अमेरिकी अर्थव्यवस्था (US Economy Recession) में मंदी की आशंकाओं और वैश्विक शेयर बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारतीय शेयर बाजार 5 अगस्त को खुलते ही क्रैश (Indian Share Market Crash) हो गया. जहां BSE सेंसेक्स (BSE Sensex) शुरुआती कारोबार में 2401.49 पॉइंट गिरकर 78,580.46 पर पहुंच गया. वहीं NSE निफ्टी (NSE Nifty) में भी 489.65 अंक की गिरावट दर्ज की गई. यह 24,228.05 अंक पर आ गया.
सेंसेक्स की कंपनियों में अडाणी पोर्ट्स, मारुति, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, JSW स्टील्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई. वहीं हिंदुस्तान यूनीलीवर और सन फार्मा जैसी कंपनियां बढ़त के साथ कारोबार कर रही हैं.
अमेरिका में मंदी की आशंका
अमेरिका में बेरोजगारी पर आई एक रिपोर्ट के कारण दुनियाभर में शेयर मार्केट्स के सेंटीमेट प्रभावित हुए हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में पिछले महीने 1.14 लाख नौकरियां आईं. ये नौकरियां अनुमान से 35 फीसदी कम थीं. वहीं पिछले महीने अमेरिका में बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत हो गई. यह बेरोजगारी दर अक्टूबर 2021 के मुकाबले सबसे ज्यादा है. वहीं अमेरिका में पिछले 3 महीने की औसत बेरोजगारी दर पिछले 12 महीने की न्यूनतम बेरोजगारी दर 3.6 प्रतिशत से अधिक है.
दरअसल, अमेरिका में मंदी की आशंका Sahm रूल से जुड़ी है. ये नियम कहता है कि अगर अगर तीन महीने की औसत बेरोजगारी दर पिछले 12 महीने की न्यूनतम बेरोजगारी दर से 0.5 प्रतिशत अधिक है तो मंदी आती है. इंडिया टुडे तक चैनल्स के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर अपने एक विश्लेषण में बताते हैं कि अमेरिका में 1970 के बाद से यह नियम सही साबित हुआ है.
वो अपने विश्लेषण में आगे लिखते हैं कि अमेरिका के शेयर बाजार में पिछले हफ्ते गिरावट आई है. टेक्नॉलजी शेयर्स का हाल-चाल बताने वाला NASADAQ इंडेक्स करीब 4 प्रतिशत गिर चुका है. वहीं अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कटौती नहीं की. ऐसा बताया जा रहा है कि अब यह कटौती सितंबर में हो सकती है क्योंकि बेरोजगारी बढ़ रही है.
मिलिंद खांडेकर आगे लिखते हैं कि कोविड-19 महामारी के बाद महंगाई को काबू में रखने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों को बढ़ाया ताकि लोगों के हाथ से पैसे खींच लिए जाएं. क्योंकि पैसे कम होने पर लोग खर्च भी कम करेंगे. खर्च कम होगा तो महंगाई नियंत्रण में रहेगी. लेकिन ऐसे करने से मंदी का भी डर बना रहता है.
ईरान-इजराइल युद्ध की आशंका, इसलिए भी बाजार गिरा
- ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की आशंका के कारण ग्लोबल मार्केट में निगेटिव सेंटिमेंट है। इसी का असर भारतीय शेयर बाजार में भी देखने को मिल रहा है।
- अमेरिका में मंदी की आशंका बढ़ गई है, जिसके कारण पिछले कारोबारी दिन अमेरिकी बाजार में गिरावट रही। इसका असर दुनियाभर के बाजारों में दिख रहा है।
- वॉरेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे ने एपल में अपनी 50% हिस्सेदारी बेच दी है। वे अब केश बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं। अन्य बड़े निवेशक भी सेलिंग कर रहे हैं।
- भारतीय शेयर बाजार के मौजूदा वैल्यूएशन बढ़े हुए हैं। खासकर मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट में। बाजार में इस कारण अच्छा-खासा करेक्शन दिख सकता है।
बाजार की गिरावट में निवेशकों के 17 लाख करोड़ रुपए डूबे
शेयर बाजार में तेज बिकवाली से निवेशकों को करीब 15 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। सोमवार, 5 अगस्त को सुबह 11:40 बजे तक बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का ओवरऑल मार्केट कैप 440 लाख करोड़ रुपए हो गया। शुक्रवार को यह लगभग ₹457 लाख करोड़ था।
साल की दूसरी बड़ी गिरावट, 4 जून को सेंसेक्स 5.74% गिरा था
आज बाजार में 2686 अंक (3.31%) तक की गिरावट दिखी है। ये इस साल की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले लोकसभा चुनाव के नतीजों वाले दिन यानी, 4 जून को सेंसेक्स 4389 अंक (5.74%) की गिरावट के साथ 72,079 के स्तर पर बंद हुआ था।
जापान का निक्केई 9.50% टूटा, कोरिया कोस्पी 8% नीचे
एशियाई बाजार में आज गिरावट देखने को मिल रही है। जापान के निक्केई में 9% से ज्यादा की गिरावट है। कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी 8% नीचे है। वहीं हॉन्गकॉन्ग के हैंगसेंग इंडेक्स में 1.55% की गिरावट है। चीन का शंघाई कंपोजिट भी 0.79% की गिरावट है। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार डाओ जोन्स 1.51% गिरकर बंद हुआ था।







