शहर के वेलकम इलाके में ईदगाह के निकट शनिवार की सुबह एक चार मंजिला इमारत ढहने की खबर आई। जनता कॉलोनी की इस इमारत के ढहने से कई लोग दब गए। इस दौरान राहत और बचाव की टीम ने मौके पर पहुंच कर लोगों को मलबे से निकाला। लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि दिल्ली में कोई मकान या इमारत ढही हो। राजधानी में पिछले कुछ महीनों में मुस्तफाबाद, करोल बाग, आजाद पुर से लेकर बिहारी कॉलोनी, शाहदरा में एक के बाद एक घर से लेकर इमारते ढहनें और जर्जर होने की खबरें आई हैं। आखिर क्या वजह है कि दिल्ली में इस तरह हादसे हो रहे हैं। हादसों में लोगों की जान जा रही है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
पुरानी और जर्जर इमारतें
दिल्ली में कई इमारतें दशकों पुरानी हैं। ऐसे में इनका रखरखाव ठीक नहीं हुआ है। बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से ये जर्जर संरचनाएं कमजोर होकर ढह जाती हैं। उदाहरण के लिए, करोल बाग और नबी करीम में हाल की घटनाओं में पुरानी इमारतों के ढहने की बात सामने आई है।
निर्माण में खामियां
कुछ मामलों में, निर्माण के दौरान मानकों का पालन न करना या लो क्वालिटी का सामान का यूज इमारतों को कमजोर करता है। आजाद मार्केट और सीलमपुर की घटनाओं में प्रारंभिक जांच में निर्माण दोष को संभावित कारण बताया गया है।
प्रशासनिक लापरवाही
राजदानी में कई जर्जर इमारतों को पहले ही खतरनाक घोषित किया गया है। ऐसे में इन इमारतों को लेकर समय पर कार्रवाई न होने से हादसे हो रहे हैं। दिल्ली में भी ऐसी शिकायतें सामने आई हैं।
अवैध निर्माण
राजधानी के कुछ इलाकों में अवैध निर्माण या नालों को पाटकर बनाए गए मकान हादसों का कारण बन रहे हैं। यह समस्या विशेष रूप से अनधिकृत कॉलोनियों में देखी गई है। मकानों के असमय और अचानक ढहने के लिए पीछे अवैध निर्माण भी एक प्रमुख वजह के रूप में सामने आया है।
इमारतों के आसपास बड़े निर्माण कार्य
इसके अलावा इमारतों के आसपास चल रहे निर्माण कार्य की वजह से भी मकानों को गिरने की बात सामने आई है। हालांकि, आधिकारिक रूप से इनको लेकर कुछ नहीं कहा गया है। मेट्रो और अन्य बड़े निर्माण कार्यों के कारण होने वाली खुदाई से आसपास की इमारतों की नींव कमजोर हो सकती है। आजाद मार्केट में मेट्रो निर्माण के दौरान एक इमारत के ढहने की घटना इसका उदाहरण है।
दिल्ली में हाल ही में हुए कुछ हादसे
अप्रैल 2025 : मुस्तफाबाद (दयालपुर) में एक चार मंजिला इमारत ढहने से 11 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें एक ही परिवार के 8 सदस्य शामिल थे। स्थानीय लोगों का कहना था कि बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर मीट की दुकान के लिए निर्माण कार्य चल रहा था। इस वजह से स्ट्रक्चर कमजोर हुई। यह बिल्डिंग 20 साल पुरानी थी।
मई 2025 : बिहारी कॉलोनी में एक चार मंजिला इमारत एक तरफ झुक गई थी। इसके बाद बिल्डिंग को खाली कराया गया। इमारत में अवैध रूप से चौथी मंजिल बनाई गई थी। यह करीब 13 साल पुरानी थी। इसे बाद में ढहाने का निर्णय लिया गया।
जुलाई 2025 : आजादपुर मार्केट में पुल मिठाई के पास एक इमारत आधी रात को ढह गई, जिसमें एक व्यक्ति (मनोज शर्मा) की मौत हुई। घटना के समय पास में ही मेट्रो निर्माण कार्य चल रहा था।
भूकंपीय गतिविधियां
दिल्ली भूकंपीय जोन IV में आती है, जहां हल्के भूकंप आम हैं। हालांकि जुलाई 2025 में आए भूकंप से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन बार-बार होने वाले झटके पुरानी इमारतों को और कमजोर कर सकते हैं।
कैसे रुकेंगे हादसे?
दिल्ली में मकानों और बिल्डिंग्स के गिरने जैसे हादसों का मुख्य कारण पुरानी इमारतों का रखरखाव न होना, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां, निर्माण में दोष और प्रशासनिक लापरवाही हैं। इनसे बचने के लिए इमारतों का नियमित निरीक्षण, निर्माण मानकों का कड़ाई से पालन और समय पर जर्जर भवनों को गिराए जाने की जरूरत है। साथ ही, भूकंप-रोधी डिजाइन और बेहतर शहरी नियोजन पर ध्यान देना होगा।







