अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान पर बम बरसाने और टैरिफ लगाने की धमकी दी. ट्रंप की इस धमकी के बाद ईरान की सेना ने हमले की स्थिति में जवाब देने के लिए मिसाइलों को तैयार कर लिया है. तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में अंडर ग्राउंड फैसिलिटी में मौजूद मिसाइलें लॉन्च के लिए तैयार स्थिति में हैं. यह अंडर ग्राउंड फैसिलिटी हमलों का सामना करने के लिए डिजाइन की गई हैं. ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर तेहरान ने अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं किया, तो बमबारी और टैरिफ लगाए जाएंगे. ईरान पर अगर हमला होता है तो संभव है कि शिया देश जवाब में इजरायल या मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी बेस को निशाना बनाए.
पिछले सप्ताह ईरान ने अमेरिका के साथ सीधे बातचीत को खारिज कर दिया था. ट्रंप ने NBC न्यूज को बताया कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी बातचीत कर रहे थे. हालांकि उन्होंने इसे लेकर विस्तार से कुछ नहीं कहा. इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, ‘अगर वे समझौता नहीं करते, तो बमबारी होगी. यह बमबारी ऐसी होगी, जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा.’ ईरान की ओर से सीधी बातचीत से इनकार करने के बाद यह ट्रंप का पहला बयान है, जो उनकी आक्रामक नीति को दिखाता है.
ट्रम्प ने आगे कहा- उनके (ईरान) पास एक मौका है, अगर वे ऐसा नहीं करते तो मैं उनपर 4 साल पहले की तरह सेकेंडरी टैरिफ लगाऊंगा। न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिकी और ईरानी अधिकारी बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया।
ट्रंप के टैरिफ की धमकी
ट्रंप ने रूस और ईरान दोनों पर सेकेंडरी टैरिफ की धमकी भी दी. यह एक ऐसा टैरिफ है जो किसी देश के सामान खरीदने वालों को प्रभावित करते हैं. पिछले सप्ताह उन्होंने वेनेजुएला के तेल खरीदने वालों पर इस तरह के टैरिफ का ऐलान किया था. ट्रंप ने यह नहीं बताया कि वह किस तरह का टैरिफ लगा सकते हैं. अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था. इस डील में ईरान के परमाणु गतिविधियों पर सख्त पाबंदियां थीं, बदले में प्रतिबंधों में राहत दी गई थी.
इस बीच ईरान की सेना ने किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब देने के लिए अपनी मिसाइलों को तैनात कर दिया है।

तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की मिसाइलें सभी अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी में लॉन्चरों पर लोड कर दी गई हैं और लॉन्च के लिए तैयार हैं।
तेहरान टाइम्स ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘पैंडोरा बॉक्स खोलने से अमेरिकी सरकार और उसके सहयोगियों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।’ आसान शब्दों में “पैंडोरा बॉक्स खोलना” का मतलब है किसी ऐसी चीज को शुरू करना, जिसके बाद बहुत सारी परेशानियां पैदा हो जाएं, और उन्हें रोकना मुश्किल हो।
ईरान ने अमेरिका के साथ सीधा समझौता करने से इनकार किया
इससे पहले ट्रम्प ने न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर ईरान को सीधी बातचीत करने के लिए एक चिट्ठी लिखी थी, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने रविवार को कहा कि वह अमेरिका के साथ सीधे तौर पर कोई समझौता नहीं करेगा।
पजशकियान ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत की संभावना को हमने खारिज कर दिया गया है, लेकिन साफ नहीं है कि ट्रम्प अप्रत्यक्ष बातचीत करने के लिए राजी होंगे या नहीं। 2018 में जब ट्रम्प ने ईरान के परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकाला था, तब से अब तक की गई अप्रत्यक्ष बातचीत असफल रही हैं।
ट्रम्प ने ईरान को चिट्ठी लिखी थी
रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प ने 12 मार्च के UAE के एक दूत के जरिए ईरान को चिट्ठी लिखी थी। इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई को न्यूक्लियर प्रोग्राम पर नए सिरे से बातचीत करने के लिए न्योता दिया गया था।
इसमें यह भी धमकी दी गई थी कि अगर ईरान वार्ता में शामिल नहीं होता है तो अमेरिका तेहरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए कुछ करेगा।
ईरान ने अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी का वीडियो जारी किया
इससे पहले ईरान ने 26 मार्च को अपनी तीसरी अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी का वीडियो जारी किया था। 85 सेकेंड के इस वीडियो में सुरंगों के भीतर मिसाइलें और आधुनिक हथियार दिखाई दे हैं। यह वीडियो ऐसे समय जारी किया गया है, जब डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान को परमाणु प्रोग्राम खत्म करने की चेतावनी की डेडलाइन करीब है।
ईरान के सरकारी मीडिया ने यह वीडियो जारी किया है। इसमें टॉप मिलिट्री कमांडर मेजर जनरल मो. हुसैन बागरी और ईरान रेवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के एयरोस्पेस फोर्स के चीफ आमिर अली हाजीजादेह नजर आ रहे हैं।
अमेरिका कर रहा हमले की तैयारी!
