6 दिसंबर को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सीट नम्बर 222 से नोटों की गड्डी मिलने का ऐलान किया। सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की सीट से नोटों की गड्डी मिली है।
कल (गुरुवार) सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने हमें जानकारी दी कि सीट नंबर 222 से कैश मिला है। इस मामले में नियमों के मुताबिक जांच होनी चाहिए और यह हो भी रही है।
राज्यसभा में सीट नम्बर 222 कांग्रेस के सासंद अभिषेक सिंघवी को अलॉट है। सिंघवी तेलंगाना राज्य से सासंद हैं। नोट मिलने के आरोप पर अभिषेक सिंघवी ने सफाई देते हुए कहा कि यह नोटों की गड्डी उनकी नहीं है। सिंघवी ने कहा,
मैं इसके बारे में सुनकर ही हैरान हूं। मैंने ऐसा पहली बार सुना है। मैं सदन में 12:57 बजे पहुंचा था। 1 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। 1 बजे से 1:30 बजे तक मैंने अयोध्या प्रसाद के साथ कैंटीन में बैठकर लंच किया। इसके बाद मैं संसद से चला गया। इसलिए सदन में मेरा कुल ठहराव 3 मिनट का था और कैंटीन में मेरा ठहराव 30 मिनट का था।
कांग्रेस सांसद मलिल्कार्जुन खड़गे ने विरोध जताते हुए कहा कि जांच से पहले सभापति धनखड़ को किसी सांसद का नाम नहीं लेना चाहिए। यह संसद की गरिमा के खिलाफ है। खड़गे ने संसद में कहा, मैं अनुरोध करता हूं कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और घटना की प्रामाणिकता स्थापित नहीं होती, तब तक किसी सदस्य का नाम नहीं लिया जाना चाहिए। ऐसा चिल्लर काम करके ही देश को बदनाम किया जा रहा है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति धनखड़ से जांच की मांग की।
सदन में खड़गे के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि ‘मुझे भरोसा है कि मामले की विस्तृत जांच होगी और दूध का दूध, पानी का पानी होगा।’
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का कहना है कि नोटों के बंडल मिलने पर किसी सांसद का नाम लेने से कांग्रेस को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। सभापति धनखड़ ने सही तरीके से उस सीट नंबर और उस सीट पर बैठे सदस्य का नाम बताया। इसमें क्या गलत है?
भाजपा प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि, ‘कांग्रेस नेताओं के पास इतना पैसा है कि वे संसद में बेंच पर बचे हुए पैसे का हिसाब लेने की भी जहमत नहीं उठाते। कांग्रेस, जो हर चीज पर सवाल उठाती थी, आज संसद से बरामद मामले का हिसाब देने से इनकार कर रही है।’
इस मामले में आगे क्या होगा?
लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी अचार्य के मुताबिक, ‘नोट की गड्डी का मामला भारत की जांच एजेंसियों को सौंपा जा सकता है। यह केस अज्ञात के नाम पर दर्ज किया जाएगा और इसकी जांच इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, दिल्ली पुलिस या इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) करेगी। सबसे पहले नोटों के नम्बरों की जांच होगी। नम्बरों से पता लगाया जाएगा कि यह गड्डी किस बैंक से निकाली गई है। बैंक से जांच के बाद पता चल जाएगा कि यह गड्डी किसकी है।’
क्या संसद में ज्यादा कैश ले जाने पर कार्रवाई हो सकती है?
