दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व लोकसभा चुनाव की तैयारी जोरो शोरों से चल रही है. तमाम राजनीतिक पार्टियां अपने घोषणापत्र के जरिए जनता से तरह-तरह के वादें कर रही हैं. मगर कुछ वादे कॉमन हैं जिन्हें लगभग हर पार्टी अपने एजेंडे में तरजीह दे रही है.
मोदी सरकार के खिलाफ 26 राजनीतिक दल एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं. इस इंडिया गठबंधन ने रोजगार, महिलाएं, अग्निवीर, किसान, आरक्षण जैसे मुद्दों को ज्यादा तरजीह दी है. चलिए जानते हैं इंडिया गठबंधन की किस राजनीतिक दल ने क्या वादा किया और क्या है उसकी वजह.
इन मुद्दों पर कांग्रेस का वादा
इंडिया गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है कांग्रेस. कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र को ‘न्यायपत्र’ नाम दिया है. कांग्रेस ने युवाओं को पहली नौकरी देने की गारंटी दी है. कांग्रेस का कहना है कि उनकी सरकार सत्ता में आने पर युवाओं के लिए एक कानून बनाया जाएगा जिसके तहत 25 साल से कम उम्र के हर डिप्लोमा धारक या ग्रेजुएट छात्र को प्राइवेट या सरकारी कंपनी में काम दिया जाएगा. इस दौरान छात्र को हर साल एक लाख रुपये मानदेय दिया जाएगा.
साथ ही कांग्रेस ने अग्निपथ योजना को खत्म करने का बड़ा दावा भी किया है. उनकी सरकार बनती है तो सेना, नौसेना, वायुसेना, तट रक्षक में सामान्य भर्तियां शुरू की जाएंगी. इसके अलावा केंद्र सरकार में जो 30 लाख नौकरियों के पद हैं उन्हें भरा जाएगा. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या दोगुनी करके 14 लाख अतिरिक्त नौकरियों के अवसर पैदा किए जाएंगे. पार्टी ने एससी, एसटी और ओबीसी के लिए संविधान में संशोधन कर 50 फीसदी आरक्षण की निर्धारित सीमा बढ़ाने का वादा भी किया है.
वहीं कांग्रेस ने महिलाओं के लिए महालक्ष्मी योजना शुरू करने की बात कही है. इस योजना के तहत गरीब भारतीय परिवार को बिना शर्त हर साल एक लाख रुपये दिए जाएंगे. ये रकम सीधे परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला के खाते में ट्रांसफर की जाएगी. इसके अलावा कांग्रेस ने साल 2025 से केंद्र सरकार की आधी नौकरियां महिलाओं के लिए आरक्षित करने की बात कही है. साथ ही महिलाओं के खिलाफ बनाए गए कानूनों का सख्ती से लागू किया जाएगा.
किसानों के लिए कांग्रेस ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार एमएसपी पर कानूनी गांरटी देने का वादा किया है. एमएसपी सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा. पांच साल के भीतर डेयरी और पोल्ट्री में उत्पादन दोगुना किया जाएगा. हर जिले में कृषि महाविद्यालय और पशु चिकित्सा महाविद्यालय बनाया जाएगा.
समाजवादी पार्टी (सपा) ने क्या वादा किया
सपा ने भी रोजगार, महिलाओं, अग्निवीर, किसान और आरक्षण जैसे मुद्दों को ज्यादा तरजीह दी है. किसानों की एमएसपी पर कानून बनाने की गारंटी दी है. उनका कृषि संबंधि कर्ज माफ करने की बात कही है. किसान आयोग का गठन होगा. भूमिहीन और छोटे किसानों को हर महीने 5000 रुपये की पेंशन मिलेगी.
सपा ने महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण देने की बात कही है. दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं को उनकी संख्या के अनुपात में भागीदारी दी जाएगी. उनकी सरकार बनी तो सभी सरकारी विभाग की नौकरियों में 33 फीसदी का आरक्षण दिया जाएगा. महिलाओं के खिलाफ अपराध पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी. गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे परिवारों की महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये की पेंशन दी जाएगी. लड़कियों के लिए ‘फ्री गर्ल चाइल्ड एजुकेशन’ और ‘केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा’ योजना बनाने की बात भी है.
सत्ता में आने पर साल 2025 तक पूरे देश में जातीय जनगणना पूरी कर दी जाएगी. साथ ही सभी सरकारी विभागों में खाली पदों को तत्काल प्रभाव से भरा जाएगा. सभी के लिए राष्ट्रीय रोजगार नीति और मिशन रोजगार नीति स्थापित की जाएगी. साथ ही सपा ने भी अग्निनीवीर योजना खत्म करने का वादा किया है.
