मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू ने आज 6 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक भारत की एक खास राजकीय यात्रा पर आएंगे। मुइज्जू की ये भारत की पहली द्विपक्षीय यात्रा होने वाली है। इससे पहले वे बीते जून 2024 में प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे थे।
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू आज से पांच दिन की भारत यात्रा पर आएंगे जिसका उद्देश्य पिछले साल नवंबर से तनाव में चल रहे रिश्तों को फिर से संवारना है। चीन के प्रति झुकाव रखने वाले मुइज्जू के नवंबर में राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से ही भारत और मालदीव के बीच संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था।मुइज्जू ने शपथ लेने के कुछ ही घंटे के भीतर अपने देश से भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी की मांग की थी। इसके बाद भारतीय सैन्यकर्मियों की जगह वहां के नागरिकों ने ले ली थी।
इससे पहले विदेश मंत्रालय ने मुइज्जू की यात्रा की घोषणा करते हुए कहा था कि इससे सहयोग को और रफ्तार मिल सकती है तथा दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों में मजबूती आ सकती है। उसने कहा, ‘‘मालदीव गणराज्य के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू छह अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक राजकीय यात्रा पर भारत आएंगे।”
इस बाबत विदेश मंत्रालय के अनुसार मुइज्जू इस यात्रा में मोदी से आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पर बातचीत करेंगे। मुइज्जू इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात कर सकते हैं।
इसके साथ ही वह दिल्ली के अलावा मुंबई और बेंगलुरु भी जाएंगे जहां वह औद्योगिक समारोहों में भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का प्रमुख समुद्री पड़ोसी है और प्रधानमंत्री के ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के दृष्टिकोण और भारत की ‘पड़ोस प्रथम नीति’ में एक विशेष स्थान रखता है।”
जानकारी दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बीते अगस्त में मालदीव की तीन दिवसीय यात्रा की थी जिसमें मुइज्जू की आगामी यात्रा का आधार तैयार किया गया था। मंत्रालय ने कहा था कि, ‘‘विदेश मंत्री की हाल की मालदीव यात्रा के बाद राष्ट्रपति मुइज्जू की भारत यात्रा इस बात का प्रमाण है कि भारत मालदीव के साथ अपने संबंधों को कितना अधीक महत्व देता है।”
भारत की ‘पड़ोसी पहले नीति’ में एक विशेष स्थान
बता दें कि मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में भारत का प्रमुख समुद्री पड़ोसी है और प्रधानमंत्री के ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के दृष्टिकोण और भारत की ‘पड़ोसी पहले नीति’ में एक विशेष स्थान रखता है।
विदेश मंत्री की हाल की मालदीव यात्रा के बाद राष्ट्रपति डॉ. मुइजू की भारत यात्रा इस बात का प्रमाण है कि भारत मालदीव के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व देता है तथा इससे दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत जन-जन संबंधों को और गति मिलने की उम्मीद है।







