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अगले 3 दिन आसमान से बरसेगी आग, 30 मई तक सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है गर्मी

UB India News by UB India News
May 29, 2024
in खास खबर, स्वास्थ
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बिहार में आसमान से बरस रही ‘आग’, 20 शहरों में लू का अलर्ट
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एनसीआर में पारा 48 का आंकड़ा छू चुका है. लगातार खबरें हैं कि 30 मई तक हीट वेव का असर बना रहेगा. एनसीआर में गर्मी का प्रकोप (Heat Wave) लगातार बढ़ता जा रहा है. आईएमडी (IMD) के मुताबिक सोमवार के दिन सुबह से ही तेज गर्मी का असर देखने को मिल रहा है. आने वाले 30 मई तक हीट वेव का असर देखने को मिलेगा. वहीं मौसम विभाग ने भारत के लोगों को चेताया है कि आने वाले महीने यानी की जून में भी उन्हें गर्मी से राहत शायद न मिले.

क्यों हर साल मई और जून में बढ़ जाती है गर्मी?

मार्च से लेकर जून तक सूरज धरती के करीब होता है. जैसे-जैसे यह धरती के करीब आता है, वैसे-वैसे सूरज ने निकलने वाले सोलर रेडिएशन भी धरती को तेजी से प्रभावित करते हैं. जिसके चलते पृथ्वि और ज्यादा तपने लगती है. जून से इसका असर कम होने शुरू होता है.

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जून में भी नहीं मिलेगी गर्मी से राहत

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को पूर्वानुमान लगाते हुए कहा कि जून में देश के अधिकांश राज्यों में लू चलेगी. आईएमडी ने कहा कि दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों को छोड़कर जून में देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है. आईएमडी के पूर्वानुमान में कहा गया है कि अगले महीने के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों और मध्य भारत के आसपास के इलाकों में सामान्य से ऊपर गर्मी रहने की संभावना है.

हीटवेव खतरनाक क्यों हैं?

हीटवेव में बाहर निकलना ठीक नहीं. लेकिन ध्यान रहे चिलचिलाती गर्मी को हल्के में लेना बहुत ख़तरनाक हो सकता है. डॉक्टर्स के अनुसार हीटवेव हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित कर सकती है. हीटवेव या लू के चलते चक्कर आना, सिरदर्द, बेहोशी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. लू लगना या हीटवेव की चपेट में आना कई बार गंभीर परिणाम दे सकता है. यह गंभीर निर्जलीकरण और ब्लड प्रेशर में गिरावट का कारण भी बन सकता है.

लंबे समय तक बढ़े तापमान में रहने से दिल, फेफड़े, गुर्दे, लिवर और दिमाग जैसे अंगों पर भी खतरा बढ़ता है. यह मस्तिष्क में सूजन का कारण भी बन सकता है. इससे घातक हीटस्ट्रोक भी हो सकता है. यहां यह जानना भी जरूरी है कि हीटवेव या लू लगने पर किस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं. चलिए जानते हैं.

कितना तापमान सह सकता है इंसानी शरीर?

इंसान गर्म खून वाला स्तनधारी जीव है. हमारे शरीर के तापमान को कंट्रोल करने का काम एक खास तंत्र ‘होमियोस्‍टैसिस’ करता है. एक्सपटर्स के अनुसार इंसानी शरीर का सामान्य तापमान 98.9 डिग्री फॉरेनहाइट होता है. इससे ज्यादा तापमान होने पर माना जाता है कि शरीर में बुखार की स्थिति है. वैज्ञानिकों के अनुसार इंसान का शरीर 42 डिग्री सेल्सियस तक तापमान सह सकता है.

क्या हीट स्ट्रोक से हो सकती है मौत?

