भारत की सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट ने जजों की संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि ये फैसला पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया गया है। जारी किए गए डाटा से मिली जानकारी के अनुसार, जस्टिस KV विश्वनाथन सुप्रीम कोर्ट के सबसे अमीर जज हैं। आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले के बारे में क्या कुछ कहा है।
नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया भी सार्वजनिक
सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया को भी जनता की जागरूकता के लिए वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। इसमें हाई कोर्ट कॉलेजियम को सौंपी गई भूमिका राज्य सरकारों, भारत सरकार से प्राप्त भूमिका और इनपुट और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के विचार शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या बताया?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले को लेकर कहा- “उच्चतम न्यायालय की पूर्ण अदालत ने एक अप्रैल 2025 को निर्णय लिया कि इस न्यायालय के न्यायाधीशों की संपत्ति का विवरण उसकी वेबसाइट पर अपलोड करके सार्वजनिक किया जाएगा। पहले से प्राप्त न्यायाधीशों की संपत्ति का विवरण अपलोड किया जा रहा है। अन्य न्यायाधीशों की संपत्ति का विवरण भी प्राप्त होते ही अपलोड कर दिया जाएगा।”
न्यायपालिका पर उठ रहे थे सवाल
दरअसल, हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर कथित तौर पर भारी मात्रा में नोटों का ढेर मिलने का दावा किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर जांच कमेटी का गठन किया था। हालांकि, इस घटने के बाद न्यायपालिका में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए गए थे। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी इस मामले को लेकर न्यायपालिका पर निशाना साधा था।
सुप्रीम कोर्ट ने और क्या-क्या अपलोड किया
- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया को भी अपनी वेबसाइट पर डाल दिया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को सौंपी गई भूमिका, राज्य सरकारों और भारत संघ से मिलने वाला इनपुट और कॉलेजियम के विचार शामिल हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि जनता को जानकारी और जागरूकता मिल सके।
- 9 नवंबर 2022 से 5 मई 2025 की तक हाईकोर्ट के जजों के रूप में नियुक्तियों के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रस्तावों को भी अपलोड किया है। इसमें जज का नाम, हाईकोर्ट, सोर्स- सर्विस से या बार से, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश की तारीख, नोटिफिकेशन की तारीख, नियुक्ति की तारीख, स्पेशल कैटेगरी (SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक/महिला) शामिल है।
- इस जानकारी में यह भी बताया गया है कि क्या उम्मीदवार किसी मौजूदा या रिटायर्ड हाईकोर्ट/सुप्रीम कोर्ट के जज से जुड़ा तो नहीं है। इसके मुताबिक कॉलेजियम ने 9 नवंबर 2022 से 5 मई 2025 के बीच 303 नामों पर विचार किया और 170 की नियुक्त की सिफारिश की।
- इन 170 में से SC से 7, ST से 5, OBC से 21, अत्यंत पिछड़ा वर्ग से 7 हैं। इनमें 28 महिलाएं और 23 जज अल्पसंख्यक हैं। कॉलेजियम ने जो नाम हाईकोर्ट जज के लिए भेजे, उनमें 12 ऐसे हैं जो किसी पूर्व या वर्तमान जज के परिजन हैं।
- इनमें से 11 की नियुक्ति हो चुकी है। इनमें 3 राजस्थान, 2-2 इलाहाबाद और छत्तीसगढ़ और 1-1 बॉम्बे, पटना, गुजरात और दिल्ली हाईकोर्ट में हैं। इन 11 जजों में 6 के पिता, 3 के बहनोई/साले, 1-1 के भाई या ससुर पूर्व या वर्तमान जज हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति की घोषणा से जुड़े बड़े घटनाक्रम
- 1997 का प्रस्ताव: 1997 में, तत्कालीन CJI जे एस वर्मा ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें जजों से अपेक्षा की गई कि वे अपनी संपत्ति की घोषणा चीफ जस्टिस को करें। हालांकि, यह घोषणा सार्वजनिक नहीं की जानी थी।
- 2009 का न्यायाधीश संपत्ति विधेयक: 2009 में, “न्यायाधीश संपत्ति और देनदारियों की घोषणा विधेयक” संसद में प्रस्तुत किया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों को अपनी संपत्ति की घोषणा करने कहा गया था। हालांकि, इसमें यह प्रावधान था कि घोषणाएं सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। इस प्रावधान के कारण विधेयक को विरोध का सामना करना पड़ा और इसे स्थगित कर दिया गया।
