जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हिंदू पर्यटकों के नरसंहार के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जंग जैसे हालात बन गए हैं. भारत ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि पहलगाम के पीड़ितों को सरकार हर कीमत पर न्याय दिलाकर ही मानेगी. भारत के इस प्रण से पाकिस्तान की औकात सामने आ गई है. पूरी तरह कंगाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान ने चीन से 10 अरब युआन (लगभग 1.4 अरब डॉलर) की अतिरिक्त वित्तीय सहायता मांगी है. यह राशि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद मुद्रा विनिमय समझौते के तहत मांगी गई है. पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यह कदम देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने और वित्तीय स्रोतों विविध बनाने के लिए उठाया गया है.
वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की बैठकों में हिस्सा लेने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में औरंगजेब ने यह बात कही. उन्होंने उम्मीद जताई कि IMF के साथ पाकिस्तान का मौजूदा वित्तीय करार उसका आखिरी होगा. उनका कहना था कि सरकार आर्थिक सुधारों पर काम कर रही है ताकि देश लंबे समय तक आत्मनिर्भर बन सके. इन सुधारों में सरकारी क्षेत्र को छोटा करना, पेंशन व्यवस्था में बदलाव और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना शामिल है. औरंगजेब ने बताया कि हाल के कदमों से अर्थव्यवस्था स्थिर हुई है और अब इसे और मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं.
वाशिंगटन में एक इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने चीन के साथ मौजूदा 30 अरब युआन के मुद्रा विनिमय समझौते को बढ़ाकर 40 अरब युआन करने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि हमारे लिए 40 अरब युआन तक पहुंचना एक अच्छा कदम होगा. हमने अभी यह अनुरोध किया है. यह अतिरिक्त राशि पाकिस्तान को अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में मदद करेगी.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से चुनौतियों का सामना कर रही है. विदेशी कर्ज, बढ़ती महंगाई और कमजोर मुद्रा ने देश के सामने कई मुश्किलें खड़ी की हैं. ऐसे में चीन जैसे सहयोगी देशों से वित्तीय मदद पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण रही है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसी परियोजनाओं के जरिए भी दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ा है.







