पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर करीब 450 यात्रियों को बंधक बना लिया है. बीएलए की ओर से बंधक बनाये गए लोगों में पाकिस्तानी सेना, पुलिस, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकवाद निरोधक बल (एटीएफ) के कर्मचारी भी शामिल हैं. बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जहां सबसे अधिक प्राकृतिक संसाधन मौजूद है. हालांकि पाकिस्तान का यही क्षेत्र सबसे कम विकसित है.
कहां से कहां तक फैला है बलूचिस्तान
बलूचिस्तान का सबसे बड़ा हिस्सा दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान में आता है. पूरे पाकिस्तान का करीब 44 फीसदी जमीन का हिस्सा यहीं है. यह इलाका पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान तक फैला हुआ है. बलूचिस्तान का हिस्सा चरमपंथ और मानावाधिकारों के उल्लंघन से भरा रहा है. यहां के लोगों की अपनी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं के साथ-साथ विशिष्ट भाषा (बलोची) हैं. उनकी पहचान पंजाबी, सिंधी और पश्तून जैसे अन्य जातीय समूहों से अलग है.
प्राकृतिक संपदा के दुरुपयोग का आरोप
बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) बलूचिस्तान की आजादी चाहता है. यह कई जातीय विद्रोही समूहों में से सबसे बड़ा है, जिसने दशकों से पाकिस्तान सरकार से लड़ाई लड़ी है. इस संगठन का कहना है कि सरकार बलूचिस्तान के समृद्ध गैस और खनिज संसाधनों का अनुचित तरीके से दोहन कर रही है. बीएलए को पाकिस्तान, ईरान, चीन, यूनाइटेड किंगडम (यूके), संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ ने आतंकी संगठन घोषित किया है.
बलूचिस्तान में विद्रोह के इतिहास
ब्रिटिश सरकार से पाकिस्तान की आजादी के बाद से बलूचिस्तान के लोगों ने 1948 से ही अलग देश बनाने को लेकर चरमपंथी विद्रोह की शुरुआत हो गई थी. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 1950 से 1970 के बीच यहां कई चरणों में विद्रोह हुआ था. साल 2003 से पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ के कार्यकाल में यहां विद्रोही गतिविधियां काफी बढ़ी थी. उन्होंने बलूचिस्तान में चरमपंथ के खिलाफ कई अभियान चलाए थे. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों की ओर से की गई कार्रवाई में इस क्षेत्र के हजारों लोग लापता हो गए.
BLA का पाकिस्तान के खिलाफ हिंसक संघर्ष
बलूचिस्तान प्रांत में कई चरमपंथी समूह सक्रिय हैं, जिसमें से बीएलएफ और बीएलए दो प्रमुख ग्रुप हैं. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की स्थापना साल 2000 में हुई थी. बीएलए ने अब तक पाकिस्तान में कई हमलों को अंजाम दिया है. इसमें फिलहाल 6000 बलूच लड़ाके जुड़े हैं. बीएलए को बलूचिस्तान में जबरदस्त समर्थन प्राप्त है. साल 2004 में बीएलए ने पाकिस्तान के खिलाफ हिंसक संघर्ष का ऐलान किया था. इसका उद्देश्य बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करना है.
बलूचिस्तान विद्रोह में BLF की भूमिका
बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) ईरान का अलगाववादी ग्रुप है. इस संगठन पर पाकिस्तान के खिलाफ गतिविधियां चलाने का आरोप है. 1964 में सीरिया की राजधानी दमिष्क में जुम्मा खान ने BLF को बनाया था. सिस्तान और बलूचिस्तान के विद्रोह (1968-1973) में इसकी अहम भूमिका थी. बीएलएफ ने 1973-1977 के पाकिस्तान के बलूचिस्तान विद्रोह में अहम भूमिक निभाई थी. साल 2003 में इस ग्रुप का नेतृत्व अल्लाह नजर बलोच ने संभाला था. बताया जाता है कि उनके नेतृत्व में BLF बहुत मजबूत हुआ.
पाकिस्तान का दावा है कि ये दोनों संगठन ईरान और कभी-कभी अफगानिस्तान में भी अपने ठिकाने बनाते हैं. लंबे समय से पाकिस्तान ईरान सरकार पर इन समूहों के नेताओं और चरमपंथियों को पनाहगाह देने का आरोप लगाता रहा है. वहीं पाकिस्तान भारत पर बलूचिस्तान में कुछ गुटों की आर्थिक मदद करने का आरोप भी लगाता रहा है. हालांकि भारत और ईरान दोनों ही पाकिस्तान के आरोपों से इनकार किया है. बीत कुछ दिनों में इन संगठनों ने पाकिस्तान पर हमले तेज कर दिए हैं.