- 2009 में संपत्ति की घोषणाएं: 2009 में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दबाव और पारदर्शिता की बढ़ती मांग के कारण, कुछ जजों ने अपनी मर्जी से संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक की।
क्या था जस्टिस वर्मा कैश केस से जुड़ा मामला
14 मार्च यानी होली की रात करीब साढ़े 11 बजे जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी बंगले यानी 30, तुगलक क्रेसेंट कोठी में आग लगी। जस्टिस वर्मा घर पर नहीं थे तो उनकी बेटी और मां ने फोन कर फायर ब्रिगेड और पुलिस को बुलाया।
फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम किया और पुलिस भी आई दमकलकर्मी घर के बाहर की ओर स्टोर रूम में गए, तो जलता हुआ नोटों का ढेर मिला। फोटो वीडियो सामने आने के बाद इस पर विवाद बढ़ता गया।
23 मार्च को ही जस्टिस वर्मा से दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यभार वापस ले लिया था। बाद में उन्हें दिल्ली से इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया गया था। इधर, जांच कमेटी ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट CJI संजीव खन्ना को सौंप दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई को प्रेस रिलीज के जरिए इसकी जानकारी दी। जिसमें कहा- 3 मई को जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई। 4 मई को ये रिपोर्ट CJI को दी गई है। अब इस मामले में आगे का फैसला CJI लेंगे।
14 मई को सीजेआई का पदभार संभालने वाले जस्टिस बीआर गवई के बैंक अकाउंट्स में 19.63 लाख रुपये और पीपीएफ खाते में 6.59 लाख रुपये हैं। साथ ही उनकी संपत्ति में साउथ दिल्ली में दो बेडरूम का डीडीए फ्लैट और कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज में चार बेडरूम का फ्लैट शामिल है। गुरुग्राम में चार बेडरूम के फ्लैट में भी उनकी 56 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं उनकी बेटी के पास बाकी 44 फीसदी हिस्सा है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में विभाजन से पहले के एक पुश्तैनी घर में भी उनकी हिस्सेदारी है।
जस्टिस गवई को महाराष्ट्र के अमरावती में एक घर के अलावा मुंबई और दिल्ली में आवासीय अपार्टमेंट भी मिले हैं। उन्हें अमरावती और नागपुर में एग्रीकल्चर लैंड भी विरासत में मिली है। उन्होंने 1.3 करोड़ रुपये की देनदारी भी घोषित की है। सोमवार रात सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 33 में से 21 जजों की संपत्ति की जानकारी दी गई।
जस्टिस ओका के पास कितनी संपत्ति
अब बात जस्टिस ओका की करें तो वह 24 मई को रिटायर होने वाले हैं। उनकी संपत्तियों में पीपीएफ में 92.35 लाख रुपये, एफडी में 21.76 लाख रुपये, 2022 मॉडल की मारुति बलेनो कार और 5.1 लाख रुपये का कार लोन शामिल है। जस्टिस विक्रम नाथ ने नोएडा में 2-बीएचके अपार्टमेंट, इलाहाबाद में एक बंगला और उत्तर प्रदेश में विरासत में मिली एग्रीकल्चर लैंड की घोषणा की है। इसके अलावा उनके पास 1.5 करोड़ रुपये का इंवेस्टमेंट भी है।
जस्टिस बेला एम त्रिवेदी के पास
वेबसाइट के अनुसार जस्टिस सूर्यकांत के पास चंडीगढ़ , गुरुग्राम और दिल्ली में अपनी पत्नी के साथ संयुक्त तौर पर रेजिडेशिंयल प्रॉपर्टी है। उनके इन्वेस्ट में 31 एफडी रसीदें शामिल हैं। इनमें ब्याज भी शामिल है। इनकी कुल कीमत 6.03 करोड़ रुपये है। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी के पास अहमदाबाद के गुलबाई टेकरा मौजूद दीप्ति बैंक ऑफ इंडिया सोसायटी में एक घर है।
इसके अलावा नीतिबाग जजेज कोऑपरेटिव सोसायटी, अहमदाबाद में भी एक घर है। उनके पास 60 लाख रुपए म्यूचुअल फंड में, 20 लाख रुपए पीपीएफ में, इसके अलावा 50 लाख रुपए के गहने और 2015 मॉडल की मारुति स्विफ्ट कार है। जस्टिस सुधांशु धूलिया के पास 2008 मॉडल की मारुति जेन एस्टिलो कार है। यह इस समय इस्तेमाल में नहीं है। वह देहरादून में बेकार पड़ी है। उनकी प्रॉपर्टी लिस्ट में लिखा है कि यहां बताई गई सभी अचल संपत्तियां मेरे जज बनने से पहले की हैं और इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।







