पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जनसुराज की ‘बिहार बदलाव रैली’ में प्रशांत किशोर ने कहा कि, बीपीएससी मामले में नीतीश कुमार ने तानाशाही कर जेल में डाला था। कोर्ट ने हमको बाइज्जत बरी किया था।
‘तभी हमने कहा था कि, फैसला गांधी मैदान में होगा। 10 दिन बाद मैं यहीं से बिहार बदलाव यात्रा पर निकलूंगा। गांव-गांव हर पंचायत में जाकर विकसित बिहार का प्लान लोगों के साथ साझा करूंगा।’
‘ 2015 में नीतीश कुमार की हमने मदद नहीं की होती तो आज वो राजनीति से संन्यास ले चुके होते और आज बहुत होशियार बन रहे हैं। प्रशासन ने हमारे साथ दूसरी बार धोखा किया है। हम इन्हें छोड़ेंगे नहीं। पीके बोले, हम शादी भी करवाते हैं और श्राद्ध भी करवाते हैं, ये लोग न भूलें।’
पीके ने कहा कि, ‘जनसुराज के परिवार को गांधी मैदान बुलाया गया। यहां के DM, SP, मुख्य सचिव को सूचना दी, लेकिन इन लोगों ने आपको हमसे मिलने से रोका। भाई-बहन, बच्चा सभी सुबह से परेशान हैं। मैं दो घंटे से सड़क पर घूम रहा हूं। आपसे माफी मांगते हैं। प्रशासन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।’

गांधी मैदान में कुर्सियां खाली
आज यानी शुक्रवार को गांधी मैदान में होने वाली बिहार बदलाव रैली के लिए जनसुराज ने बड़े स्तर पर तैयारियां की थीं। ऐसा दावा किया गया था कि, रैली में 1 लाख से ज्यादा लोग जुटेंगे। लेकिन पूरी रैली से भीड़ नदारद नजर आई।
कार्यकर्ताओं के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई थीं। खाने-पीने का इंतजाम था। लोगों को ट्रेन और बस से पटना लाने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन भीड़ जुटाने में जनसुराज के कोशिशें नाकाफी रहीं।
पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तमाम जगह बैरिकेडिंग की थी। जगह-जगह फोर्स तैनात थी। हालांकि, गांधी मैदान के सभी गेट खोल दिए गए थे। लेकिन बड़ी गाड़ियों को शहर के बाहर की रोका गया। पीके ने कहा कि, चार घंटे तक जनसुराज के लोगों को प्रशासन ने परेशान किया। पिछली बार लाठियां चलाई थीं। इस बार गांधी मैदान तक आने नहीं दिया।

महज 7 मिनट में पीके का भाषण खत्म
पीके ने महज 7 मिनट में अपना भाषण खत्म कर दिया। प्रशासन के ऊपर गुस्सा निकालते हुए वे मंच से नीचे उतर गए। अभी कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। बोले, रातभर गांधी मैदान में ही आप लोगों के बीच रहेंगे और साथ में खाना खाएंगे। पीके ने कार्यकर्ताओं को चार घंटे इंतजार करवाने के लिए माफी भी मांगी।
जीते तो कुर्सी की खींचतान नहीं करेंगे
पीके के पहले सभा को संबोधित करते हुए जनसुराज के कोर कमेटी के मेंबर और पूर्व IPS आनंद मिश्रा ने कहा, ‘एक ऐसी व्यवस्था बने कि सरकार अपनी जिम्मेदारी ले। जमीनी विवाद के जितने भी मामले बनते हैं, उसमें सरकार को भी हिस्सा बनना चाहिए।’
‘रिकॉर्ड सरकार रखती है तो केस में एक नाम तो सरकार का भी होना चाहिए। जनसुराज अगर सत्ता में आती है तो हम रोज कुर्सी की खींचतान नहीं करेंगे। जो भी आपकी जिंदगी की बेसिक परेशानी है, उसे हम खत्म कर देंगे।’
बिहार में बदलाव अब जनता की मांग
जनसुराज के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा, ‘बिहार में बदलाव अब जरूरत नहीं, बल्कि जनता की मांग बन चुकी है। बीते 35 साल में हमने केवल कुशासन, भ्रष्टाचार और जातिगत राजनीति को देखा है। अब समय आ गया है कि जनता खुद आगे बढ़े और एक नई राजनीति की नींव रखे।’
चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की बदलाव रैली से एक संदेश तो जनमानस के साफ गया कि अभी उनमें,उनकी राजनीतिक दृष्टि और चेतना में बदलाव की जरूरत है।
बिहार की राजनीति को साधने को एक आधार तो ढूंढना होगा जहां खुल कर एक खास वर्ग के लिए नीतियां बनानी होगी। और उस खास वर्ग के लिए ही जीना और मरना होगा। और यह नीति फिर किसी बदलाव का इंतजार न करें। इंतजार करें तो सिर्फ अपनी बारी का।
क्या हश्र हुआ रैली का?
