बिहार कांग्रेस के प्रखंड से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन में बड़ी सर्जरी की तैयारी चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह की छुट्टी के बाद अब संगठन से उनके चहेतों की भी छुट्टी हो सकती है। प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू खुद अपनी निगरानी में इस फेरबदल को अंजाम दे रहे हैं।
कांग्रेस सूत्रों की मानें तो 3 अप्रैल को कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ जिलाध्यक्षों की बैठक होनी है। इससे पहले ही बिहार कांग्रेस के नए जिलाध्यक्षों की घोषणा हो सकती है।
2017 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है, जब जिलाध्यक्ष के साथ कार्यसमिति के गठन का प्रयास किया जा रहा है। बिहार कांग्रेस में आखिरी बार 2013 में अशोक चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष रहते जिला से लेकर प्रदेश स्तर पर संगठन का गठन किया था। इनके बाद 4 प्रदेश अध्यक्ष और तीन प्रदेश प्रभारी बदल चुके हैं, लेकिन कार्यसमिति का गठन नहीं हो पाया है।
6 सदस्यीय टीम की स्क्रीनिंग के बाद होगा चयन
प्रखंड, जिला और प्रदेश स्तर पर पदाधिकारियों के चयन के लिए स्टेट लीडरशीप की तरफ से 6 सदस्यीय स्क्रिनिंग कमेटी का गठन किया गया है। इसका संयोजक प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार को बनाया गया है। विधानसभा में विधायक दल के नेता शकील अहमद खान और विधान परिषद दल के नेता मदन मोहन झा को सदस्य बनाया गया है।
इनके अलावा पार्टी के तीन प्रभारी सचिव देवेंद्र यादव, शाहनबाज आलम, और सुशील कुमार पासी को भी सदस्य बनाया गया है। हालांकि, गौरतलब है कि इसमें निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह को जगह नहीं मिली है।
सामाजिक समीकरण के हिसाब से चुने जाएंगे नए जिलाध्यक्ष
संगठन में फेरबदल को लेकर हमने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी से सवाल पूछा कि क्या संगठन में फेरबदल हो रहा है? किस तरह का बदलाव किया जा सकता है, कब तक ये संभव है? इन पर कृष्णा अल्लावरु ने कहा-
हमारी कोशिश है कि जहां बदलाव की जरूरत है, वहां ही फेरबदल हो। जहां जरूरत नहीं है, वहां किसी प्रकार का कोई फेरबदल नहीं होगा। पूरी कोशिश है कि सिर्फ कार्यकारिणी बनाई ही नहीं जाए, जल्द से जल्द इसकी घोषणा भी की जाए।

आगे उन्होंने कहा, ’कांग्रेस पार्टी की शुरू से ही सोच रही है कि सारे लोगों को साथ लेकर चलें। प्रयास ये होता है कि जहां का संतुलन बिगड़ा हुआ है, उसे हम सही करें। बिगड़े हुए संतुलन को हम ठीक करने का प्रयास करेंगे।”
इसी सवाल पर स्क्रिनिंग कमेटी के सदस्य और विधानसभा में विधायक दल के नेता शकील अहमद खान कहते हैं, ’जिलाध्यक्षों के लिए स्क्रिनिंग की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। राज्य के प्रभारी सचिव पिछले तीन महीने से लगातार जिले में घूम रहे हैं तो वे लगभग चीजें साफ हो गई हैं। नई लिस्ट में सामाजिक न्याय का इसमें पूरा ख्याल रखा जाएगा।’

अखिलेश सिंह ने 67 प्रतिशत सवर्णों को दी थी जिले की कमान
दिसंबर 2022 में प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अखिलेश सिंह ने मई 2023 में एक साथ 39 जिलाध्यक्षों की घोषणा की थी। उन्होंने 39 में से 26 जिलों की कमान सवर्ण जिलाध्यक्षों के हाथ में दी थी। इनमें 11 जिलों में भूमिहार, 8 जिलों में ब्राह्मण, 6 जिलों राजपूत और 1 जिले में कायस्थ समाज के नेता को जिलाध्यक्ष बनाया था।
