राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 85वें अखिल भारतीय पीठासीन पदाधिकारी सम्मेलन के समापन भाषण में पीठासीन अधिकारियों को ऋगवेद.., गीता.., राम.., आदि शंकराचार्य…, वैशाली.. का मर्म विस्तार से समझाया। अपने 27 मिनट के संबोधन में सतयुग से लेकर कलियुग तक के कई उद्धरणों, श्लोकों, मुहावरों से देश की सांस्कृतिक-राजनीतिक विरासतों की याद दिलाई।
कहा- राजनीति का मतलब त्याग की क्षमता, ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा, उच्च संस्कार, उत्तम चरित्र के साथ-साथ सभी लोगों को समाने वाला दिल होना चाहिए। तभी आम आदमी का कल्याण होगा। धर्म व संविधान की व्याख्या की। कहा-स्वार्थ और आत्मसंग्रह के नहीं, लोक कल्याण और लोक संग्रह के लिए काम करना ही राजनीति है। स्वार्थ की पूर्ति के लिए मेहनत अज्ञानता है। भगवान राम ने लोक आराधना के लिए माता सीता के त्याग का अनुपम उदाहरण रखा है जो भारत का आदर्श है।
राज्यपाल ने बताया कि प्राचीन 5 सभ्यताओं में ईरान वैभव, चीन विकास, तुर्की बहादुरी, रोम सौंदर्य से संबंधित है तो ज्ञान व प्रज्ञा संवर्द्धन भारत की संस्कृति है। लोकतांत्रिक गणराज्यों की उत्पत्ति वैशाली से हुई, जहां शासकों को जनता चुनती थी। आदि शंकराचार्य ने देश के चार भागों में चार मठों की स्थापना कर चारों वेदों से महावाक्य दिया, वह है…मानव की एकता।
राज्यपाल बोले… संविधान निर्माण में बिहार की बड़ी भूमिका
देश की आजादी के बाद संविधान सभा के प्रथम अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा, स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा, श्रीकृष्ण सिन्हा, दरभंगा महाराजा कामेश्वर सिंह, जगत नारायण लाल, जयपाल सिंह, बाबू जगजीवन राम, राम नारायण सिंह और ब्रजेश्वर प्रसाद ने संविधान निर्माण में बहुमूल्य योगदान दिया। सभी बिहार से थे। आज के पीठासीन पदाधिकारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा के संरक्षक हैं और उन पर महती जिम्मेदारी है।
हिंदी-अंग्रेजी में अनुवाद के बाद एक प्लेटफार्म पर लाए जाएंगे डिबेट: बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि राज्य की विधानसभाओं के डिबेट हिंदी-इंग्लिश में अनुवाद करने के बाद एक प्लेटफार्म पर लाए जाएंगे। 1947 से लेकर अब तक संसद की सारी डिबेट देश की 22 मान्य भाषाओं में अनुवाद होंगे। राज्यों की विधानसभाओं के अंदर हम वन नेशन वन लेजिस्लेटिव प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहे हैं। पटना में लिए गए संकल्प आने वाले समय में संवैधानिक मूल्यों को सशक्त करेंगे। नई टेक्नोलॉजी का उपयोग करना, जनता की भागीदारी बढाना, विधायी संस्थाओं की उत्पादकता को बढ़ाने के संकल्प के साथ हम यहां से जा रहे हैं।
प्रश्नकाल बाधित न हो इसके लिए क्या कड़े नियम बनेंगे? इसके उत्तर में बिरला ने कहा- नियोजित गतिरोध नहीं होना चाहिए। ये अच्छा नहीं है। सदन की बैठकों की घटती संख्या को रोकने की कार्ययोजना बनेगी। रिसर्च एंड रेफरेंस विंग का गठन होगा। हमने स्थानीय व शहरी निकायों, सहकारी व शिक्षण संस्थाओं तक संवैधानिक मूल्यों को पहुंचाने का अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
राज्यपाल ने 27 मिनट के धारा प्रवाह संबोधन में ऋग्वेद, गीता, राम, आदि शंकराचार्य…, के उदाहरणों से पॉलिटिकल कर्तव्यबोध का मर्म पीठासीन अधिकारियों को समझाया। कहा-
।। यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रित: | मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्या: पार्थ सर्वश:।।
धर्म : लोक में सभ्य जीवन जीने के लिए बनाए गए नियमों का पालन ही धर्म है।
त्याग : लोक आराधना के लिए भगवान राम ने माता सीता का त्याग किया, यही भारत का आदर्श।
संस्कृति : ज्ञान व प्रज्ञा संवर्द्धन भारत की संस्कृति है, गणराज्यों की उत्पत्ति वैशाली है।
संविधान: भारतीय संविधान कानूनी दस्तावेज नहीं, देश के आदर्शों और उद्देश्यों का प्रतीक है।
दायित्व: पीठासीन पदाधिकारियों पर लोकतांत्रित संस्थाओं की प्रतिष्ठा रखने की जिम्मेदारी है।
अर्थात… भगवान कृष्ण कहते हैं-यदि वह निष्क्रिय और आलसी हो जाते, तो सम्पूर्ण मानव जाति भी ऐसा ही करने लगती, इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि वे हमेशा सक्रिय और कर्मशील बने रहें। श्रीमद् भागवत गीता, अध्याय-3, श्लोक-23
कर्म : राज्यपाल ने इस श्लोक से समझाया कि नेतृत्व और आदर्शवाद का बहुत बड़ा महत्व है, क्योंकि जब लोग अपने नेताओं का अनुसरण करते हैं, तो वे समाज को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
