विदेश मंत्री एस जयशंकर आज पाकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे। इस दौरान वे राजधानी इस्लामाबाद में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के देशों की समिट में हिस्सा लेंगे। भारत SCO का सदस्य देश है।
समिट की मेजबानी कर रहे पाकिस्तान ने अगस्त में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता भेजा था। हालांकि भारत की ओर से प्रधानमंत्री के बजाय विदेश मंत्री समिट में शामिल होंगे। जयशंकर वहां 24 घंटे से भी कम समय बिताएंगे। इससे पहले जयशंकर ने कहा था कि उनके पाकिस्तान जाने का मकसद सिर्फ SCO की बैठक है, दोनों देशों के रिश्तों पर कोई भी बातचीत नहीं होगी।
भारत के अलावा रूस और चीन समेत 8 देशों के प्रतिनिधि भी इस समिट में शामिल होंगे। इसके मद्देनजर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए इस्लामाबाद में लॉकडाउन लगा दिया गया है। साथ ही पूरे शहर में 3 दिन के लिए छुट्टी की घोषणा कर दी गई है।

9 साल बाद पाकिस्तान के दौरे पर भारतीय मंत्री विदेश मंत्री जयशंकर का यह दौरा इसलिए भी खास है कि 9 साल में पहली बार कोई भारतीय मंत्री पाकिस्तान के दौरे पर जा रहा है। इससे पहले 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान का दौरा किया था।
तब मोदी एक सरप्राइज विजिट पर लाहौर पहुंचे थे। उन्होंने पाकिस्तान के PM नवाज शरीफ से मुलाकात की थी। उनके इस दौरे के बाद से भारत के किसी भी प्रधानमंत्री या मंत्री ने पाकिस्तान की यात्रा नहीं की है।
2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। तब से दोनों देशों के बीच कोई हाई-लेवल बैठक नहीं हुई है। हालांकि पिछले साल गोवा में SCO देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान तत्कालीन विदेशमंत्री बिलावल भुट्टो भारत आए थे।
9 सालों बाद भारतीय विदेश मंत्री की पाक यात्रा
दोनों पक्ष पहले ही एससीओ शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन के इतर जयशंकर और उनके पाकिस्तानी समकक्ष इशाक डार के बीच किसी भी द्विपक्षीय वार्ता से इनकार कर चुके हैं। तकरीबन 9 साल बाद यह पहली बार होगा कि भारत के विदेश मंत्री पाकिस्तान की यात्रा करेंगे। भले ही कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान से उत्पन्न होने वाले सीमा पार आतंकवाद को लेकर दोनों पड़ोसियों के बीच संबंध ठंडे पड़े हैं।
15-16 अक्टूबर को एससीओ बैठक
जानकारी के मुताबिक, जयशंकर 24 घंटे से भी कम समय के लिए पाकिस्तान में रहेंगे। पाकिस्तान 15 और 16 अक्टूबर को एससीओ काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट (CHG) की बैठक की मेजबानी कर रहा है।
2015 में सुषमा स्वराज गईं थीं पाकिस्तान
पाकिस्तान जाने वाली आखिरी भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज थीं। वह अफगानिस्तान पर एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिसंबर 2015 में इस्लामाबाद गई थीं। अगस्त में पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एससीओ शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया था। जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे भारत सरकार के अहम फैसले के तौर पर देखा जा रहा है।
सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
एक कार्यक्रम में अपने हालिया संबोधन में जयशंकर ने कहा, ‘किसी भी पड़ोसी की तरह भारत निश्चित रूप से पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखना चाहेगा। लेकिन सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज करने और इच्छाधारी सोच बरकरार रखने से ऐसा नहीं हो सकता।’
पुलवामा अटैक के बाद से रिश्तों में दरार
बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में फरवरी 2019 में भारत के युद्धक विमानों द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर पर हमला करने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध गंभीर तनाव में आ गए। भारत ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर की विशेष शक्तियों को वापस लेने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने की घोषणा के बाद संबंध और खराब हो गए।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद और बिदका पाकिस्तान
अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कम कर दिया। भारत कहता रहा है कि वह पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंधों की इच्छा रखता है, जबकि इस बात पर जोर देता रहा है कि इस तरह के जुड़ाव के लिए आतंक और शत्रुता से मुक्त वातावरण बनाने की जिम्मेदारी इस्लामाबाद पर है।
2023 में बिलावल भुट्टो आए थे भारत
पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने मई 2023 में गोवा में एससीओ देशों के विदेश मंत्रियों की एक व्यक्तिगत बैठक में भाग लेने के लिए भारत का दौरा किया था। यह लगभग 12 सालों बाद किसी पाकिस्तानी विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा थी।