ट्रंप अगर ईरान पर बम गिराने की बात कर रहे हैं तो यह कोई खोखली धमकी नहीं है. इसके लिए उन्होंने तैयारी भी कर ली है. दरअसल अमेरिका हिंद महासागर में मौजूद डिएगो गार्सिया में बी-2 बमवर्षकों को इकट्ठा कर रहा है. यह सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले स्टील्थ विमान हैं, जो वायु रक्षा प्रणालियों से बच सकते हैं. मालदीव से यह लगभग 700 किमी दक्षिण में है. इस द्वीप का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए हो सकता है. पिछले सप्ताह ऐसी रिपोर्ट आई थी कि अमेरिका ने बेस पर कम से कम पांच बी-2 बमवर्षक तैनात किए हैं.
इरान के एक वीडियो में दो अफसर सेना के वाहन पर सुरंगों के भीतर सफर कर रहे हैं और आसपास ईरान की आधुनिक मिसाइलें और एडवांस वेपनरी दिखाई दे रही है। ईरान की सबसे खतरनाक खैबर शेकेन, कादर-H, सेजिल और पावेह लैंड अटैक क्रूज मिसाइल भी दिख रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हथियारों का इस्तेमाल हाल ही में इजराइल पर हमले में किया गया था।
1953 – तख्तापलट : यह वो साल था, जब अमेरिका-ईरान के बीच दुश्मनी की शुरुआत हुई। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने ब्रिटेन के साथ मिलकर ईरान में तख्तापलट करवाया। निर्वाचित प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसाद्दिक को हटाकर ईरान के शाह रजा पहलवी के हाथ में सत्ता दे दी गई। इसकी मुख्य वजह था-तेल। मोसाद्दिक तेल के उद्योग का राष्ट्रीयकरण करना चाहते थे।
1979 – ईरानी क्रांति : ईरान में एक नया नेता उभरा-आयतोल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी। खुमैनी पश्चिमीकरण और अमेरिका पर ईरान की निर्भरता के सख्त खिलाफ थे। शाह पहलवी उनके निशाने पर थे। खुमैनी के नेतृत्व में ईरान में असंतोष उपजने लगा। शाह को ईरान छोड़ना पड़ा। 1 फरवरी 1979 को खुमैनी निर्वासन से लौट आए।
1979-81 – दूतावास संकट : ईरान और अमेरिका के राजनयिक संबंध खत्म हो चुके थे। तेहरान में ईरानी छात्रों ने अमेरिकी दूतावास को अपने कब्जे में ले लिया। 52 अमेरिकी नागरिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। 2012 में इस विषय पर हॉलीवुड फिल्म-आर्गो आई। इसी बीच इराक ने अमेरिका की मदद से ईरान पर हमला कर दिया। युद्ध आठ साल चला।
2015 – परमाणु समझौता : ओबामा के अमेरिकी राष्ट्रपति रहते समय दोनों देशों के संबंध थोड़ा सुधरने शुरू हुए। ईरान के साथ परमाणु समझौता हुआ, जिसमें ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की बात की। इसके बदले उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी गई थी। लेकिन ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद यह समझौता रद्द कर दिया। दुश्मनी फिर शुरू हो गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को NBC न्यूज को दिए टेलिफोनिक इंटरव्यू में कहा कि वो रूसी राष्ट्रपति पुतिन से काफी नाराज हैं। ट्रम्प ने कहा कि पुतिन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की लीडरशिप की आलोचना की थी, यह मुझे पंसद नहीं आई।