क्या हीट वेव, लू या हीट स्ट्रोक किसी की मौत की वजह बन सकता है. इस सवाल का जवाब पाने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि लू या हीट स्ट्रोक सेहत को किस तरह प्रभावित करता है. तो हीट स्ट्रोक होने यानी लू लगने पर शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है. इससे शरीर खुद को ठंडा करने के लिए पसीना ज्यादा निकालता है. ज्यादा दबाव के चलते पसीने में नमक और पानी की कमी हो जाती है, जिससे हेमोकोनसेंट्रेशन होता है. इसके चलते कोरोनरी और सेरेब्रल थ्रोम्बोसिस बढ़ जाते हैं. बहुत ज्यादा तापमान होने पर पसीना निकालने वाला सिस्टम फेल हो सकता है. जिससे शरीर अपने तापमान को सामान्य नहीं कर पाता और हीट स्ट्रोक या लू की स्थिति बन जाती है. हां, यह सही है कि अगर हीट स्ट्रोक का तुरंत इलाज न कराया जाए, तो मौत हो सकती है.

दिल के लिए कितना खतरनाक है हीटवेव?

डॉ विकास ठाकरान ने कहा कि तापमान बढ़ने से और अधिक हॉट कंडीशन में रहने से हमारे शरीर का तापमान भी बढ़ता है. इस तापमान को कंट्रोल करने के लिए हमारे बॉडी पसीना निकालती है, जिसे ऑटो रेगुलेशन कहते हैं. पसीना निकलने का काम शरीर स्किन के जरिए करता है. ऐसे में स्किन का बल्ड फ्लो बढ़ाना जरूरी होता है, इसके लिए हार्ट तेज पंप होता है जिससे बर्ड सर्कुलेशन बढ़ता है. अगर आप स्वस्थ हैं और हार्ट से जुड़ी कोई दिक्कत नहीं है तो आपका दिल ये प्रक्रिया आराम से पूरी करता है.

गर्मी के दौरान बुजुर्गों और स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों जैसी कमजोर आबादी को गर्मी से संबंधित बीमारियों के जोखिम का सामना करना पड़ता है. लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी से बुनियादी ढांचे पर दबाव पड़ता है, लोगों के शरीर में भी पानी की कमी हो जाती है.

गर्मी के दौरान सुरक्षित रहने के लिए व्यक्ति को हाइड्रेटेड रहना होगा, अधिकतम ठंडे वातावरण में रहना होगा और गर्मी के घंटों के दौरान तेज गतिविधियों से बचना होगा.

गर्मी से बचने के लिए क्या खाएं

प्रकृति ने हमें हर जरूरी चीज दी है. जब वह मौसम बदलती है, तो उस मौसम में सर्वाइव करने के लिए जरूरी आहार भी हमें मिल जाते हैं. मौसमी फल उस मौसम से लड़ने के लिए हमारे हथियार हैं. गर्मियों के फल-सब्जियां मिनरल्स और पानी से भरपूर होते हैं. ये इस मौसम से लड़ने के लिए सभी जरूरी पोषक तत्व देते हैं.

कई फलों में पानी की मात्रा काफी ज्यादा होती है. जो इस मौसम में मददगार साबित हो सकते हैं.

फलों का पूरा लाभ उठाने के लिए आप इन्हें दिन में खाएं. अगर आप जूस पीना चाहते हैं, तो इसके लिए सुबह का समय चुनें. लेकिन पूरा फल खाने के लिए दिन का समय सबसे बेहतर है.

राजस्थान में सबसे ज्यादा हालात खराब

गर्मी के चलते राजस्थान में सबसे ज्यादा हालात खराब हैं. राज्य में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. इंडिया-पाकिस्तान बॉर्डर पर तो पारा 55 डिग्री के पार निकल गया है. सोमवार को जैसलमेर में बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ के एक जवान की हीटवेव से मौत हो गई. हीटवेव की वजह से जान गंवाने वाले जवान का नाम अजय कुमार बताया गया. जैसलमेर में कुछ इलाकों में तापमान 55 डिग्री के पास पहुंच गया है. बीएसएफ के डीआईजी योगेंद्र यादव के मुताबिक, रेगिस्तान वाले इलाके में तापमान ज्यादा होने की वजह से ड्यूटी करने में काफी परेशानी आ रही हैं.