प्रशांत किशोर की पहली गलती भीड़ का ढिंढोरा पीटना रहा। एक तो असमय रैली की और तैयारियां का बिखराव तो जिला से ले कर राजधानी तक दिखी। प्रशांत किशोर के अपरिपक्व राजनीति का नजारा यह रहा कि उन्हें अपनी आंखों के सामने फजीहत का सामना करना पड़ा।
एक मजबूत तैयारी के अभाव में प्रशांत किशोर की यह असफलता कोई पहली बार नहीं हुई। बीपीएससी अभ्यर्थियों के समर्थन में आंदोलन करने के लिए प्रशांत किशोर ने पटना के गांधी मैदान में सत्याग्रह किया। छात्र-छात्राओं ने पुलिस की लाठियां खाई और एक साधारण प्रक्रिया का पालन नहीं करने के कारण खुद कोर्ट के चक्कर लगाए और इस आंदोलन का बंटाधार हो गया। व्यक्तित्व का फालूदा तो उस दिल निकल गया जब उन्होंने बीपीएससी अभ्यर्थी पर कंबल और खाना का तोहमत लगा गए। अब उस दावे का क्या कहेंगे कि जो व्यक्ति बिहार की पूरी व्यवस्था को ठीक कर देने के लिए वादा करते चल रहे हैं वो अपनी भीतरी व्यवस्था तक नहीं कर सके।
रैली की असफलता के लिए प्रशासन को ठकराया जिम्मेदार
प्रशांत किशोर ने रैली की असफलता का ठीकरा पुलिस प्रशासन पर फोड़ डाला। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इशारे पर काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली के दिन गांधी मैदान में भीड़ नहीं पहुंचने के लिए पुलिस-प्रशासन की ओर से तरह-तरह की रुकावटें डाली गई।
प्रशांत किशोर के अनुसार लाखों की संख्या में जनसुराज के समर्थन को प्रशासन ने पटना में घुसने नहीं दिया। हजारों गाड़ियां को पटना के बाहरी इलाकों में कृत्रिम जाम की स्थिति बनाकर फंसाए रखा। इसके बावजूद जन सुराज के समर्थक चार घंटे से चिलचिलाती धूप में भूखे प्यासे डटे रहे। वो खुद चार घंटे तक प्रशासन से गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन ने उनकी नहीं सुनी।
कभी जदयू के रणनीतिकार और नीतीश कुमार के करीबी रहे प्रशांत किशोर क्या सीएम के हर फंडे से वाकिफ नहीं थे। बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है कहने वाले अपने ऑल माइटी के विरुद्ध तो किला चाक चौबंद करते। आप तो नीतीश कुमार की ताबूत में अंतिम कील ठोकने निकले और हथौड़ा ही भूल गए।
पीके बिगड़े बोल!
इस बदलाव रैली में एक बदलाव यह हुआ कि उनके बोल बदल गए। प्रशांत किशोर ने रैली में दावा किया कि वर्ष 2015 के चुनाव में उन्होंने नीतीश कुमार के साथ काम किया। तब उन्होंने मदद नहीं की होती तो आज नीतीश कुमार संन्यास लेकर कहीं बैठे होते। लेकिन शायद नीतीश कुमार यह भूल गए कि जो शादी कराता है, वही श्राद्ध भी कराता है। जन सुराज पार्टी नीतीश कुमार का राजनीतिक श्राद्ध करेगी।







