सपा के राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने शनिवार को राणा सांगा पर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने सांगा द्वारा बाबर को इब्राहिम लोदी पर हमले के लिए बुलाने की बात कही। विवादित बयान से सुमन तो घिर ही गए हैं, उनके बयान पर बहस भी छिड़ गई है। राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को कई बार हराया था।
वर्ष 1527 में भरतपुर की रूपवास तहसील के खानवा में बाबर के विरुद्ध युद्ध लड़ा था, जिसमें तीर लगने पर वह घायल हो गए थे। इससे पूर्व बयाना के युद्ध में उन्होंने बाबर को बुरी तरह हराया था। कर्नल जेम्स टाड ने उन्हें हिंदूपत की उपाधि देने के साथ ही उनके शरीर पर घावों क वजह से सैनिक का भग्नावशेष कहा था।
राणा सांगा वर्ष 1508 में मेवाड़ के शासक बने थे। उन्होंने अपने जीवन काल में 100 से अधिक लड़ाइयां लड़ी थीं। खानवा के अलावा किसी अन्य युद्ध में उनकी हार नहीं हुई। उनके शरीर पर 80 से अधिक घाव थे। उनकी एक आंख, एक हाथ नहीं था। एक पैर काम नहीं करता था।
राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को हराया
कर्नल जेम्स टाड के अनुसार उनके राज्य मेवाड़ की सीमा पूरब में आगरा, दक्षिण में गुजरात की सीमा तक थी। दिल्ली, मालवा, गुजरात के सुल्तानों के साथ उन्होंने 18 युद्ध लड़े और सभी में विजयी रहे। राणा सांगा ने 1517 में खतोली और 1518-19 में धौलपुर में दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराया था।
निजाम की सेना को हराया
मालवा के शासक महमूद खिलजी द्वितीय को 1517 और 1519 में ईडर व गागरोन में हुई लड़ाइयों में हराकर दो माह तक बंधक बनाकर रखा। वर्ष 1520 में ईडर के निजाम खान की सेना को हराया। पंजाब और सिंध पर जीत के बाद बाबर ने अप्रैल, 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर उसकी हत्या कर दी।
बाबरनामा में है जिक्र
राणा सांगा और बाबर का पहली बार आमना-सामना 21 फरवरी, 1527 को बयाना में हुआ। इसमें बाबर की बुरी हार हुई। हारकर वह आगरा लौट आया। अपनी आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में बाबर ने स्वयं इस युद्ध का वर्णन किया है। बयाना की हार के बाद बाबर ने इस्लाम के नाम पर अपने सैनिकों को एक किया और शराब नहीं पीने की कसम खाई।
राणा सांगा एक तीर लगने से बेहोश हो गए
खानवा के मैदान में 16 मार्च, 1527 को राणा सांगा और बाबर की सेनाओं का फिर आमना-सामना हुआ। इस युद्ध में बाबर तोप और बंदूकों से लड़ा, जबकि राजपूत तलवारों से। राणा सांगा एक तीर लगने से बेहोश हो गए, जिससे उनकी सेना हतोत्साहित हो गई। युद्ध में बाबर की जीत हुई। जनवरी, 1528 में राणा सांगा की मृत्यु जहर दिए जाने की वजह से हो गई।
दौलत खान और आलम खान ने बाबर को बुलाया था
इतिहासकारों का मानना है कि पंजाब का गर्वनर दौलत खान और इब्राहिम लोदी का चाचा आलम खान दिल्ली की गद्दी कब्जाना चाहते थे। उन्होंने बाबर को भारत आने का न्योता दिया। इतिहासकार राणा सांगा द्वारा बाबर को बुलाए जाने से इन्कार करते हैं। वह उस समय सबसे शक्तिशाली शासक थे। राजपूताना के शासकों को मिलाकर उन्होंने एक गठबंधन बना लिया था। डा. मोहनलाल गुप्ता ने राष्ट्रीय राजनीति में मेवाड़ का प्रभाव पुस्तक में राणा सांगा द्वारा बाबर को बुुलाए जाने से इन्कार किया है।
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारे में राणा सांगा पर विवाद छिड़ गया है. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने सदन में गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान विवादित बयान दे डाला था. उन्होंने बाबर और औरंगजेब के मुद्दे पर बात रखते हुए राणा सांगा को गद्दार तक बता दिया. इसके बाद सियासी बवाल मच गया. भाजपा नेता मांग करने लगे कि रामजी लाल सबसे माफी मांगे. मगर, अब समाजवादी पार्टी के मुखिया ने भाजपा पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि भाजपा इतिहास के पन्ने पलटना बंद करे.
क्या बोले सपा अखिलेश यादव?
