हैरानी की बात है कि कांग्रेस के नेता 33 देशों को सांसदों का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने से खुश नहीं हैं। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विदेशों में ऐसे प्रतिनिधिमंडल भेजकर कोई फायदा नहीं होने वाला है, ये मोदी सरकार की PR एक्सरसाइज है, सरकार पहलगाम नरसंहार से जुड़े असली सवालों के जबाव देने से बच रही है। लेकिन कांग्रेस के ही तमाम नेता राहुल गांधी और जयराम रमेश की इस लाइन से इत्तेफाक नहीं रखते। शशि थरूर, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी और सलमान खुर्शीद, ये सारे कांग्रेस के अनुभवी नेता हैं। प्रतिनिधमंडलों के साथ गये हैं। कांग्रेस के नेताओं को इस बात की कोई फिक्र नहीं है कि पाकिस्तान उनके बयानों का कैसे इस्तेमाल करेगा। एक और बयान बहादुर सामने आए। महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने 15-15 हजार रुपये के चीन मे बने ड्रोन भेजे और इन ड्रोन्स को मार गिराने के लिए हमने 15 -15 लाख रुपये की बेशकीमती मिसाइलें दागीं। विजय वडेट्टीवार ने कहा कि भारत पाकिस्तान और चीन की साजिश में फंस गया, अब सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने ऑपरेशन सिंदूर को एक “छिटपुट लड़ाई” करार दिया।
इन सारे बयानों को सुनने के बाद मानना है कि अच्छा होता मल्लिकार्जुन खरगे पाकिस्तान से पूछते कि तुम्हारे 100 आतंकवादी मारे गए, पर ये छिटपुट लड़ाई थी, ज्यादा चोट तो नहीं लगी? वो पाकिस्तान से पूछते कि आतंकवादियों के जनाजे में फौजी अफसर मातम मनाने गए थे, उनके ज्यादा आंसू तो खर्च नहीं हुए? कांग्रेस के महाराष्ट्र के नेता आसिम मुनीर से पूछते कि तुमने 800 ड्रोन भेजे, एक भी निशाने पर नहीं लगा, क्या इसमें ज्यादा खर्चा तो नहीं हो गया? एक बार ये भी पूछ लेते कि तुम्हारे 11 एयरबेस को इंडियन एयरफोर्स ने तबाह कर दिया, तुम्हारे कितने प्लेन गिरे, कितने का नुकसान हुआ? अच्छा तो ये होता कि ये नेता शहबाज शरीफ से पूछते कि जिन जनरल ने पाकिस्तान का इतना भारी नुकसान किया, करोड़ों रुपये की मिसाइल बर्बाद कर दीं, उसे तुमने फील्ड मार्शल किसके प्रेशर में आकर बनाया? क्या इसके लिए ट्रंप का फोन आया?
पाकिस्तान से एक बार पूछते कि तुम्हारे DGMO ने फोन करके युद्ध क्यों रुकवाया? सीजफायर क्यों करवाया? क्या तुम्हारे एटम बम भारत की missiles के range में तो नहीं आ गए थे? लेकिन कांग्रेस के नेता तो उल्टा हमारी सेना पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पूछ रहे हैं कि तुम्हारे कितने प्लेन गिरे? हमारी फौज से पूछ रहे हैं कि तुमने पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराने में लाखों की मिसाइलें क्यों चलाई? अब कोई पूछे कि क्या युद्ध के मैदान में फौज बही खाता लेकर जाती है? पैसे गिन-गिन कर हथियार चलाती है? अगर पाकिस्तान को हराने के लिए, आतंकवाद को खत्म करने के लिए करोड़ों भी खर्च करने पड़े तो इस देश में किसी को तकलीफ नहीं होगी।







