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बांग्लादेश में PM हसीना के इस्तीफे की मांग पर हिंसा, 97 की मौत, देश में कर्फ्यू

UB India News by UB India News
August 6, 2024
in अन्तर्राष्ट्रीय, खास खबर
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बांग्लादेश में PM हसीना के इस्तीफे की मांग पर हिंसा, 97 की मौत, देश में कर्फ्यू
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बांग्लादेश में आरक्षण के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन और हिंसक हो गया है। रविवार को हजारों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। इस दौरान उनकी और पुलिस के बीच कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुईं।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक रविवार को 97 लोगों की मौत हुई है। इसके साथ ही 500 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। सरकार ने हिंसा पर काबू करने के लिए देशभर में कर्फ्यू लगा दिया है। साथ ही अगले 3 दिनों के लिए छुट्टी की घोषणा कर दी गई है। प्रदर्शनकारियों ने आज ‘मार्च टू ढाका’ की योजना बनाई है।

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उन्होंने आम जनता से सोमवार को ढाका लांग मार्च में शामिल होने की अपील की है। इसके साथ ही देशभर में सभी अदालतों को अनिश्चितकाल तक के लिए बंद कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि बंदी के दौरान बहुत जरूरी मामलों में ही सुनवाई की जाएगी। इसके लिए चीफ जस्टिस इमरजेंसी बेंच का गठन करेंगे।

बढ़ती हिंसा के बीच बांग्लादेश में सोमवार को इंटरनेट पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इसके अलावा रेलवे ने सभी सेवाएं अगले आदेश तक के लिए बंद कर दी हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार देश में कपड़ा फैक्ट्रियों को भी अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है।

बांग्लादेश में हुई हिंसा से जुड़ी कुछ तस्वीरें…

प्रदर्शनकारियों ने ढाका में एक शॉपिंग सेंटर में आग लगा दी।
प्रदर्शनकारियों ने ढाका में एक शॉपिंग सेंटर में आग लगा दी।
ढाका में विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर कब्ज़ा कर लिया और आग लगा दी।
ढाका में विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर कब्ज़ा कर लिया और आग लगा दी।
ढाका में विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक एम्बुलेंस को यह जांचने के लिए रोक दिया कि अंदर कोई मरीज है या नहीं।
ढाका में विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक एम्बुलेंस को यह जांचने के लिए रोक दिया कि अंदर कोई मरीज है या नहीं।
ढाका में पुलिस, सरकार समर्थक समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के दौरान एक घायल पुलिस अधिकारी को ले जाती पुलिस
ढाका में पुलिस, सरकार समर्थक समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के दौरान एक घायल पुलिस अधिकारी को ले जाती पुलिस
विरोध प्रदर्शन के दौरान ढाका में जमकर बवाल देखने को मिला। तस्वीर में जली हुई पुलिस चौकी।
विरोध प्रदर्शन के दौरान ढाका में जमकर बवाल देखने को मिला। तस्वीर में जली हुई पुलिस चौकी।
प्रदर्शनकारी सिराजगंज में इनायतगंज पुलिस स्टेशन में घुस गए और वहां कई पुलिसकर्मियों को मार डाला (फाइल इमेज)
प्रदर्शनकारी सिराजगंज में इनायतगंज पुलिस स्टेशन में घुस गए और वहां कई पुलिसकर्मियों को मार डाला (फाइल इमेज)

शेख हसीना की पार्टी के नेताओं की मॉब लिंचिंग
इसके अलावा आंदोलनकारियों ने नरसिंगडी जिले में पीएम हसीना की पार्टी अवामी लीग के 6 कार्यकर्ताओं को मॉब लिंचिंग कर मार डाला। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोपहर में प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकाला था जिससे अवामी लीग के कार्यकर्ता नाराज हो गए।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें 4 लोग घायल हो गए। इससे नाराज होकर प्रदर्शनकारियों ने पलटवार किया। अवामी लीग के कार्यकर्ता डर कर एक मस्जिद में छिप गए, जहां से निकाल कर उनकी पिटाई की गई जिसमें 6 कार्यकर्ता मारे गए।

दो न्यजपेपर ऑफिस पर भी हमला
प्रदर्शनकारियों ने रविवार शाम ढाका में दो न्यूजपेपर के ऑफिस पर हमला कर दिया। अंग्रेजी अखबार द डेली स्टार के ऑफिस में घुसकर प्रदर्शनकारियों ने कांच के दरवाजे और पैनल तोड़ डाले। कुछ ही देर बाद बांग्ला अखबर रूपंतोर समाचार पर प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया। यहां भी उन्होंने तोड़फोड़ की। हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

 

बांग्लादेश में क्यों भड़की हिंसा?
बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन (Bangladesh Violence) की जड़ आरक्षण है. दरअसल, यहां सरकारी नौकरियों मे 56 फीसदी आरक्षण लागू है. इसमें से 30 फ़ीसदी आरक्षण अकेले 1971 के मुक्ति संग्राम में भाग लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को मिलता है. इसके अलावा 10% आरक्षण सामाजिक-आर्थिक तौर पर पिछड़े जिलों के लिए है और 10 फ़ीसदी महिलाओं के लिए. जबकि 5 फ़ीसदी आरक्षण जातिगत अल्पसंख्यक समूहों के लिए और एक फीसदी दिव्यांगों के लिए है.

