संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा में संविधान पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खड़े हुए और अपनी बात रखने लगे। बात रखने के दौरान ही अमित शाह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए बाबा साहब भीम राव आंबेडकर को लेकर बयान दिया। जिसके बाद तो मानों तूफान आ गया। सभी विपक्षी पार्टियों ने एक साथ अमित शाह और बीजेपी पर हमला बोलना शुरू कर दिया। एक ओर राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़ने ने अमित शाह ने माफी मांगने के साथ उनके इस्तीफे की मांग कर दी। तो वहीं यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों पर हमला बोला है।
भगवान का नाम लेते तो स्वर्ग मिल जाता
दरअसल बीती शाम राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा था कि आज कल बाबा साहब आंबेडकर का नाम लेना एक फैशन बन गया है। हर बात में बाबा साहब का नाम आंबेडकर-आंबेडकर-आंबेडकर-आंबेडकर लिया जाने लगा है। इतना ही नाम अगर भगवान का लेते तो स्वर्ग मिल जाता। शाह के इसी बयान के बाद विपक्षी दलों ने शाह पर हमला बोलते हुए आज संसद में प्रदर्शन भी किया।
आंबेडकर के साथ डॉफ्ट कमेटी का भी अपमान-ममता
शाह के बयान पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी मुखिया ममता बनर्जी ने इसको संविधान पर हमला बताया। बनर्जी ने कहा, ‘अमित शाह की टिप्पणी न केवल बीआर अंबेडकर बल्कि संविधान की ड्राफ्ट कमेटी के सभी सदस्यों का अपमान है। अमित शाह की टिप्पणी उन लाखों लोगों का अपमान है जो मार्गदर्शन और प्रेरणा के लिए बीआर अंबेडकर की ओर देखते हैं।’
RSS के इशारे पर शाह ने दिया बयान-उद्धव
वहीं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शिवसेना UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई में कहा, ‘डॉ बाबासाहेब आंबेडकर पर अमित शाह की टिप्पणी बीजेपी के अहंकार को दर्शाती है और उसका असली चेहरा उजागर करती है। पीएम मोदी को डॉ बाबासाहेब आंबेडकर पर की गई टिप्पणी के लिए अमित शाह के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।’
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इसके साथ ही ठाकरे ने अमित शाह के इस बयान को लेकर आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस के समर्थन के बिना अमित शाह डॉ आंबेडकर के बारे में टिप्पणी करने की हिम्मत नहीं कर पाते।
बीजेपी कांग्रेस को राजनीतिक रोटी सेंकनी बंद करनी चाहिए-मायावती
मायावती ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों पर निशाना साधा। मायावती ने कहा, ‘कांग्रेस व बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोगों को बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने की बजाय, उनका पूरा आदर-सम्मान करना चाहिये।
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इन पार्टियों के लिए इनके जो भी भगवान हैं उनसे बीएसपी को कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन दलितों व अन्य उपेक्षितों के लिए एकमात्र इनके भगवान केवल बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर हैं, जिनकी वजह से ही इन वर्गों को जिस दिन संविधान में कानूनी अधिकार मिले हैं, तो उसी दिन इन वर्गों को सात जन्मों तक का स्वर्ग मिल गया था।’
बीजेपी वाले शुरू से ही बदलना चाहते थे संविधान-राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “यह संविधान के खिलाफ है। बीजेपी वाले शुरू से कह रहे थे कि वे संविधान बदल देंगे। वे आंबेडकर जी और उनकी विचारधारा के खिलाफ हैं।” इनका एक ही काम है संविधान को खत्म करना और अंबेडकर जी ने जो काम किया ये पूरा देश जानता है।”
अमित शाह के बयान के बाद विपक्षी पार्टियों द्वारा हो रहे हमले के दौरान ही पीएम मोदी ने कांग्रेस पार्टी पर जोरदार हमला बोला। मोदी ने कहा कि आंबेडकर को कांग्रेस ने दो बार चुनाव हरवाया था।
अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर… भगवान का नाम लेते तो स्वर्ग…
डॉ. भीमराव अंबेडकर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है. मंगलवार (17 दिसंबर, 2024) को राज्यसभा में उन्होंने संबोधन दिया और बाबा साहब और मंत्रिमंडल से उनके इस्तीफे पर भी बात की. उनके इसी संबोधन को लेकर विपक्ष भड़का हुआ है और जो बातें अमित शाह ने स्पीच में कहीं उसे अंबेडकर का अपमान बता रहा है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि विपक्ष अमित शाह के पूरे भाषण को छिपा रहा है और एक छोटे हिस्से को काटकर गलत तरीके से फैला रहा है.
