कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर इन दिनों विदेशों में भारत की आतंकवाद पर सख्त नीति को लेकर तारीफ कर रहे हैं. लेकिन उनकी यह खुलकर सराहना कांग्रेस पार्टी के भीतर विवाद का कारण बन गई है. वजह है– पाकिस्तान में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर थरूर की टिप्पणी. जिसमें उन्होंने इसे ‘सटीक और सोच-समझकर किया गया सैन्य कदम’ बताया. थरूर फिलहाल ब्राजील, पनामा और कोलंबिया जैसे देशों के दौरे पर हैं. वह उन सात भारतीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक का नेतृत्व कर रहे हैं, जिन्हें आतंकवाद पर भारत के कड़े रुख को दुनिया के सामने रखने के लिए विदेश भेजा गया है.
हालांकि कांग्रेस ने इस प्रतिनिधिमंडल के लिए थरूर का नाम नहीं भेजा था, बल्कि आनंद शर्मा और गौरव गोगोई जैसे नेताओं का नाम दिया था. बावजूद इसके, सरकार ने थरूर को ही चुना. जब ब्राजील में पत्रकारों ने उनसे कांग्रेस की नाराजगी के बारे में पूछा, तो थरूर ने कहा कि ‘अभी हमारा फोकस मिशन पर है. आलोचना होती रहती है, लेकिन फिलहाल इस पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं है.’ न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए थरूर ने एक कदम आगे बढ़कर कहा कि ‘मैं सरकार में नहीं हूं, विपक्ष का हिस्सा हूं. फिर भी मैंने साफ लिखा कि अब वक्त है सोच-समझकर लेकिन सख्ती से जवाब देने का है. मुझे खुशी है कि भारत ने ऐसा ही किया.’
पनामा में उन्होंने आतंकवादियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ‘अब उन्हें भी यह एहसास हो गया है कि हर कार्रवाई की कीमत चुकानी पड़ेगी.’ थरूर की ये बातें कांग्रेस के कई नेताओं को रास नहीं आईं. जयराम रमेश ने इसे ‘सस्ती राजनीति’ करार दिया और कहा कि थरूर पार्टी लाइन का प्रतिनिधित्व नहीं करते. वहीं पवन खेड़ा ने थरूर की पुरानी किताब ‘द पैराडॉक्सिकल प्राइम मिनिस्टर’ से एक अंश सोशल मीडिया पर शेयर कर तंज कसा.
इस पर थरूर ने शांत लेकिन तीखा जवाब देते हुए लिखा, कि ‘आधी रात है, मुझे बोगोटा के लिए निकलना है… ट्रोल्स और आलोचक जो चाहें कहें, मुझे अपने असल काम करने हैं.’ शशि थरूर की इस चुप्पी और स्पष्ट राय ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को फिर उजागर कर दिया है. बड़ा सवाल यह है कि क्या थरूर की सोच पार्टी की नई दिशा का संकेत है या कांग्रेस में एक नई दरार खुल चुकी है?






