राजद के युवराज व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब बिहार विधान सभा चुनाव 2025 को नए अंदाज और नए लुक के साथ लड़ना चाहते हैं। हालांकि तेजस्वी यादव ने राजद की छवि से मुक्त होने की कोशिश तो वर्ष 2020 के विधान सभा से ही शुरू कर दी थी। यह दीगर कि तब तेजस्वी यादव राज्य की सत्ता से दूर ही रहे पर बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन कर अपने तेवर का एहसास करा गए। अब फिर एक बार राजद के बदले चेहरे के साथ जनता के बीच कार्यकर्ता दर्शन सह संवाद कार्यक्रम में जा रहे तेजस्वी यादव बदलाव की एक नई बयार ले कर जा रहे हैं।
तेजस्वी अब नए तेवर में दिखने वाले हैं
राजद के युवराज तेजस्वी यादव ने राजद ने अपनी इस नये चेहरे के प्रक्षेपण काल तय किए और निकल गए कार्यकर्ता दर्शन सह संवाद यात्रा पर। तेजस्वी यादव अपने पहले चरण यानी कि 10 सितंबर से ही अपने इस अभियान में लग गए । इस कार्यक्रम के जरिए सभी जिलों में जा कर नए राजद की पहचान बनानी है जहां वे बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार के मुद्दे उठा कर नीतीश सरकार से आंख मिलाने की कोशिश कर रहे है।
क्या राजद के कार्यकर्ता लफुआ संस्कृति से बाहर निकल पाएंगे?
एक समय था जब राजद का लफुआ चरित्र समाज को परेशान करने लगा था। तब हरा गमछा उनकी एक तरह से उनकी पहचान बन गई थी। कहा जाता है कि राजद की रैली में कोई चिनिया बादाम बेचने वाला सड़क पर नहीं निकलता था। डर लगता था कि कहीं राजद कार्यकर्ता फ्री में मूंगफली की लूट न मचा दें। लेकिन तेजस्वी यादव ने नई गाइडलाइन में राजद कार्यकर्ताओं को हरे गमछे की जगह हरी टोपी और बैच लगाने के लिए कहा। यात्रा के पहले राजद के नए 9 सूत्रीय निर्देश में एक यह भी था। अपने इस नए निर्देश के जरिए तेजस्वी ‘तेल पिलावन और लाठी घुमावन’ वाली छवि से मुक्ति पाना चाहते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजद कार्यकर्ता लफुआ संस्कृति से बाहर निकल पाएंगे।
एमवाई समीकरण से AtoZ तक का सफर
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपनी राजनीत की शुरुआत ही राजद के चेहरे बदलने के साथ की। तेजस्वी यादव ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के एमवाई समीकरण की दुरुस्तगी का नया अध्याय जोड़ा, और नाम दिया एटूजेड। इस समीकरण के साथ तेजस्वी यादव ने ‘राजद सभी का है’ यह नारा दिया। तेजस्वी ने टिकट बंटवारे के जरिए चुनाव में भागीदारी का एक नया आयाम शुरू किया जहां सवर्णों को भी राजद में तरजीह दी गई।
जदयू और भाजपा के कोर वोट पर हमला
राजद के कोर वोट की पहचान जैसे एमवाई से है, वैसे ही जनता दल यू के कोर वोट बैंक लव कुश, तो भाजपा का वैश्य और सवर्ण है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के प्लेटफार्म से इस वोट बैंक को टार्गेट किया। लोकसभा चुनाव 2024 की ही बात करें तो राजद ने कुशवाहा जाति से आनेवाले अभय कुशवाहा को तोड़ा और राजपूत का गढ़ कहे जाने वाला औरंगाबाद पर जीत हासिल कर जीत का समीकरण बदल दिया। आरा से सीपीआई माले के सुदामा प्रसाद को महागठबंधन से खड़ा कर राजद ने अपनी पूरी ताकत लगा कर भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री आर के सिंह को हरा डाला। लेकिन असल सवाल यही है कि तेजस्वी के वादे पर सवर्ण कितना यकीन करेंगे? सबसे बड़ी बात कि लफुआ कल्चर वाले राजद के उन नेताओं पर लोग कितना यकीन करेंगे जिन्होंने लालू राज में सवर्णों को तंग तबाह कर रखा था।
अचेतन CM की अगुवाई में अब सांसद पर हमला
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सासाराम से कांग्रेस सांसद मनोज कुमार पर हमले को लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साधा है। तेजस्वी ने कहा कि ‘बिहार में जातिवादी गुंडों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ है कि एक दलित वर्ग के सांसद पर लाठी-डंडों और पत्थरों से जानलेवा हमला कर उनका सिर फोड़ दिया। अचेतन CM की अगुवाई में अब सांसद पर हमला भी एक सामान्य घटना हो गई। बिहार के CM बेसुध और अचेत अवस्था में है उन्हें प्रशासन, विधि व्यवस्था, न्याय और लोकलाज का अब कोई बोध ही नहीं रहा।’







