वक्फ संशोधन बिल को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले तमाम राजनीतिक दल अपनी जमीनी तैयारियों को मजबूत कर लेना चाहते हैं. ताकि चुनाव में इसका लाभ उठाया जा सके. इसी कड़ी में जेडीयू ने अचानक से पार्टी संगठन से जुड़े जिला से लेकर प्रखंड के नेताओं को पार्टी दफ्तर बुलाकर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की. इस बैठक में पार्टी के संगठन की ताक़त और कमजोरी की पूरी जानकारी ली गई. बैठक में मिली जानकारी ने पार्टी को हैरान भी किया और सतर्क भी.
दरअसल चुनावी साल में जेडीयू की गतिविधियां तेज हो गई हैं और पार्टी दफ्तर में चहल-पहल नजर आ रही है. इसका कारण है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू को बड़ा झटका लगा था और पार्टी मात्र 43 सीटों पर सिमट गई थी. तब जेडीयू को जमीनी हकीकत का सही से पता नहीं चल पाया था, जिसका खामियाजा पार्टी आज तक भुगत रही है. लेकिन, 2025 के विधानसभा चुनाव में ऐसा न हो, इसके लिए पार्टी दफ्तर में जिला अध्यक्षों, संगठन प्रभारियों और विधानसभा प्रभारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें जमीनी स्तर पर पार्टी की तैयारियों की जानकारी ली गई.
चुनावी साल की बैठक काफी अहम
इस बैठक में पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जो पार्टी के लिए अहम थीं. वक़्फ संशोधन बिल के बाद उपजी राजनीतिक परिस्थिति पर भी गहन चिंतन हुआ और इससे निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए, जो पार्टी को आगामी चुनाव में लाभ दिला सकते हैं. इस बारे में जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि चुनावी साल होने के कारण बैठकें होती रहती हैं, लेकिन यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी साल चुनाव होने वाला है. इससे जमीनी स्तर पर पार्टी की तैयारी का पता चला और जिनकी तैयारी पूरी नहीं हुई है. उन्हें जल्द से जल्द तैयारी पूरी करने का निर्देश दिया गया है.
100 लोगों की कमिटी बनाने के दिया गया निर्देश
जेडीयू की योजना है कि पार्टी बूथ स्तर तक अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करें. इसके लिए हर बूथ पर 10 लोगों की कमिटी बनाने का निर्देश दिया गया है. इस काम के लिए जिला अध्यक्षों से लेकर विधानसभा प्रभारी और जिला प्रभारियों को टास्क दिया गया है. जेडीयू बिहार में जाति की राजनीति की सच्चाई को समझता है, इसलिए सभी गांवों में वोटर लिस्ट के अनुसार वोटरों की जाति की पहचान करने, हर बूथ पर चार सबसे अधिक वोट वाली जातियों को चिन्हित कर, उनका नाम और मोबाइल नंबर देने को कहा गया है. पार्टी का मानना है कि यह जानकारी उम्मीदवार तय करने में मदद करेगी और चुनाव जीतने के लिए आवश्यक कदम उठाने में सहायक होगी.







