बिहार में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए शुक्रवार को वोटिंग खत्म हो गई। इस चरण में 5 लोकसभा क्षेत्र किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर और बांका में मतदान कराया गया। बिहार में शाम 6 बजे तक 5 सीटों के लिए कुल 58.58 प्रतिशत वोटिंग हुई है। सबसे ज्यादा कटिहार में 64.60 फीसदी वोट पड़े हैं। वहीं, सबसे कम भागलपुर में 51 प्रतिशत मतदान हुआ है।
पहले फेज में कम वोटिंग के बाद दूसरे चरण में वोटर्स में उत्साह दिखा। लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण में 48.23 प्रतिशत ही मतदान हुआ था, जो कि मौजूदा चरण से 10 फीसदी कम था।
50 उम्मीदवारों के भाग्य ईवीएम में कैद
आज के चुनाव में कुल 50 उम्मीदवारों (47 पुरुष और 3 महिला) के भाग्य ईवीएम में कैद हो गया है। इस फेज में 3 सीटों पर सीधा तो दो (किशनगंज और पूर्णिया में) पर त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा रहा है।
दूसरे चरण के चुनाव के लिए मतदाताओं को किया गया जागरूक
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचआर श्रीनिवास ने बताया कि वोटिंग कास्ट के कई कारण रहे हैं। हमलोगों ने ट्रांसपोर्ट दिया, घर-घर जाकर मतदाताओं को जागरूक किया। घूप से बचने के छाया की व्यवस्था, मेडिकल किट की व्यवस्था की गई। ओवर ऑल करीब 60 फीसदी वोटिंग हुई है। वोटिंग परसेंट बढ़ाने के लिए हम लोगों ने प्रयास किया है और आगे भी एक्सपेरिमेंट करते रहेंगे।
शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ चुनाव
एडीजी जेएस गंगवार ने कहा कि बिहार में दूसरे चरण के लिए मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। किशनगंज में 20, कटिहार में 31, पूर्णिया में 29 और भागलपुर में 46 लोगों को डिटेन किया गया। मतदान केंद्रों से अप्रिय घटना और झगड़े की सूचना नहीं है। बहिष्कार वाले मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग नहीं करवाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बांका के बेलहर और कटोरिया में 102 मतदान केंद्र और 146 मतदान केंद्रों पर 4 बजे तक मतदान हुआ। बाकी सभी मतदान केंद्र पर शाम 6 बजे तक वोटिंग हुई। स्वच्छ और शांतिपूर्ण मतदान करने के लिए इस पेज में लगभग 42 हजार सुरक्षाकर्मी और 18 गृह रक्षा बल तैनात किए गए थे।
बिहार में दूसरे चरण की वोटिंग शांतिपूर्ण तरीके संपन्न करा ली गई है। चुनाव आयोग की तमाम कोशिशों के बाद भी वोटिंग पर्सेंटेज दूसरे चरण मे भी हांफते नजर आया। 2019 की तुलना में इस बार पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, भागलपुर और बांका सभी जगहों पर कम वोटिंग हुई। हालांकि, फर्स्ट फेज की तुलना में वोटिंग पर्सेंटेज का ग्राफ जरूर ऊपर गया है।
ओवर ऑल वोटिंग पर्सेंटेज को देखे सेकेंड फेज में 58.71 फीसदी की वोटिंग हुई है, जो 2019 की तुलना में 4.31% फीसदी कम है। सेकेंड फेज में सबसे ज्यादा वोटिंग कटिहार में 64.60 फीसदी हुई है, जो 2019 की तुलना में लगभग 3 फीसदी कम है। पिछले चुनाव में यहां 67.62 फीसदी की वोटिंग हुई थी।