इनके अलावा 5 जिलों में मुस्लिम, 4 जिलों में यादव, 3 दलित और मात्र 1 कुशवाहा चेहरों को जिलाध्यक्ष की लिस्ट में शामिल किया था। 39 जिलाध्यक्षों की लिस्ट में केवल दो महिला को जिलाध्यक्ष बनाया गया था।
कैंडिडेट सिलेक्शन में जिलाध्यक्ष निभाएंगे बड़ी भूमिका
कांग्रेस संगठन को धारदार बनाने के लिए जिलाध्यक्षों को बड़ा पावर देने की तैयारी कर रही है। प्रदेश की तरह ही जिला में जिलाध्यक्षों को कई स्वतंत्र अधिकार दिए जा सकते हैं। आर्थिक तौर पर भी इन्हें सश्कत बनाने की तैयारी है।
पार्टी सूत्रों की मानें तो इनकी भूमिका अब केवल जिलों के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने की नहीं होगी, बल्कि इन्हें मजबूत करने को लेकर कुछ महत्वपूर्ण फैसले और घोषणाएं और हो सकती हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण और कैंडिडेट सिलेक्शन में जिलाध्यक्षों की अहम भूमिका हो सकती है। बहुत जल्द सकी घोषणा भी हो सकती है।
2019 की तुलना में 2024 में वोट शेयर और सीट दोनों बढ़ी थी
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 9 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। मात्र एक सीट पर चुनाव जीतने में सफल रही थी। पार्टी को 7.9 प्रतिशत वोट शेयर मिला था।
वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी 9 सीटों पर ही चुनाव लड़ी थी, लेकिन 3 सीट जीतने में सफल रही। पार्टी का वोट शेयर भी 7.9 फीसदी से बढ़कर 9.4 फीसदी हो गया था। यानि दो सीट और 1.5 फीसदी वोट शेयर में बढ़ोतरी हुई थी।
जबकि, 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इनमें 19 सीटों पर जीतने में सफल रही थी। इस चुनाव में पार्टी 9.6 फीसदी वोट शेयर मिला था।
2013 में आखिरी बार हुआ था प्रदेश कार्यसमिति का गठन
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गठन आखिरी बार अशोक चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष रहते 2013 में किया गया था। तब से लेकर आज तक थोड़ा-बहुत फेरबदल करके कांग्रेस की वही कार्यसमिति फंक्शनल है। अशोक चौधरी के कार्यकाल में 255 सदस्यों की प्रदेश कार्यकारिणी बनाई गई थी। इसमें 15 उपाध्यक्ष, 25 महासचिव, 76 सचिव, 45 संगठन सचिव, 77 कार्यकारिणी के सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य के अलावा एक कोषाध्यक्ष बनाया बनाए गए थे।
25 सितंबर 2017 को अशोक चौधरी को हटाकर कौकब कादरी को बिहार प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 2018 में मदन मोहन झा कांग्रेस के पूर्णकालिक प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। ये 2022 तक रहे, लेकिन 4 वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश कमेटी का गठन नहीं कर सके।
इनके बाद दिसंबर 2022 में अखिलेश सिंह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने। ये 2024 तक रहे, लेकिन जिलाध्यक्ष तक की घोषणा ही कर पाए। इस बीच 2019 में लोकसभा चुनाव, 2020 का विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव बिना प्रदेश कमेटी के ही लड़ा गया।
बिना कमेटी बनाए दो प्रभारी की छुट्टी हो गई
अशोक चौधरी के कार्यकाल के दौरान शक्ति सिंह गोहिल को बिहार कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था। उन्हीं के कार्यकाल में 2014 का लोकसभा चुनाव और 2015 का विधानसभा चुनाव हुआ। इसके बाद भक्त चरणदास को बिहार का प्रभारी बनाया गया। 2024 में मोहन प्रकाश को बिहार का प्रभारी बनाया गया। भक्त चरणदास और मोहन प्रकाश के कार्यकाल में भी बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गठन नहीं हो पाया। अब कृष्णा अल्लावरु इस पर तेजी से काम कर रहे हैं।