प्रदर्शनकारी छात्रों का सबसे बड़ा विरोध मुक्ति संग्राम के परिवार वालों को मिलने वाला 30 फ़ीसदी आरक्षण है. उनका तर्क है कि इससे मेरिट वाले नौजवानों को नौकरी नहीं मिल रही है, बल्कि अयोग्य लोगों को सरकारी नौकरी में भरा जा रहा है. छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद सरकार ने अधिकांश कोटा वापस ले लिया है, लेकिन अब लड़ाई आरक्षण से हटकर प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग पर आ गई है.

Bangladesh violence: Indian Citizens advised not to travel to Bangladesh amid protests - The Economic Times

सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान

छात्र नेताओं ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर सविनय अवज्ञा आंदोलन की घोषणा की है. नागरिकों से अपील की है कि वे टैक्स और दूसरे सरकारी बिल जमा न करें. इसके अलावा फैक्ट्री, सरकारी दफ्तरों को बंद करने की भी अपील की है. छात्रों ने 5 अगस्त को राजधानी ढाका में लॉन्ग मार्च की घोषणा भी की है. हालांकि सरकार ने ढाका में कर्फ्यू लगा दिया है और 6 अगस्त तक छुट्टियां घोषित कर दी हैं. इसके बावजूद हालात और बिगड़ने की आशंका है.

PM शेख हसीना का क्या पक्ष है?
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रदर्शनकारी छात्रों को आतंकवादी करार दिया है. 4 जुलाई को नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में शेख हसीना ने प्रदर्शनकारियों से कड़ाई से निपटने का निर्देश दिया. बीबीसी बांग्ला की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक के बाद प्रधानमंत्री के प्रेस विंग की तरफ से एक बयान जारी कर सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान आतंकी हमले की चेतावनी की गई है. छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार इस चेतावनी के बहाने छात्रों पर बर्बर कार्रवाई कर सकती है.

कैसे सरकार के खिलाफ हुआ आंदोलन?

बांग्लादेश में प्रदर्शन की शुरुआत जुलाई में ही हुई थी. तब प्रदर्शन मुख्य तौर पर आरक्षण के खिलाफ था. पिछले महीने भी हिंसक प्रदर्शन में करीब 200 लोगों की जान गई थी. सरकार ने जब प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए सख्ती बरतनी शुरू की तो छात्र और उग्र होते गए. इसके बाद जब सरकार ने जब प्रदर्शनकारियों को गोली मारने वाली याचिका दाखिल की तो मामला और बिगड़ गया. अब यह प्रदर्शन सीधे-सीधे सरकार और प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ नजर आ रहा है.

Protests erupt in Bangladesh again, two more die in violence that's already killed over 200 last month – Firstpost

क्या सेना भी सरकार के खिलाफ?
शेख हसीना के 15 साल के कार्यकाल में पहली बार इतने बड़ी पैमाने पर प्रदर्शन हो रहा है. सरकार ने प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए सेना को उतार दिया है. हालांकि सेना का एक वर्ग भी सरकार के खिलाफ नजर आ रहा है. बांग्लादेश आर्मी के कई पूर्व प्रमुखों ने आर्मी से अपील की है कि वह छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करें. बांग्लादेश आर्मी के पूर्व चीफ इकबाल करीम भूइंया ने एक लिखित बयान में कहा है कि सशस्त्र बल फौरन अपने मिलिट्री कैंप में लौट जाए और किसी भी इमरजेंसी हालात से निपटने के लिए तैयार रहें. भूइंया ने सरकार से अपील की है कि सड़कों से सेना को हटा लिया जाए.

उन्होंने कहा है कि सरकार को इस मामले को बातचीत के जरिए हल किया करना चाहिए. सेना को इस तरह के राजनीतिक कार्यों में हस्तक्षेप से बचाना चाहिए. बांग्लादेश की सेना कभी भी इस तरीके से अपने नागरिकों के खिलाफ हथियार लेकर खड़ी नजर नहीं आई है.

क्या है भारत का रुख?

बांग्लादेश की हिंसा पर विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों के लिए परामर्श जारी किया है. कहा है कि बांग्लादेश में मौजूद सभी भारतीय नागरिक अत्यधिक सावधानी बरतें. अपनी आवाजाही सीमित रखें और ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग से लगातार संपर्क में रहें. इसके अलावा सरकार ने अपने नागरिकों को अगले आदेश तक बांग्लादेश की यात्रा न करने की भी सलाह दी है.

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