वहीं, इस बार सबसे कम 51 फीसदी की वोटिंग भागलपुर में हुई है। जो पिछले चुनाव की तुलना में 6.17 फीसदी कम है। इसके अलावा किशनगंज में 64 फीसदी वोटिंग हुई है जो पिछले चुनाव की तुलना में 2.35 फीसदी कम है।
पूर्णिया में भी इस बार वोटिंग पर्सेंटेज का गैप देखने को मिला है। यहां इस बार 59.94 फीसदी की वोटिंग हुई है, जो पिछले चुनाव की तुलना में 5.34 फीसदी कम है। 2019 के चुनाव में यहां 65.37 फीसदी की वोटिंग हुई थी। वहीं, बांका में इस बार 4.60 फीसदी का गैप रहा है। इस बार यहां 54 फीसदी वोटिंग हुई है, जबकि पिछले चुनाव में यहां 58.60 फीसदी की वोटिंग हुई थी।

सबसे पहले दो पॉइंट में समझिए सीमांचल में वोटिंग पर्सेंटेज गिरने के कारण
पलायन ने बिगाड़ा वोटिंग का ग्राफ
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि बिहार में सीमांचल हमेशा से हाई वोटिंग पर्सेंटेज वाला क्षेत्र रहा है। मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण हमेशा यहां अग्रेसिव वोटिंग होते रही है। लेकिन, यहां पलायन एक बड़ी समस्या है। बड़ी संख्या में युवा काम की तलाश में यहां से दूसरे राज्यों में पलायन कर जाते हैं।
वोटिंग पर्सेंटेज गिरने का एक बड़ा कारण ये हो सकता है। यहां के स्थानीय लोगों की भी माने तो 30-40 साल की आयु के अधिकांश लोग काम की तलाश में बाहर निकले हुए हैं। ऐसे में इसका असर तो वोटिंग पर पड़ना ही था।
गर्म हवा और बूथों पर अव्यवस्था से लोगों में निराशा
चुनाव आयोग की तरफ से लगातार ये दावा किया जा रहा है कि वोटिंग पर्सेटेज बढ़ाने के लिए कई तरह की कवायदें की जा रही हैं, लेकिन ये केवल पटना में बयान तक ही सीमित रहता हुआ दिखाई दे रहा है। किशनगंज में बूथों पर कई तरह की लापरवाही देखने को मिली। यहां कई बूथों पर वोटर्स को धूप से बचने के लिए किसी तरह के कोई इंतजामात नहीं किए गए थे।
कई बूथ पर तो पीने का पानी भी नहीं था। ऊपर से गर्म हवा के थपेड़ों ने लोगों को बूथ पर जाने से रोका। वोटिंग पर्सेटेज में गिरावट को इसे भी बड़ा कारण माना जा रहा है।
पूर्णिया में कम वोटिंग का पप्पू को मिल सकता है लाभ
पूर्णिया में त्रिकोणीय मुकाबला था। यहां जदयू के संतोष कुशवाहा और राजद की बीमा भारती के साथ निर्दलीय पप्पू यादव मैदान में हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुरुर अहमद कहते हैं कि जदयू के संतोष कुशवाहा भी यहां एक ताकतवर उम्मीदवार हैं। 2014 के मोदी लहर में जदयू जो दो सीट जीतने में कामयाब रही थी, उसमें पूर्णिया भी एक है। दूसरी तरफ पप्पू यादव इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दिए हैं।
तेजस्वी यादव भी बीमा भारती के लिए आखिरी तीन दिनों तक यहां कैंप किए थे, लेकिन वोटर्स टर्न आउट उस उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ, जैसी संभावना जताई जा रही थी। बड़ी संख्या में शहरी वोटर्स वोट डालने निकले ही नहीं हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी-खासी वोटिंग हुई है। इसका सीधा फायदा निर्दलीय पप्पू यादव को मिल सकता है, जबकि एनडीए के प्रत्याशी संतोष कुशवाहा को नुकसान हो सकता है।
किशनगंज के त्रिकोणीय मुकाबले के बाद भी वोटर में नहीं दिखा जोश
