सवाल ये है कि चीन ने दादागिरी करके चौबीस साल में दुनिया भर के मार्केट पर कब्जा किया। वो एक-दो दिन में या दो-चार महीने में तो खत्म नहीं हो सकता। ऐसी परिस्थिति में भारत जैसे देश क्या करें? तो इसका जवाब दिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने। मोदी ने मंगलवार को मुद्र लोन के लाभार्थियों से बात करते हुए कहा कि स्वदेशी और आत्मनिर्भर बनना ही एकमात्र रास्ता है, हमें अपने नौजवानों को न्यापार-केंद्रित बनाना होगा, उद्योगों को विकसित बनाना होगा, इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा, मुद्रा योजना इसी सोच का नतीजा है। मोदी ने 2015 में मुद्रा योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत अपना कारोबार शुरू करने वाले लोगों को सरकार बिना किसी गारंटी के बिना ब्याज के कर्ज़ देती है। अब तक 33 लाख करोड़ रुपये कर्ज़ दिए जा चुके हैं। मोदी ने कहा कि लोग तो आरोप लगाते हैं कि अमीरों की सरकार है लेकिन 33 लाख करोड़ रुपये तो आम लोगों की जेब में गए और इन लोगों ने इस पैसे पर मौज नहीं की, इसे व्यापार में लगाया, रोजगार पैदा हुए और कर्ज़ भी वक्त पर वापस किया, ये बड़ी बात है, ये एक मौन क्रांति है।
मैंने वो जमाना देखा है जब गरीब आदमी को बैंक से कर्ज़ मिलना असंभव था। गरीब का तो बैंक खाता भी नहीं होता था, वो छोटा-मोटा काम करने के लिए बाजार से ब्याज पर पैसा उठाता था और जीवन भर उसे लौटा नहीं पाता था। इसीलिए बैंक खाता खोलना, मुद्रा लोन देना, एक क्रांति से कम नहीं है। किसी गरीब को बिना किसी गारंटी के, प्रॉपर्टी और गहने गिरवी रखे बगैर 20 लाख रुपये तक ब्याजमुक्त कर्ज़ मिल जाए तो वो अपनी जिंदगी बदल सकता है और देश के आर्थिक विकास में भागीदार बन सकता है। इसके बहुत सारे सबूत और उदाहरण हमने देखे हैं। ये चुपचाप होने वाले एक बड़े बदलाव की तैयारी है जिसमें गरीब का भला होगा, देश का भला होगा, हम अपने प्रोडक्ट्स बनाएंगे, इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और जो पैसा बचेगा वो देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में लगेगा। यही चीन की चालों का जबाव है। यही स्वदेशी क्रांति है। मोदी ने यही संदेश दिया।







