बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी ‘प्रगति यात्रा’ के दूसरे चरण की शुरुआत आज ( 4 जनवरी ) से गोपालगंज से कर रहे हैं। इस यात्रा में वे कई जिलों का दौरा करेंगे, विकास कार्यों का जायजा लेंगे, योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे और जनता से संवाद करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब प्रदेश में सियासी हलचल तेज है और नीतीश कुमार के राजनीतिक रुख को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं। आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के नीतीश की वापसी पर ‘माफी’ वाले बयान ने इस हलचल को और बढ़ा दिया है, जबकि तेजस्वी यादव ने नीतीश के लिए दरवाजे बंद होने की बात कही है।
पूर्व प्रधानमंत्री के निधन के कारण स्थगित कर दी गई थी यात्रा
बता दें कि पहले यह यात्रा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन के कारण स्थगित कर दी गई थी। इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न जिलों में विकास परियोजनाओं का निरीक्षण और समीक्षा करेंगे। साथ ही, नई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। यात्रा का मुख्य उद्देश्य विकास कार्यों की प्रगति का आकलन करना और आम लोगों की समस्याओं को समझना है।
यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम इस प्रकार है
4 जनवरी को गोपालगंज से शुरुआत, 5 जनवरी को मुजफ्फरपुर, 6 जनवरी को वैशाली, 7 जनवरी को सीवान, 8 जनवरी को सारण, 11 जनवरी को दरभंगा, 12 जनवरी को मधुबनी और 13 जनवरी को समस्तीपुर। हर जिले में विकास कार्यों की समीक्षा बैठकें और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। इस दौरान कई परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया जाएगा।
बिहार की सियासत में उथल-पुथल
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब बिहार की राजनीति में काफी उथल-पुथल मची हुई है। नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने हाल ही में एक बयान दिया था जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। लालू यादव ने कहा था कि अगर सीएम नीतीश वापस आते हैं तो उनका स्वागत होगा। उन्होंने आगे कहा था कि माफ करना उनका फर्ज है और वो सब भूल कर सीएम नीतीश को अपने साथ रख लेंगे। उनके लिए दरवाजा खुला है।
लालू दरवाजा खोले तो तेजस्वी ने किया बंद!
लालू यादव के इस बयान के बाद विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने अलग रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि अब सीएम नीतीश के साथ जाना यानी अपनी पैर पर कुल्हाड़ी मारना होगा। सीएम नीतीश के लिए दरवाजे अब बंद है। दो नेताओं के अलग-अलग बयान इस सियासी उठापटक को और दिलचस्प बना दिया है। ऐसे में नीतीश कुमार की यह ‘प्रगति यात्रा’ और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस यात्रा के दौरान नीतीश कुमार जनता के सामने क्या संदेश देते हैं और उनकी राजनीतिक रणनीति क्या रहती है।