किशनगंज में 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कुल 67.62 फीसदी की वोटिंग हुई थी। इनमें 33.32 प्रतिशत वोट हासिल करके कांग्रेस के जावेद आजाद जीतने में सफल रहे थे। इस बार जदयू ने यहां अपना प्रत्याशी बदला था। आखिरी वक्त में AIMIM सदर असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपने प्रत्याशी अख्तरुल ईमान के लिए कैंप किया था।
इन दोनों बदलावों का वोटिंग में बहुत ज्यादा असर दिखाई नहीं दिया। त्रिकोणीय मुकाबला होने के बाद भी यहां वोटिंग पर्सेंटेज लगभग 3 फीसदी गिर गई। ऐसे में माना जा रहा है कि कम वोटिंग पर्सेंटेज का लाभ एक बार फिर से यहां कांग्रेस प्रत्याशी को ही मिल सकता है।
कटिहार में शहरी वोटर्स में दिखी उदासीनता
कटिहार में इस बार जहां ग्रामीण वोटर्स ने बढ़-चढ़ कर मतदान में हिस्सा लिया तो शहरी वोटर्स की दिलचस्पी वोटिंग में कम दिखी। बड़ी संख्या मे शहरी क्षेत्र के मतदान केंद्र खाली दिखाई दिए। पिछले चुनाव का ग्राफ देखें तो यहां 67.62 फीसदी वोटिंग हुई थी। इनमें जदयू के दुलाल चंद गोस्वामी 50 फीसदी वोट लाकर विजयी हुए थे, जबकि कांग्रेस के तारिक अनवर लगभग 45 प्रतिशत वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे।
पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि जिस तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों में वोटिंग हुई है, इसका लाभ कांग्रेस प्रत्याशी तारिक अनवर को मिल सकता है। इसका सीधा नुकसान एनडीए प्रत्याशी को हो सकता है।
बांका और भागलपुर में कम वोटिंग एनडीए के लिए फायदेमंद
ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि इस बार बांका और भागलपुर में वोटिंग का ग्राफ बढ़ेगा, लेकिन आखिरी वक्त में दोनों जगह पिछले साल की तुलना में इसमें भारी गिरावट देखने को मिली। भागलपुर में तो पिछले साल की तुलना में लगभग 7 फीसदी की कमी आई है, जबकि बांका में 4 फीसदी कम वोटिंग हुई है।
पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि बांका में कम वोटिंग का फायदा जदयू के प्रत्याशी को मिल सकता है। यहां बड़ी संख्या में पुरुषों की अपेक्षा में महिला वोटर्स वोट करने निकली हैं। वहीं, भागलपुर में भी ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि कांग्रेस की तरफ से अजीत शर्मा को कैंडिडेट बनाने के बाद बदलाव हो सकते हैं, लेकिन यहां भी कम वोटिंग पर्सेंटेज एनडीए कैंडिडेट के पक्ष में जा सकता है।
भागलपुर सीट पर 2019 की तुलना में वोटिंग प्रतिशत कम है। यहां अगर वोटिंग प्रतिशत ज्यादा होता तो एनडीए प्रत्याशी अजय मंडल को फायदा होता। वोटिंग प्रतिशत कम होने की वजह से महागठबंधन प्रत्याशी अजीत शर्मा को फायदा होगा। यहां के नाथनगर इलाके में एक बूथ पर घंटों ईवीएम खराब रही।
इसके बाद अधिकारियों ने उसे करीब दो घंटे बाद सही किया। इसका असर भी वोटिंग पर्सेंटेज पर पड़ा है। विकास नहीं होने को लेकर नवगछिया के सुल्तानगंज में वोट बहिष्कार किया गया। वहीं, हीट वेब की वजह से जिले में अलर्ट था। इस वजह से भी लोगों ने घर से निकलने में परहेज किया। दोपहर तक मतदान केंद्र में भीड़ नहीं देखी गई।