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि रामजी सुमन ने क्या कहा. बीजेपी के लोग किस बात पर बहस कर रहे है, ओरंगजेब की बहस छेडना चाहते है, रामजीसुमन ने इतिहास का कोई पन्ना पलट दिया, इतिहास किसने लिखा है, बीजेपी से निवेदन है इतिहास के पन्ने ना पलटें. अगर पन्ने पलटे जायेंगे कि छत्रपति का तिलक होना था , पैर का बायें अंगुठे से उनका तिलक किया गया था, बीजेपी इसकी निंदा करेगी आज, बीजेपी छत्रपति को मानती है, बांये पैर से तिलक हुआ उसके लिए बीजेपी माफी मांगेगी क्या. इसलिए बीजेपी इतिहास के पन्ने पलटना बंद करें.
सपा सांसद के बिगड़े बोल
राज्यसभा में उपसभापति हरिवंश को संबोधित करते हुए सांसद सुमन ने कहा था, भाजपा के लोगों का तकियाकलाम हो गया है कि सबको कहते हैं- इनमें बाबर का डीएनए है. अब हिंदुस्तान का मुसलमान तो बाबर को आदर्श मानता नहीं है, वो तो मोहम्मद साहब को अपना आदर्श मानता है. सूफी-संतों की परंपरा को आदर्श मानता है. मैं तो यह जानना चाहूंगा कि बाबर को आखिर लाया कौन? बाबर को तो इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा लेकर आया था. मुसलमान तो बाबर की औलाद हैं, लेकिन तुम तो गद्दार राणा सांगा की औलाद हो. ये अब हिंदुस्तान में तय हो जाना चाहिए. बाबर की आलोचना तो करते हैं लेकिन राणा सांगा की आलोचना क्यों नहीं करते हैं?
अब रामजी लाल सुमन ने दी सफाई
समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने राज्यसभा में दिए अपने बयान पर कहा कि मैं किसी की भावनाओं को आहत नहीं किया है. मैने केवल इतिहास के तथ्य को बताया है. सदन में गृह मंत्रालय के कामकाज को लेकर चर्चा चल रही थी, होली के त्योहार से लेकर देखा जा रहा था कि मुस्लिम समाज को लेकर तमाम तरह के बयान दिए गए थे जो देश के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है, बार-बार कहा जाता है कि मुसलमानो में बाबर का डीएनए है, पर सवाल यह है कि आखिर बाबर को हिंदुस्तान लेकर कौन आया, मैंने वही बताया की राणा सांगा ने बाबर को बुलाया था मेरा उद्देश्य किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का नहीं है. आगरा में चल रहे विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं आंदोलन पर सुमन ने कहा कि उनकी सुबुद्धि के लिए प्रार्थना कर सकता हूं.
राणा सांगा ने पूरे देश को एक कर दिया था
राणा सांगा पर दिए बयान के बाद उनके वंशजों में जबर्दस्त आक्रोश व्याप्त है. राणा सांगा के वंशजों में आने वाले वीरमदेव सिंह कृष्णावत का कहना है कि जिस महाराणा ने 600 साल पहले राष्ट्र एकता की बात की उनके लिए ऐसी अनर्गल टिप्पणी करना कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने मेवाड़ के महाराणाओं पर टिप्पणी करने वाले नेताओं को इतिहास की जानकारी जुटाने की सलाह दी. राणा सांगा के वंशज हनुवंत सिंह बोहेड़ा ने भी कहा कि राणा सांगा ने पूरे देश को एक कर दिया था. राणा सांगा ने बाबर को कतई निमंत्रण नहीं दिया.
मेवाड़ को सॉफ्ट टारगेट ना बनाएं
उन्होंने इतिहास पर टिप्पणी करने वाले राजनेताओं को कड़ी चेतावनी दी के वे लोग मेवाड़ को सॉफ्ट टारगेट ना बनाएं. उनका कहना है कि मेवाड़ पर और यहां के राजा तथा इतिहास पर बोलकर सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करना लोगों ने अपना काम बना लिया है. दूसरी तरफ पूर्व विधायक और राणा सांगा के वंशज रणधीर सिंह भिंडर का कहना है कि इब्राहिम को राणा सांगा खुद पराजित कर चुके थे. राणा सांगा ने बाबर को भी युद्ध के मैदान में पराजित करने में सफलता प्राप्त की थी.
खाचरियावास बोले-टिप्पणी माफी योग्य भी नहीं है
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी महाराणा सांगा के बयान पर सपा सांसद को घेरते हुए कहा कि ऐसी अमर्यादित टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है. खाचरियावास ने कहा कि राणा सांगा के ”अस्सी घाव लगे थे तन पे, फिर भी व्यथा नहीं थी मन में”. मातृभूमि की रक्षा में अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पण करने वाले अदम्य साहस, वीरता, त्याग और स्वाभिमान के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा सांगा पर सासंद सुमन टिप्पणी माफी योग्य भी नहीं है. उन्होंने कहा कि सांसद पर सख्त करवाई होनी चाहिए. बकौल खाचरियावास मैं भारत सरकार से अपील करूंगा कि संसद में ऐसा प्रस्ताव लेकर आए जिससे इतिहास के महापुरुषों पर अमर्यादित टिप्पणी करने वालों की संसद सदस्यता रद्द की जा सके.







