बिहार कांग्रेस के नए प्रभारी कृष्णा अल्लावरु के आने के बाद अखिलेश सिंह की प्रदेश अध्यक्ष पद से छुट्टी हो गई है। उनकी जगह दलित समाज से आने वाले राजेश कुमार को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। सिंह लगभग 27 महीने तक इस पद पर रहे।
पद से हटने के बाद उन्होंने भास्कर को दिए इंटरव्यू में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘हमने कभी कन्हैया को बिहार आने से नहीं रोका। वह हमारे बच्चे जैसा है। हमने रोजा में ‘पलायन रोको, रोजगार दो’ यात्रा करने से मना किया था, ये बात शायद नए प्रभारी को ठीक नहीं लगी। उनको अपना अध्यक्ष बनाना था।’
सवाल- कांग्रेस को खड़ा करने का आपने कई प्रयास किया, विधानसभा चुनाव से 7 महीने पहले आपको बदल दिया गया? क्यों?
जवाब- इसका सही जवाब पार्टी आलाकमान ही देगी। इस पर हम क्या बोले। हो सकता है सोशल इक्वेशन में हम फिट नहीं बैठ रहे हो। राहुल जी की लाइन पर हम फिट नहीं हो रहे हो। नए प्रभारी दूसरे तरीके से काम कर रहे हैं।
बिहार की स्थिति में हमने उनसे रोजा में यात्रा निकालने से मना किया था, लेकिन वे जल्दी में थे। हो सकता है ये सब बात उन्हें बुरी लगी हो। ऊपर क्या बात हुई, मुझे नहीं मालूम। राहुल जी और अल्लावरु जी को मैंने कह दिया था कि अगर हम आपके खाके में सेट नहीं बैठ रहे हो तो चेंज कर दीजिए।
सवाल- नए प्रदेश प्रभारी के साथ आपकी नहीं बन रही थी, इसमें कितनी सच्चाई है?
जवाब- नहीं बनने वाली वाली जैसी कोई बात नहीं थी। एक बस यात्रा वाली बात पर मैंने मना किया था। 9 मार्च तक जिला अध्यक्षों की बैठक हुई थी। सिविल सोसाइटी और सीनियर लीडर्स की बैठक हुई। तब तक सबकुछ सामान्य था।
मेरे मना करने के बाद भी 10 मार्च को यात्रा की घोषणा हुई। ये कोई इतनी बड़ी बात नहीं है। वे अपना नया अध्यक्ष बनाना चाहते होंगे। ये उनका अधिकार भी है। इसमें कोई बुराई भी नहीं है।

सवाल- क्या राजेश राम चुनाव से 7 महीने पहले पार्टी को संभाल पाने में सक्षम हैं?
जवाब- राजेश राम पर आज मैं किसी तरह का कोई टीका टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। चुनाव बाद पता चलेगा कि वे कितने सक्षम हैं। हो सकता है वे खुद को मुझसे बेहतर साबित करे। आलाकमान ने जब भरोसा किया है, तब अच्छा ही होगा। मैं यही मान कर चलता हूं।
सवाल- आप लालू यादव के समर्थक थे, इसलिए आपको अध्यक्ष पद से हटाया गया?
जवाब- ये सच है कि हम लालू जी के साथ काम करते थे। इसे कोई झुठला नहीं सकता। लालू जी की पार्टी छोड़े मुझे 15 साल हो गया है। उस समय से हम कांग्रेस के लिए काम करते हैं। कांग्रेस पार्टी के इंट्रेस्ट को हम देखते थे। 2024 चुनाव के दौरान चर्चा थी कि राजद कांग्रेस को 4-5 सीट से ज्यादा नहीं देगा, हम 9 सीट पर चुनाव लड़े।
लोकसभा में एक सीट से तीन सीट हुआ। 10 लाख 80 हजार वोट बढ़ाए। हर सीट पर ऐवरेज एक लाख से ज्यादा वोट शेयर बढ़ाए। 2 साल से ज्यादा तो अध्यक्ष बने हो गया था। पार्टी आलाकमान को ऐसा लगा होगा कि अभी दलित को आगे करके लड़ना। मुझे लगता है कि उन लोगों ने बेहतर फैसला लिया होगा।
दिसंबर 2022 में मेरा नोटिफिकेशन हुआ था। 5 जनवरी 2023 से हमने पदयात्रा शुरू की थी और 1000 किलोमीटर तक पैदल चले थे। उस समय के बाद एक्टिविटी बढ़ी। राहुल जी आधा दर्जन से ज्यादा बार बिहार आए। उनकी रैली हुई, यात्रा हुआ। सब हम अपना करते थे।

सबकुछ AICC की मदद के बिना किए। अध्यक्ष को यात्रा का टिकट मिलता है, मैंने आज तक एक टिकट नहीं लिया। सब कुछ हम अपने रिसोर्सेज से करते थे। आगे भी करते रहेंगे। ऐसा नहीं है कि अध्यक्ष नहीं है तो नहीं करेंगे। हम पार्टी के सांसद हैं।
सवाल- आप पर आरोप लगा कि आप प्रदेश कांग्रेस पर एकछत्र राज करना चाहते थे, दो साल में कार्यसमिति का गठन तक नहीं किए?
जवाब– ये आरोप गलत है। कार्यसमिति की लिस्ट 7 महीने से पार्टी हेडक्वार्टर में पड़ी है। अध्यक्ष ने मेरी लिस्ट पर सहमति दे दी थी, उन्होंने कहा कि वेणुगोपाल जी नहीं निकाल रहे हैं। मैं उनसे भी 2-3 बार मिला। प्रखंड अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष का गठन किया, कार्यसमिति का गठन करना क्या था। वो भी कर दिए थे। सभी लोग ये बात जानते थे। नोटिफाई नहीं हुआ तो इसमें मेरी क्या गलती है।
सवाल- क्या आपने कन्हैया कुमार को बिहार आने से रोका?
जवाब- मैंने कभी कन्हैया कुमार को बिहार आने से नहीं रोका। हम नहीं चाहते थे कि रोजा में यात्रा हो, लेकिन जब तय हो गया तो पार्टी के अध्यक्ष के नाते हम यात्रा में शामिल हुए। कन्हैया से मेरा क्या, वो मेरे बच्चे जैसा है। आप कन्हैया से खुद पूछ लीजिए।

सवाल- अखिलेश सिंह की अब बिहार कांग्रेस में क्या भूमिका होगी?
जवाब- जितना संभव हो सकेगा, हर संभव कांग्रेस को मजबूत करने का प्रयास करते रहेंगे। मेरी किसी से कोई शिकायत नहीं है। पार्टी आलाकमान निर्णय करता है, किया। हम उसका स्वागत करते हैं। नए प्रेसिडेंट की हरसंभव मदद और सहयोग करेंगे, ताकि पार्टी अच्छा करे।







