2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए का प्रदर्शन बिहार में अच्छा रहा. देश में एक बार फिर से एनडीए की सरकार आ चुकी है. इसके साथ ही बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां तैयारी में जुट चुकी है. इसे लेकर नीतीश सरकार भी लगातार विधानसभा चुनाव से पहले अपने किए गए वादों को पूरा करने में लगे हुए हैं. नीतीश सरकार प्रदेश में बंपर भर्तियां करने जा रही ही. दरअसल, लोकसभा के चुनावी रैलियों के दौरान नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव से पहले 10 लाख नौकरियों का वादा किया था. इन सबके बीच एक नई खबर सामने आ रही है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार राजनीति में एंट्री करने जा रहे हैं. सूत्रों की मानें तो जल्द ही निशांत कुमार अपने पिता की पार्टी ज्वॉइन कर सकते हैं. यह फैसला जेडीयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया जा सकता है. बता दें कि 29 जून को दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की गई थी. दरअसल, यह मांग खुद जेडीयू के नेता कर रहे हैं.
नीतीश कुमार के बेटे की राजनीति में एंट्री!
राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अध्यक्ष विद्यानंद विकल ने अपने ऑफिशियल फेसबुक पेज पर एक पोस्ट के जरिए नीतीश कुमार से निशांत को राजनीति में लाने की बात कही है. उनके इस पोस्ट पर तरह-तरह की टिप्पणी आ रही है, जहां कुछ लोग उनके इस मांग को जायज ठहरा रहे हैं तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री जी अपने बेटे को राजनीति में लाते हैं तो यह भी वंशवाद होगा. बता दें कि विकल ने निशांत को राजनीति में उतारने के साथ ही यह भी कहा कि बिहार को युवा नेतृत्व की जरूरत है. इसलिए निशांत को पॉलिटिक्स में आना चाहिए. वहीं, जेडीयू के अन्य नेता भी कई बार मुख्यमंत्री जी से निशांत को राजनीति में लाने की बात कह चुके हैं. जेडीयू के नेता परमहंस कुमार ने भी कहा था कि सीएम के बेटे के मन नें धन और पद को लेकर किसी तरह की लालच नहीं है.
जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में लिया जा सकता है फैसला
आपको बता दें कि नीतीश के बेटे की सियासत में एंट्री के साथ ही उनके दिए गए बयानों पर भी सवाल उठने लगे हैं. दरअसल, नीतीश कुमार अक्सर वंशवाद और परिवारवाद की राजनीति को लेकर कांग्रेस और आरजेडी पर सवाल उठाते रहे हैं. उन्होंने अपने कई भाषणों में यह भी कहा है कि वह अपने बेटे को कभी राजनीति में लेकर नहीं आए हैं. अब देखना यह होगा कि नीतीश जेडीयू नेता की मांग को सुनते हैं या फिर बेटे को राजनीति से दूर रखते हैं.







