निलंबित आईएएस संजीव हंस, सरकारी विभागों में ठेकेदारी दिलाने का बिचौलिया रिशुश्री और रिशुश्री के दो स्टाफ संतोष कुमार एवं पवन कुमार पर विशेष निगरानी इकाई में केस दर्ज होने के बाद कई ठेकेदार और राज्य सरकार के अफसर रडार पर हैं। एसवीयू ने जांच शुरू कर दी है।
रिशुश्री जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, लघु जल संसाधान और पथ निर्माण विभाग में ठेकेदारी दिलाता था। संतोष रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में रिशुश्री का स्टाफ है, जबकि पवन कुमार मातृस्वा इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक है। सूत्रों के अनुसार, एसवीयू इन सभी आरोपियों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुला सकती है। एसवीयू इन विभागों में हुए टेंडर घोटाले में हुए लेन-देन की जांच शुरू कर दी है। रिशुश्री का कार्यालय पटना के मीठापुर में है। संजीव पर पहले से ईडी और एसवीयू में केस दर्ज है। दर्ज केस में बिहार सरकार के कई अन्य अधिकारी भी हैं।
अहमदाबाद की कंपनी को दिलाया था ठेका दर्ज केस के अनुसार, जल संसाधन विभाग ने वीरपुर, सुपौल में फिजिकल मॉडलिंग सेंटर की स्थापना के लिए 125 करोड़ की अनुमानित लागत से एक टेंडर निकाला था। रिशुश्री ने जल संसाधन विभाग में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए यह टेंडर अहमदाबाद की कंपनी शेवरोक्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को दिलवाया और बाद में इस काम को मातृस्वा कंस्ट्रक्शन को उप ठेके पर दे दिया। मातृस्वा कंस्ट्रक्शन कंपनी रिशुश्री के करीबी सहयोगी और कर्मचारी संतोष कुमार की कंपनी है। संतोष कुमार रिशुश्री की कंपनी रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड का कर्मी है। जांच के दौरान ईडी ने मेसर्स मातृसवा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के शांति कुंज एसके विहार, पटना स्थित कार्यालय परिसर में तलाशी अभियान चलाया और पाया कि पवन कुमार नामक व्यक्ति मातृसवा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक के रूप में कार्य कर रहा है। पवन के ठिकाने से ईडी ने कई दस्तावेज/शीट जब्त किया था।
10% कमीशन लिया जाता था टेंडर में
आरोप है कि रिशुश्री टेंडर में शामिल करवाकर हेराफेरी करता हैं। जब बिहार सरकार के कोई विभाग टेंडर जारी करता है तो रिशुश्री के माध्यम से संपर्क करने वाली कंपनी को ठेका मिल जाता था। टेंडर लेने वाली कंपनी रिशु श्री को अनुबंध मूल्य का 8-10% कमीशन देती थी। इसका एक बड़ा हिस्सा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ भी देने की बात सामने आ रही है। यही नहीं ईडी की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी दिखाने के लिए रिशुश्री अपनी संस्थाओं को टेंडर के लिए पेटी कांट्रेक्टर में नियुक्त करता है और उन्हें समय-समय पर बढ़ा चढ़ाकर बिल देता था।
ईडी को मिले कई अहम दस्तावेज
गुरुवार को दर्ज एफआईआर में आईएएस संजीव हंस, ठेकेदार रिशु श्री, उसके कर्मी संतोष कुमार व निजी कंपनी के निदेशक पवन कुमार सहित कई अज्ञात अधिकारियों को आरोपित बनाया गया है. एफआईआर के अनुसार, ठेकेदार रिशु श्री के ठिकानों पर ईडी की हुई छापेमारी के दौरान टीम को कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिसके आधार पर अलग-अलग विभागों के कई अधिकारियों को टेंडर मैनेज करने के बदले रिश्वत दिए जाने की बात है.
बिल के बाद भी दी गई मोटी रकम
ईडी ने उदाहरण के तौर पर बताया कि नगर विकास विभाग से जुड़ी 33 नालों की जैविक सफाई योजना, बिहारशरीफ और मुजफ्फरपुर एसटीपी एवं सीवेज नेटवर्क योजना और बिहार शरीफ स्मार्ट रोड परियोजनाओं के तहत भुगतान में पाया गया कि इनसे जुड़े ठेकेदारों को एडवांस में और बिल भुगतान के समय अन्य खर्चों के रूप में भारी भुगतान किया गया है. माना गया है कि यह राशि कर्मियों को रिश्वत देने में इस्तेमाल की गई है.