लोकलुभावन खर्चों से दूर रहने के लिए नए सिरे से राजनीतिक सहमति बनानी होगी
इसमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने विधायकों को सदन में अपने आचरण पर आत्मचिंतन करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि हम आर्थिक शक्ति बनना चाहते हैं, तो हमें लोकलुभावन खर्चों से दूर रहने के लिए नए सिरे से राजनीतिक सहमति बनानी होगी।
प्रधानमंत्री ने 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य रखा है। जब सभी राज्य सामूहिक रूप से आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगे, तभी यह साकार होगा। अक्सर बजट के अधिक आवंटन की मांग के बारे में हमने विधायिका की बहसों में सुना है, लेकिन खर्च के लिए धन कहां से आए? राजस्व कैसे बढ़ाया जाए, इस पर शायद ही विधायिका में कोई सुझाव रखता है।
उन्होंने कहा कि पुराने समय में भारी बहुमत वाली सरकारें हुआ करती थीं। फिर भी विपक्ष में चुने हुए सदस्य अपने विचार प्रभावी ढंग से रखने और अपनी असहमति को गरिमापूर्ण तरीके से प्रस्तुत करने में सक्षम थे। आज व्यवधान की प्रकृति दर्शाती है कि हम सम्मानपूर्वक असहमति जताना भूल गए हैं।
भारत का संविधान लचीला रहा है और समय की जरूरतों के अनुकूल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि विधानमंडलों को संविधान के इस विकास को एक सतत प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए और भविष्य के लिए कानूनों पर भी विचार-विमर्श करना चाहिए। आर्थिक विकास के लिए पार्टियों के बीच राजनीतिक सहमति होनी चाहिए और देश की वित्तीय सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा की तरह ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सम्मेलन में ये पांच संकल्प लिये गए
1. संविधान निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धांजलि।
2. संविधान में निहित मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप सदन का संचालन करने का संकल्प।
3. विधायी संस्थाओं में बाधा रहित एवं व्यवस्थित चर्चा, श्रेष्ठ संवाद का संकल्प।
4. संविधान के 75 वर्ष पूरे होने पर वर्ष भर अभियान व कार्यक्रम चलाने का संकल्प।
5. टेक्नॉलॉजी व एआई के उपयोग से प्रभावी सेवाएं सुनिश्चित करने का संकल्प।
हमारे कार्य संविधान के मूल्यों के अनुरूप हों : नंदकिशोर
विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने कहा कि यह सम्मेलन निश्चित रूप से पीठासीन अधिकारियों को सदन की कार्यवाही को अधिक सुचारू रूप से संचालित करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। हमें सुनिश्चित करना होगा कि हमारे कार्य संविधान के मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप हों।
सम्मेलन का एजेंडा था- ‘संविधान की 75वीं वर्षगांठ: संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में संसद और राज्य विधान निकायों का योगदान’। इसमें 23 विधान निकायों के 41 पीठासीन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधानमंडल में नेवा सेवा केंद्र का उद्घाटन किया। सम्मेलन में विस उपाध्यक्ष नरेन्द्र नारायण यादव, विधान परिषद् के उप सभापति प्रो. रामवचन राय भी शामिल थे।
युवाओं और महिलाओं की अभिरुचि राजनीति में बढ़ी है : विजय सिन्हा
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि संविधान की मूल प्रति में सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर आधुनिक काल तक के हमारे ऐतिहासिक कालखंडों की झलक चित्रों के रूप में उत्कीर्ण हैं। वैदिक सभ्यता में प्रजातंत्र, जनतंत्र और लोकतंत्र का उल्लेख मिलता है।
अंग्रेजी में इन तीनों के लिए एक ही शब्द डेमोक्रेसी है। हमारे शास्त्र में उल्लिखित इन तीनों शब्दों के तीन निहितार्थ हैं। इसमें प्रजातंत्र, जनतंत्र और लोकतंत्र है। भारत सही मायने में लोकतंत्र की जननी रहा है। हमारे युवाओं और महिलाओं की अभिरुचि राजनीति तथा विधायी विषयों में बढ़ी है।
देश में पहली बार विधान परिषद में नेवा एप्लिकेशन लागू किया गया : अवधेश नारायण सिंह
विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि 21वीं सदी की सामाजिक और राजनैतिक व्यवस्था में विचारधारा के साथ विज्ञान एवं तकनीक का भी हस्तक्षेप हो गया है। हमें विज्ञान एवं तकनीक का समावेश अपने राजनीतिक कार्य कलापों में करने से संकोच नहीं करना चाहिए।
पीएम नरेंद्र मोदी ने नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन की शुरुआत की थी, ताकि संसदीय कार्यवाहियों को अधिक पारदर्शी एवं डिजिटल बनाया जा सके। बिहार विधान परिषद देश का पहला सदन है, जिसने नेवा एप्लिकेशन को सबसे पहले लागू किया।