पीआईबी फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमित शाह के भाषण का क्लिप्ड और फुल वीडियो शेयर किया है. क्लिप्ड वीडियो में अमित शाह कह रहे हैं, ‘अभी एक फैशन हो गया है. अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर… इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता है.’ इसी वाक्य के बाद कट लगा है और उनके भाषण का यही हिस्सा वायरल हो रहा है.
फुल वीडियो में इसके आगे का हिस्सा है, जिसमें अमित शाह कह रहे हैं, ‘हमें तो आनंद है कि अंबेडकर का नाम लेते हैं. अंबेडकर का नाम अभी 100 बार ज्यादा लो परंतु साथ अपने अंबेडकर जी के प्रति आपका भाव क्या है, ये मैं बताता हूं. अंबेडकर जी ने देश की पहली कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दे दिया? अंबेडकर जी ने कई बार कहा कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों से हुए व्यवहार से मैं असंतुष्ट हूं. सरकार की विदेश नीति से मैं असहमत हूं और आर्टिकल 370 से मैं असहमत हूं इसलिए मैं मंत्रिमंडल छोड़ना चाहता हूं. उन्हें आश्वासन दिया गया. आश्वासन पूरा नहीं हुआ तो उन्होंने इग्नोरेंस के चलते इस्तीफा दे दिया.’
अमित शाह ने आगे कहा, ‘बी. सी. रॉय ने पत्र लिखा कि अंबेडकर और राजा जी जैसे दो महानुभव मंत्रिमंडल छोड़ेंग तो क्या होगा, इसके जवाब में नेहरू जी ने लिखा है- राजा जी के जाने से तो थोड़ा बहुत नुकसान होगा, अंबेडकर के जाने से मंत्रिमंडल कमजोर नहीं होता है. मल्लिकार्जुन खरगे जी कह रहे हैं न कि क्या आपत्ति है. जिसका विरोध करते हो उसका वोट के लिए नाम लेना कितना उचित है. क्योंकि अब अंबेडकर जी को मानने वाले पर्याप्त संख्या में आ गए हैं इसलिए आप अंबेडकर, अंबेडकर कर रहे हों.
उन्होंने कहा, ‘मान्यवर मुंबई के मेयर ने एक पत्र लिखा था कि मऊ में अंबेडकर जी का स्मारक बनाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया. मऊ अंबेडकर जी का जन्म स्थान था. उन्होंने लिखा कि आमतौर पर स्मारक निजी पहल से बनाने चाहिए. अगर सरकार किसी प्रकार की सहायता करती है तो वो उचित नहीं होगा. अंबेडकर जी का कोई स्मारक नहीं बना, देश में नहीं बना.’
अमित शाह ने आगे बताया कि बीजेपी की सरकार में कितने स्मारक बनाए गए हैं. उन्होंने कहा, ‘अंबेडकर जी के स्मारक तब बने जब भारतीय जनता पार्टी केंद्र में आई. मऊ में अंबेडकर जी के जन्म स्थान में स्मारक बना. लंदन में जहां अध्ययन करते थे वहां स्मारक बना, नागपुर में शिक्षा-दीक्षा ली वहां स्मारक बना, दिल्ली में महापरिनिर्वाण स्थल पर बना और मुंबई में चैत्य भूमि में भी बन रहा है. हमने पंचतीर्थ बनाए हैं. मान्यवर मैं मानता हूं कि अंबेडकर जी के सिद्धांतों पर चलना नहीं और वोट के लिए उनकी गुहार लगा देना. 14 अप्रैल को राष्ट्रीय समरसता दिवस घोषित किया हमने. 26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित किया, उस वक्त भी इसका विरोध कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने किया.’ इस पर विवाद बढ़ने के बाद अमित शाह ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उनके भाषण का पूरा वीडियो दिखाया जाना चाहिए.







