छवि को कमजोर कर वर्तमान हालात को नीतीश कुमार की नाकामी के आरोपों से जोड़ रहा है.
लालू-तेजस्वी का ‘जंगलराज 2.0’ नैरेटिव
लालू यादव ने भी नीतीश कुमार और BJP पर हमला बोला और दावा किया कि “नीतीश ने कानून-व्यवस्था का अंतिम संस्कार कर दिया”. उनकी सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें नीतीश और PM मोदी को “गुंडा राज” का प्रतीक बताया गया.जाहिर है इससे जंगलराज 2.O के नैरेटिव को और हवा दी. हालांकि, नीतीश कुमार का दावा है कि उनके शासन में अपराधियों पर सख्ती और विकास कार्य लगातार हो रहे हैं. 8 लाख नौकरियां, 12 लाख रोजगार का लक्ष्य पूरा करना उनकी उपलब्धियां हैं. हालांकि, जानकार कहते हैं कि तमाम दावों के बाद भी हाल की आपराधिक घटनाएं उनकी सुशासन बाबू की छवि पर सवाल उठा रही हैं.
खास बात यह है कि पार्टी और परिवार से बेदखल तेज प्रताप यादव भी अब तेजस्वी यादव के इस नैरेटिव में साथ आ गए हैं और नीतीश कुमार सरकार पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और अपराधियों का मनोबल दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. पटना में मीडिया से बातचीत में तेज प्रताप ने कहा, नीतीश कुमार अब पूरी तरह से अक्षम हो चुके हैं. वे सरकार नहीं चला पा रहे हैं और प्रशासनिक नियंत्रण उनके हाथ से निकल चुका है. राज्य में अपराधी बेखौफ होकर घूम रहे हैं और हर दिन नई वारदातें सामने आ रही हैं. तेज प्रताप यादव ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार सरकार और प्रशासन की मिलीभगत से ही अपराधी इतने निडर हो गए हैं. उन्होंने कहा, सरकार पूरी तरह से अपराधियों के कब्जे में है. न तो पुलिस कार्रवाई करती है और न ही आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है. जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है.तेज प्रताप ने दावा किया कि इस तरह की अराजक स्थिति लंबे समय तक नहीं चलेगी और आगामी विधानसभा चुनावों के बाद यह सरकार गिर जाएगी.
बिहार में बढ़ते अपराध का साया और सवाल
जाहिर है नीतीश सरकार को नाकाम बताने को लेकर तेजस्वी यादव का प्रहार प्रभावी भी दिख रहा है, क्योंकि वह युवा और आक्रामक छवि के साथ नीतीश की कमजोरियों को उजागर कर रहे हैं. हर दिन वह सोशल मीडिया में पोस्ट करते हैं कि आज बिहार में कितनी आपराधिक घटनाएं घटीं.हालांकि, तेजस्वी यादव पूरा दम लगा रहे हैं, लेकिन उनके साथ बड़ा ‘दाग’ जो लगा है वह भी कम असरकारक नहीं है जो एनडीए के लिए फायदेमंद साबित होता है. लालू के जंगलराज की छवि चारा घोटाले और 15 साल के कुशासन से जुड़ी है और यह अभी भी RJD के लिए बोझ है. तेजस्वी यादव की रणनीति अगर अपराध के मुद्दे को नीतीश से जोड़कर जनता का गुस्सा भड़काती है तो यह लालू के इतिहास को पीछे छोड़ सकता है. मगर, नीतीश के कोर वोटर (महिलाएं, अति पिछड़े वर्ग के मतदाता) और सवर्ण मतदाताओं के साथ के अतिरिक्त एनडीए की सांगठनिक शक्ति इसे चुनौती देगी.
NDA का मजबूत वोट आधार बड़ी चुनौती
राजनीति के जानकार कहते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्वास्थ्य स्थिति और अपराध की बढ़ती घटनाएं उनकी साख को कमजोर कर रही हैं और तेजस्वी का “जंगलराज 2.0” का नैरेटिव लालू के इतिहास को पछाड़ने की क्षमता रखता है. लेकिन, बिहार की जातिगत और गठबंधन राजनीति में NDA की मजबूत स्थिति और नीतीश का विकास रिकॉर्ड तेजस्वी के प्रहार के प्रभाव को सीमित कर सकता है. ऐसे में यही कहा जा सकता है कि यह सियासी जंग अब जनता के मूड और चुनावी रणनीति पर निर्भर करेगी. अब इंतजार कीजिये बिहार विधानसभा चुनाव का जब जनता अपना फैसला सुनाएगी.