पीडीटी अचार्य के मुताबिक, संसद में कैश लेकर जाने का कोई नियम नहीं है। लेकिन संसद में एंट्री के कुछ प्रोटोकोल होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है। सांसद सदन में डॉक्यूमेंट्स, उससे जुड़े रिफरेंस, मोबाइल, लैपटॉप जैसी चीजें अपने साथ ले जा सकते हैं, लेकिन ज्यादा कैश, रिकॉर्डिंग डिवाइसेस, हथियार ले जाने पर पाबंदी है।
संसद भवन में प्रवेश से पहले सभी सांसदों, कर्मचारियों और सिक्योरिटी गार्ड्स को सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है। इसमें उनके बैग, पर्स और अन्य सामान की जांच की जाती है। अगर किसी सांसद के पास बड़ी धनराशि मिलती है, तो उसे घोषित किया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई सांसद ज्यादा कैश लेकर संसद भवन में जाता है, तो इसकी जानकारी डेटा के तौर पर रखी जाती है।
पीडीटी आचारी का कहना है कि ‘अगर कोई सांसद किसी खास उद्देश्य से कैश लेकर जाता है, तो उसे इसकी वजह बतानी पड़ती है। जैसे कि वे इस कैश को कैसे और कहां खर्च करेगा। लेकिन अगर यह कैश सार्वजनिक कामों या हेरफेर में इस्तेमाल किया जाता है, तो वे सांसद जवाबदेह हो जाता है।’
अगर कैश ले जाना अपराध नहीं, तो फिर जांच किस बात की होगी?
मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदेव इसरानी के मुताबिक, सदन के अंदर और बाहर सभी जगह कैमरे लगे रहते हैं। इसके बावजूद सीट के नीचे नोटों की गड्डी मिलना गंभीर मुद्दा है। इसलिए जांच की जाएगी कि नोटों की गड्डी किसने रखी है। अगर कोई सांसद लेकर नहीं आया, तो फिर अज्ञात व्यक्ति कैसे सदन में गड्डी को रखकर चला गया।
भगवानदेव इसरानी का कहना है कि ‘अगर किसी सांसद ने ही नोट रखे, तो उस पर सदन में कार्यवाही की जाएगी, लेकिन अगर किसी सांसद ने यह काम नहीं किया तो फिर संसद भवन की सुरक्षा में बड़ी चूक है। आज नोटों की गड्डी मिली है, कल कुछ और भी मिल सकता है।’
क्या इस पूरे हंगामे के पीछे कोई राजनीति भी है?
भगवानदेव इसरानी के मुताबिक, राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते हैं, लेकिन इस तरह सदन में नोटों का मिलना बहुत बड़ा मामला है। मुमकिन है कि राजनीतिक छवि खराब करने की साजिश हो या किसी व्यक्ति से गलती से नोटों की गड्डी गिर गई। इस मामले में साफ तौर पर राय नहीं दी जा सकती है। जांच के बाद ही साफ होगा कि कोई आरोपी है या नहीं।
कांग्रेस ने नोट के बंडल को अडाणी मुद्दे से ध्यान भटकाने की साजिश बताई है। कांग्रेस का कहना है कि अगर कोई जेब में 50,000 रुपए रखता है तो यह कोई अपराध नहीं है। कांग्रेस नेताओं ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ से मुलाकात की है और इस मामले की किसी एजेंसी से जांच कराने या यहां तक कि इसमें संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित करने की मांग की है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष पर ‘फर्जी बयानों’ के जरिए संसद को बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘कभी कांग्रेस गौतम अडाणी के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच के लिए तो कभी नोटों की गड्डी मिलने पर JPC की मांग करने लगती है। कांग्रेस विदेशी रिपोर्ट के आधार पर चीजें पेश करती है और सदन की चर्चा को ठप कर देती है।’
क्या पहले कभी संसद में नोटों की गड्डियों का मामला उठा?
संसद में सीट के नीचे नोटों की गड्डी मिलने का यह पहला मामला है, जिसमें कोई सामने नहीं आया। हालांकि, इससे पहले संसद में नोटों की गड्डियां लहराई जा चुकी हैं। 2008 में मनमोहन सिंह की सरकार को परमाणु समझौते के मुद्दे पर सदन में विश्वासमत हासिल करना था। इस दौरान भाजपा के तीन सांसद अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा नोटों की गड्डी निकालकर हवा में लहराने लगे थे।
सांसदों ने मनमोहन सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने विश्वास मत हासिल करने के लिए उन्हें घूस देने की कोशिश की थी। इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। इसे ‘नोट फॉर वोट स्कैम’ के नाम से भी जाना जाता है।