RJD के घोषणापत्र में क्या है
तेजस्वी यादव ने शनिवार (13 अप्रैल) को ही अपनी पार्टी आरजेडी का घोषणा पत्र जारी किया. आरजेडी ने भी रोजगार, महिलाएं, अग्निवीर, किसान, आरक्षण जैसे मुद्दों पर ज्यादा जोर दिया है. सबसे बड़ा वादा है देशभर में एक करोड़ नौकरियां देने का. आगामी 15 अगस्त से सरकारी विभागों में खाली 30 लाख पदों को भरने का काम शुरू कर दिया जाएगा. साथ ही 70 लाख नई नौकरियां क्रिएट की जाएंगी. रक्षाबंधन से गरीब महिलाओं को हर साल में 1 लाख रुपये देने की बात कही है. साथ ही 10 फसलों पर एमएसपी लाने का वादा किया है.
इंडी गठबंधन सत्ता में आई तो आरजेडी अग्निवीर योजना खत्म कर देगी. तमिलनाडु की तर्ज पर आरक्षण सीमा बढ़ा दी जाएगी. मंडल कमीशन की सभी सिफारिशों को लागू किया जाएगा.
DMK के घोषणापत्र में क्या है
विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ में DMK भी शामिल है. तमिलनाडु में सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके ने अपने घोषणापत्र में सत्ता में आने पर अग्निवीर योजना वापस लेकर भारतीय सशस्त्र बलों में स्थायी भर्ती सेवा फिर से शुरू की जाएगी. जाति-वार जनगणना और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों से संबंधित जनगणना समेत हर पांच साल में जनसंख्या जनगणना कराए जाएगी. डीएमके ने कहा है कि एमएसपी के लिए स्वामीनाथन समिति की सिफारिशें लागू की जाएंगी.
डीएमके ने घोषणा पत्र में महिलाओं से भी कई वादे किए. इंडी गठबंधन की सरकार बनने पर सभी राज्यों में महिलाओं को एक हजार रुपये की मासिक आर्थिक मदद और संसद व विधानसभाओं में उनके लिए 33 फीसदी आरक्षण तत्काल लागू कर दिया जाएगा. नौकरियों में भी महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया है. डीएमके के वादे में नई बात ये है कि देशभर में महिला स्वयं सहायता समूहों को 10 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन और एक लाख रुपये तक ब्याज मुक्त वाहन ऋण देने का वादा किया है. इतना ही नहीं महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान छुट्टी देने के संबंध में एक कानून बनाने पर भी विचार किया जाएगा.
रोजगार, आरक्षण जैसे मु्द्दे कितने असरदार
अब सवाल ये है कि आखिर इंडिया गठबंधन के तमाम दलों ने रोजगार, महिलाएं, अग्निवीर, किसान, आरक्षण जैसे मुद्दों पर इतनी तरजीह क्यों दी और क्या ये वादे असरदार हैं. असल बात है कि इन सभी मुद्दों पर एनडीए सरकार कहीं न कहीं कमजोर रही है या विपक्ष की विपरीत विचारधारा है. देश के विकास के लिए भी ये मुद्दे अहम है.
नरेंद्र मोदी सरकार की सेना में बहाली की अग्निपथ स्कीम शुरुआत से ही विवादास्पद रही है. विपक्ष लगातार इसका विरोध कर रहा है. कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सेना में भर्ती को दूसरे क्षेत्रों में नौकरियों की तरह नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि ये देश की सुरक्षा का सवाल है.
देश की करीब आधी आबादी महिलाओं की है. बिना महिला को साथ लिए कोई भी समाज सक्षम नहीं हो सकता. लेकिन आज भी कुछ क्षेत्रों में महिलाओं को पुरुषों के समान बराबरी का हक या सम्मान नहीं मिलता है. जब-जब महिला सशक्तिकरण का सवाल उठता है तब-तब समाज ही कठघरे में खड़ा होता है. पुराने समय से चल रही पुरुष प्रधान परंपरा आज भी कुछ स्थानों पर कायम है. वर्तमान में कुल 28 राज्यों में केवल 1 महिला मुख्यमंत्री हैं. ऐसे में महिलाओं की उन्नति के लिए अलग से सोचना आवश्यक है.
किसानों की कर्ज माफी और एमएसपी पर गारंटी देने वाला कानून बनाने का वादा इंडी गठबंधन के बड़े वादों में से एक है. ये किसान लंबे समय से मांग करते रहे हैं. हाल ही में पंजाब के हजारों किसानों ने पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर एमएसपी पर कानून की मांग को लेकर बड़ा धरना प्रदर्शन किया था. इससे पहले 2020 में भी दिल्ली के पांच बॉर्डरों पर किसान करीब 14 महीने तक धरना देते रहे थे.
वहीं देश में बेरोजगारी भी एक चिंताजनक विषय है. भारत में बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी है जो कि साल 1972-73 के बाद से सबसे ज्यादा है. 2011-12 में ये दर केवल 2.2 फीसदी थी. हालांकि शहरी इलाकों में 15 से 29 साल की उम्र के बीच पुरुषों में बेरोजगारी दर 18.7 फीसदी और महिलाओं में 27.2 फीसदी है. वहीं ग्रामीण इलाकों में ये क्रमश: 17.4 फीसदी और 13.6 फीसदी है. ऐसे में घोषणापत्र में रोजगार जैसे मुद्दों को तरजीह देना महत्वपूर्ण है.