राजधानी दिल्ली में पारा 48 डिग्री के पार

सोमवार को लगातार दूसरे दिन राजधानी दिल्ली में तापमान 48 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया. दिल्ली के मुंगेशपुर इलाका सबसे गर्म रहा. यहां तापमान सामान्य से आठ डिग्री अधिक 48.8 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि यहां न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री ज्यादा रहा. वहीं नजफगढ़ में अधिकतम तापमान 48.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से आठ डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा. वहीं यहां का न्यूनतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो औसत से पांच डिग्री ज्यादा रहा.

श्रीनगर में भी गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड

मैदानी इलाकों में ही नहीं बल्कि पहाड़ों पर भी इस बार सूर्य देव आग बरसा रहे हैं. कल यानी 28 मई को श्रीनगर में गर्मी ने 45 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया. सोमवार को यहां का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, इससे पहले साल 1968 में श्रीनगर का तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था.  इसके बाद सोमवार को पहली बार यहां का पारा 33 डिग्री पर पहुंच गया.

बिहार के बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद, अरवल, पटना, जहानाबाद, गया, नवादा, नालंदा, शेखपुरा, बेगूसराय और लखीसराय समेत 14 जिलों में हॉट नाइट का येलो अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में दिन के साथ रातें भी गर्म रहने वाली है. बाकि के जिलों में कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है.

इस दौरान बिहार का अधिकतम तापमान 38°C से 42°C के बीच रहने की संभावना है. आने वाले दिनों में पछुआ हवा का प्रवाह बढ़ेगा. ऐसे में बिहार के कई इलाकों में लू भी चलेगी और गर्मी से हाल बेहाल रहेगा.

कैसा रहा 27 मई
27 मई बिहार के लिए गर्म ही रहा. इस दिन बिहार का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 43.2°C बक्सर में दर्ज किया गया. वहीं गोपालगंज में हीट वेव दर्ज किया गया. 09 ऐसे जिलें रहें जहां का अधिकतम तापमान 40°C या इससे अधिक दर्ज किया गया.

टॉप 5 गर्म जिलों की बात करें तो बक्सर के अलावा गोपालगंज में 41.7°C, भोजपुर में 41.2°C, डेहरी में 40.8°C, छपरा और अरवल में 40.7°C दर्ज किया गया. पिछले कई दिनों से यह देखा जा रहा है कि दक्षिण पश्चिम बिहार के हिस्सों का हाल गर्मी से बेहद खराब है.

छपरा मसरख में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की 20 से अधिक बच्चियों को गंभीर हालत में अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है. सोमवार को इनकी तबीयत बिगड़ी. दर्द से छटपटाते हुए ये लड़कियां बेहोश हो गईं थी. सभी बच्चियां हाई फीवर की शिकार है जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि लू लगने के कारण बच्चियों की तबीयत बिगड़ गई है. मसरख अस्पताल में डॉक्‍टर बीमार बच्चियों का इलाज करने में जुट गए हैं. बताया जा रहा है कि कवलपूरा गांव में स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की बच्चियों अचानक सोमवार देर शाम बीमार होने लगी. एक-एक करके सभी की हालत बिगड़ने लगी जिसके बाद वार्डन बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंची और उनका इलाज शुरू किया गया. राहत की बात यह है कि डॉक्टरों ने बच्चियों को खतरे से बाहर बताया है. हालांकि अभी भी सबको निगरानी में रखा गया है.

आपके राज्य में कब दस्तक देगा मॉनसून
मौसम विभाग के अनुसार चार दिनों में साउथ वेस्ट मॉनसून केरल में एंट्री कर लेगा। देश के ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून सामान्य या इससे बेहतर ही रहेगा। मॉनसून कोर जोन (कृषि प्रधान राज्यों) में मॉनसून के चार महीनों जून से सितंबर तक सामान्य से अधिक बारिश होने के आसार हैं। कोर जोन में मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और वेस्ट बंगाल शामिल हैं। पिछले महीने आईएमडी ने देश भर में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान जताया था।

मॉनसून आने की संभावित तारीखें
➤ केरल : 31 मई या 1 जून
➤ दिल्ली-NCR : 30 जून से 2 जुलाई के बीच
➤ यूपी : 18 से 20 जून के बीच

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